तीन केस, तीन गिरोह और फर्जीवाड़े का पूरा साम्राज्य बेनकाब; जयपुर में एसओजी की ताबड़तोड़ कार्रवाई!

Last Updated:December 04, 2025, 22:17 IST
Rajasthan News : राजस्थान SOG ने लगातार तीन बड़े अभियानों में पेपर लीक, डमी कैंडिडेट और फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट माफिया पर शिकंजा कस दिया है. इन कार्रवाइयों ने राज्य में संगठित फर्जीवाड़े के गहरे नेटवर्क को उजागर कर दिया है. भर्ती परीक्षाओं से लेकर मेडिकल सेक्टर तक, बड़े रैकेट सक्रिय रूप से युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचा रहे थे. SOG अब इन पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है.
जयपुर. राजस्थान में स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप लगातार तीन बड़े मामलों में कार्रवाई करते हुए भर्ती परीक्षाओं की धांधली और मेडिकल सेक्टर में फर्जी सर्टिफिकेट माफिया पर शिकंजा कस रही है. तीनों मामले अलग-अलग हैं, लेकिन एक बात स्पष्ट है कि राज्य में फर्जीवाड़े का नेटवर्क जितना फैल रहा है, SOG उतनी ही सख्ती से उसका पीछा कर रही है. इन मामलों ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि संगठित स्तर पर चल रहे ऐसे अपराध प्रशासन और युवाओं के भविष्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं. SOG की तेजी से की गई इन कार्रवाइयों से यह भी साबित हुआ है कि एजेंसी अब बड़े नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की तैयारी में है.
पहला केस SI भर्ती परीक्षा 2021 के पेपर लीक से जुड़ा है. SOG ने जयपुर ग्रामीण से महेन्द्र कुमार चौधरी को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया कि उसने पेपर लीक के सरगना विनोद रेवाड़ से आठ लाख रुपए में पेपर खरीदा था. दोनों ने परीक्षा से एक दिन पहले यानी 14 सितंबर 2021 को सॉल्व्ड पेपर पढ़ लिया था. महेन्द्र मेरिट में 474 नंबर तक पहुंच गया, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका. बुधवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से आठ दिसंबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया. इस केस में अब तक 133 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जो इसके बड़े नेटवर्क की ओर संकेत करती हैं.
ग्रामसेवक भर्ती परीक्षा में डमी कैंडिडेट का खुलासा
दूसरा केस ग्रामसेवक भर्ती परीक्षा 2016 से जुड़ा है. SOG ने दस हजार रुपए के इनामी आरोपी लाडूराम बिश्नोई को गिरफ्तार किया है. उसने अपनी जगह डमी अभ्यर्थी गोपाल बिश्नोई से परीक्षा दिलवाई थी और इसी आधार पर ग्रामसेवक की नौकरी हासिल की थी. गोपाल बिश्नोई बाड़मेर का रहने वाला है और जोधपुर में सेकंड ग्रेड टीचर के पद पर कार्यरत था. उसे दिसंबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद से लाडूराम फरार चल रहा था और पुलिस ने उस पर इनाम घोषित कर रखा था. वह बाड़मेर की धोरीमन्ना तहसील का निवासी है. SOG ने एक दिसंबर को उसे पकड़कर इस मामले की दूसरी कड़ी भी जोड़ दी.
मेडिकल सेक्टर में फर्जी डॉक्टरों का गिरोह बेनकाब
तीसरा केस मेडिकल क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता पैदा करने वाला है. SOG ने फर्जी प्रमाण-पत्रों से इंटर्नशिप करने वाले दौसा निवासी तीन फर्जी डॉक्टर- डॉ. पीयूष त्रिवेदी, डॉ. शुभम गुर्जर और डॉ. देवेंद्र सिंह गुर्जर को गिरफ्तार किया है. तीनों विदेश से MBBS कर चुके हैं, लेकिन भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए FMGE परीक्षा पास करना अनिवार्य है. जांच में पता चला कि देवेंद्र और शुभम ने 16 लाख रुपए लेकर पीयूष त्रिवेदी को फर्जी सर्टिफिकेट और NMC रजिस्ट्रेशन दिलवाए. पीयूष ने 2022 में जॉर्जिया से MBBS किया था और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करौली मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप की. शुभम गुर्जर ने अलवर के राजीव गांधी अस्पताल में इंटर्नशिप की, जबकि देवेंद्र ने दौसा के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में. SOG को संदेह है कि इस पूरे खेल के पीछे एक बड़ा गिरोह काम कर रहा है, जो विदेशी MBBS ग्रेजुएट्स को फर्जी रजिस्ट्रेशन और इंटर्नशिप दिलवाकर उन्हें डॉक्टर के रूप में स्थापित कर देता है. तीनों आरोपियों को आज कोर्ट में पेश किया जा रहा है. विदेश से MBBS करके लौटे सभी युवा अब SOG की जांच के दायरे में आ गए हैं.About the AuthorAnand Pandey
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
Location :
Jaipur,Rajasthan
First Published :
December 04, 2025, 22:17 IST
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तीन गिरोह और फर्जीवाड़े का पूरा साम्राज्य बेनकाब; एसओजी की ताबड़तोड़ कार्रवाई!



