नागौर के जसनगर में धरती ने निकला 3500 साल पुराना रहस्य, ऐसा खजाना पहले कभी नहीं मिला

Last Updated:December 19, 2025, 22:36 IST
Nagaur News : नागौर के जसनगर में लूणी नदी किनारे 3500 वर्ष पुरानी सभ्यता के दफीने से 16 कौड़ियां और 5 टेराकोटा मुहरें मिलीं, जो भारतीय मुद्रा इतिहास में क्रांतिकारी खोज हैं. इस खोज की सबसे खास बात यह है कि ये साधारण मुहरें नहीं हैं, बल्कि मास्टर स्टाम्प हैं. इनका उपयोग हजारों वर्ष पहले चांदी की आहत मुद्राओं पर विशेष चिह्न अंकित करने के लिए किया जाता था.
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नागौर. नागौर जिले के लूणी नदी, जिसे मरूगंगा भी कहा जाता है, के किनारे बसे जसनगर कस्बे से इतिहास की परतों में छिपी लगभग 3500 वर्ष पुरानी सभ्यता के दुर्लभ प्रमाण सामने आए हैं. यहां लाइन बिछाने के लिए की जा रही खुदाई के दौरान करीब 20 फीट की गहराई पर एक प्राचीन मिट्टी का बर्तन यानी दफीना मिला, जिसमें इतिहास का अमूल्य खजाना सुरक्षित था. इस दफीने से 16 कौड़ियां और पक्की मिट्टी यानी टेराकोटा की 5 मुहरें या सीलें प्राप्त हुई हैं. यह खोज अपने आप में असाधारण मानी जा रही है, क्योंकि इससे उस दौर के आर्थिक और व्यापारिक तंत्र की झलक मिलती है.
इस खोज की सबसे खास बात यह है कि ये साधारण मुहरें नहीं हैं, बल्कि मास्टर स्टाम्प हैं. इनका उपयोग हजारों वर्ष पहले चांदी की आहत मुद्राओं पर विशेष चिह्न अंकित करने के लिए किया जाता था. अब तक देश में हुई पुरातात्विक खुदाइयों में आहत मुद्राएं तो मिलती रही हैं, लेकिन उन पर निशान बनाने वाले औजार या सीलें कभी सामने नहीं आई थीं. ऐसे में जसनगर से मिली ये मुहरें भारतीय मुद्रा इतिहास में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी उपलब्धि मानी जा रही हैं, जो प्राचीन काल की टकसाली व्यवस्था को समझने में अहम भूमिका निभा सकती हैं.
राष्ट्रीय सेमिनार में भी चकित हुए विशेषज्ञइतिहासकार नरेंद्र सिंह द्वारा उपलब्ध कराई गई इस खोज से जुड़ी जानकारी जब एक राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत की गई, तो देशभर के विशेषज्ञ भी हैरान रह गए. सेवानिवृत्त वृत्त अधीक्षक एवं विख्यात मुद्राशास्त्री जफर उल्लाह खां ने बताया कि यह खोज भारतीय सिक्कों के इतिहास को समझने में मील का पत्थर साबित होगी. उन्होंने कहा कि यह खोज प्रसिद्ध पुरातत्वविद अलेक्जेंडर कनिंघम के उस सिद्धांत को भी पुष्ट करती है, जिसमें भारतीय सिक्कों का इतिहास ईसा पूर्व 1000 वर्ष तक पुराना बताया गया था.
प्राचीन नगर और टकसाल के संकेतजसनगर से प्राप्त यह खजाना केवल मुहरों और कौड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक लुप्त हो चुके नगर और समृद्ध व्यापारिक व्यवस्था की कहानी भी बयां करता है. जिस स्थान पर यह दफीना मिला, वहां बड़ी आकार की प्राचीन ईंटें भी पाई गई हैं. इससे संकेत मिलता है कि लूणी नदी के किनारे एक सुव्यवस्थित नगर बसा हुआ था, जहां संभवतः एक बड़ी टकसाल संचालित होती थी. दफीने में मिली पांच मुहरों में से दो भूरे रंग की और तीन काले रंग की हैं, जो उस समय की उन्नत तकनीक और उच्च शिल्प कौशल को दर्शाती हैं. यह खोज न केवल जसनगर, बल्कि पूरे नागौर जिले को प्राचीन भारतीय इतिहास के मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने वाली मानी जा रही है.
About the AuthorAnand Pandey
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
Location :
Nagaur,Rajasthan
First Published :
December 19, 2025, 22:36 IST
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नागौर में धरती ने निकला 3500 साल पुराना रहस्य, ऐसा खजाना पहले कभी नहीं मिला



