मिर्च की फसल को लीफ कर्ल व मोज़ेक रोग से कैसे बचाएं – हिंदी

व्हाइट फ्लाई और एफिड का खतरा: मिर्च की फसल को लीफ कर्ल व मोज़ेक रोग से कैसे…
Nagaur Chilli Crop Video: मिर्ची की फसल के लिए यह समय उत्पादन का महत्वपूर्ण चरण है. ऐसे में लीफ कर्ल और मोज़ेक रोग का प्रकोप किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है. बदलते मौसम में यह रोग पौधों पर सबसे अधिक असर डालता है और उत्पादन में 40 से 60 प्रतिशत तक की गिरावट ला सकता है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग सिंह के अनुसार, इन रोगों का मुख्य कारण व्हाइट फ्लाई और एफिड जैसे कीट हैं, जो पौधों का रस चूसकर वायरस को फैलाते हैं. यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो पूरा खेत प्रभावित हो सकता है. मोज़ेक रोग में पत्तियां पीली और हरी लहरदार दिखाई देती हैं. वहीं, लीफ कर्ल रोग में पत्तियां ऊपर की ओर मुड़कर सिकुड़ जाती हैं. इन लक्षणों से पौधों की सामान्य वृद्धि प्रभावित होती है, फूल झड़ने लगते हैं और फलियों का आकार छोटा हो जाता है. शुरुआती लक्षण पहचानकर ही नुकसान को नियंत्रित किया जा सकता है. प्रभावित पौधों को निकालें: संक्रमित पौधों को खेत से तुरंत निकालकर नष्ट करना आवश्यक है. कीटनाशक का प्रयोग: व्हाइट फ्लाई और एफिड नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 0.3 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें. पीला स्टिकी ट्रैप: 8–10 ट्रैप प्रति बीघा लगाने से कीट पकड़कर आबादी नियंत्रित रहती है. संतुलित खाद और सिंचाई: जैविक खाद, सड़ी गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट से मिट्टी को उर्वर बनाए रखना चाहिए. लगातार एक ही खेत में मिर्च या अन्य सोलानेसी परिवार की फसलों को उगाने से कीट और वायरस बढ़ जाते हैं. इसलिए सीजन के बाद दलहनी या तिलहनी फसलें उगाने से रोग चक्र टूटता है और फसल सुरक्षित रहती है. मिर्ची की फसल को इन रोगों से बचाने के लिए सबसे ज़रूरी है निरंतर निगरानी और समय पर कार्रवाई. यदि किसान इन सभी उपायों को अपनाते हैं, तो मिर्च की फसल को लीफ कर्ल और मोज़ेक रोगों से काफी हद तक बचाया जा सकता है और उत्पादन में गिरावट रोकी जा सकती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित न हो.
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व्हाइट फ्लाई और एफिड का खतरा: मिर्च की फसल को लीफ कर्ल व मोज़ेक रोग से कैसे…




