Rajasthan

बुजुर्गों के लिए वरदान है ये छड़ी, चलने के सहारे के साथ बैठने के लिए बन जाएगी स्टूल

बाड़मेर. कहते है कि बड़े बड़े प्रयोग छोटे छोटे प्रयासों से होते है. कई बार स्कूल में पढ़ने वाले मासूम कुछ ऐसा कर गुजरते है कि देखने वाले दांतो तले अंगुली दबाने को मजबूर हो जाते है. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है बालोतरा जिले के छोटे से गांव खरण्टिया की पूजा पटेल ने.कहते हैं कि बुजुर्गो के लिए बुढ़ापे में छड़ी ही एकमात्र सहारा होती है. कहीं आने-जाने और चलने-फिरने में बुढ़ापे में घुटने साथ नहीं देते है इसलिए छड़ी ही साथ देती है.

वहीं वृद्धावस्था में टहलने या बाजार जाने में बुजुर्गों को थकान के समय बार- बार नीचे बैठना पड़ता है, ऐसे में कोई सटीक स्थान न मिलने पर मजबूरन जमीन पर ही बैठकर अपनी थकान दूर करते हैं. ऐसे बुजुर्गों के लिए पूजा ने एक ऐसी छड़ी बनाई है जोकि उन्हे दोहरा फायदा देगी.

पूजा के इस नवाचार हर कोई रह तारीफयह छड़ी चलने फिरने में सहारा देगी. साथ ही थकान होने पर स्टूल बनाकर कहीं भी आसानी से बैठकर राहत पा सकते हैं. महज आठवी में पढ़ने वाली पूजा पटेल ने बुजुर्ग लोगों की परेशानियों को देखते हुए एक अनूठी छड़ी बनाई है जोकि बुजुर्गों की सच्ची हमसफ़र बन सकती है. खरण्टिया कि राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाली इस छात्रा के इस नवाचार की हर तरफ तारीफ हो रही है. पूजा की यह छड़ी बुजुगों की मार्गदर्शक, मोबाईल चार्जर यूनिट, कुर्सी, छाता और टेबल बन सकती है.

5200 रुपए आए खर्चइसके साथ ही छड़ी में लगी अलार्म ना केवल भीड़भाड़ वाले इलाकों में बुजुर्ग को राह प्रसस्त करने का काम करेगी बल्कि अलार्म सिस्टम बुजर्ग के लिए मददगार भी बनेगी. बाल वैज्ञानिक पूजा पटेल बताती है कि इस छड़ी को बनाने के लिए 5200 रुपए का खर्च आया है. यह बेहद हल्की होने के साथ ही काफी मददगार होती है. इस छड़ी को स्टूल में बदल सकेंगे. यह छड़ी फोल्ड की जा सकती है और बेहद हल्की है.

Tags: Barmer news, Local18, Rajasthan news

FIRST PUBLISHED : July 21, 2024, 10:56 IST

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