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Last Updated:December 19, 2025, 17:04 IST

Jalore Picnic Spot: जालोर की अरावली पहाड़ियों में बसे पिकनिक और पर्यटन स्थल इतिहास, आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत संगम पेश करते हैं. यहां के हरियाली से घिरे इलाके और प्राचीन किले, मंदिर और दर्शनीय स्थल पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं. परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए ये स्थल आदर्श हैं. सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का मिश्रण जालोर को राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक बनाता है, जो हर यात्रा प्रेमी के लिए आकर्षण का केंद्र है.इतिहास से सजी अरावली, सुकून देने वाले जालोर के पर्यटन स्थल...

अरावली की पहाड़ियों की ऊंचाई पर स्थित जालोर किला आज जिले की ऐतिहासिक पहचान के साथ-साथ धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है. किले की प्राचीन बनावट, आसपास फैली पहाड़ियां और ऊपर से दिखने वाला मनोरम दृश्य यहां आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करता है. किले के परिसर और आसपास ऐसे कई पिकनिक स्पॉट मौजूद हैं, जहां एक ओर श्रद्धालु धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, तो दूसरी ओर पर्यटक प्रकृति की सुंदरता और शांति का अनुभव करते हैं. यही कारण है कि वीकेंड, छुट्टियों और त्योहारों पर जालोर किले और इसके आसपास के क्षेत्रों में सैलानियों की आवाजाही बनी रहती है.

इतिहास से सजी अरावली, सुकून देने वाले जालोर के पर्यटन स्थल...

तोपखाना अपनी ऐतिहासिक विरासत के साथ-साथ आज एक प्रमुख पिकनिक और पर्यटन स्थल के रूप में पहचान बना चुका है. ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान प्रारंभ में एक संस्कृत पाठशाला के रूप में विकसित किया गया था, जहां विद्या अध्ययन का कार्य होता था. बाद के काल में यहां तोपें स्थापित की गईं, जिसके कारण इसे तोपखाना के नाम से जाना जाने लगा. बताया जाता है कि इस संरचना का निर्माण तेरहवीं सदी में राजा भोज द्वारा करवाया गया था. वर्तमान में यहां आने वाले पर्यटक प्राचीन तोपों, किले की भव्य बनावट और ऊंचाई से दिखने वाले शहर के मनोरम दृश्यों का आनंद लेते हैं. परिवार और युवा वर्ग यहां फोटोशूट, इतिहास को करीब से महसूस करने और खुले वातावरण में समय बिताने पहुंचते हैं.

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जालोर का प्रसिद्ध कैलाशधाम धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रमुख केंद्र है. बिशनगढ़ के नाकोड़ा रोड पर बने इस कैलाशधाम में 72 फीट ऊंची विशाल शिव प्रतिमा दूर से ही श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है. हरियाली से घिरा यह परिसर सावन, महाशिवरात्रि और वीकेंड पर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से गुलजार रहता है. शिव प्रतिमा के नीचे बनी गुफा में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कराए जाते हैं, जो इसे और खास बनाते हैं. परिसर में नंदी और जलाशय के बीच बने रास्ते श्रद्धालुओं को शांति और सुकून का अनुभव कराते हैं. यहां हर मौसम में आने वाले लोग दर्शन के साथ-साथ फोटोशूट और प्राकृतिक वातावरण का आनंद भी लेते हैं.

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अरावली की ऊंची पहाड़ियों पर स्थित सुंधा माता मंदिर जालोर ही नहीं बल्कि पूरे राजस्थान का प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल है. यह मंदिर माता सुंधा के अद्भुत दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को दूर-दूर से आकर्षित करता है. मंदिर का परिसर पहाड़ियों और हरियाली से घिरा हुआ है, जो प्राकृतिक सौंदर्य के साथ आध्यात्मिक शांति भी प्रदान करता है. आसपास फैला मनोहर दृश्य और पहाड़ी रास्ते पर्यटकों को घंटों यहां बने रहने और फोटोशूट का आनंद लेने के लिए प्रेरित करते हैं. दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक मंदिर परिसर में पिकनिक और धार्मिक यात्रा दोनों का आनंद लेते हैं. विशेषकर मानसून के मौसम में यहां की हरियाली और ठंडा मौसम इसे और भी आकर्षक बना देता है. वीकेंड और त्योहारों पर मंदिर के पास भव्य मेलों और धार्मिक आयोजनों का आयोजन भी होता है, जो पर्यटकों के अनुभव को और समृद्ध कर देता है.

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प्रकृति प्रेमियों के लिए सुंधा माता वाइल्डलाइफ सेंचुरी किसी आकर्षण से कम नहीं है. यह सेंचुरी पहाड़ियों, जंगल और वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास है, जिसमें कई दुर्लभ प्रजातियों के जीव पाए जाते हैं. यहां पिकनिक मनाने आने वाले लोग ट्रेकिंग, पक्षी दर्शन और प्राकृतिक वातावरण का अनुभव करते हैं. जंगल के भीतर बने सुरक्षित मार्ग और झरनों के किनारे बने पथ इसे परिवार और युवा समूहों के लिए आदर्श बनाते हैं. शहरी जीवन की भागदौड़ से दूर यह स्थान लोगों को सुकून और शांति प्रदान करता है. विशेषकर मानसून और सर्दियों के मौसम में हरियाली और ठंडा मौसम सेंचुरी के आकर्षण को और बढ़ा देता है. यहां फोटोग्राफी के शौकीन भी कई घंटे प्राकृतिक दृश्य और वन्य जीवन का आनंद लेते हैं. पर्यटक अक्सर यहां लंबी पैदल यात्रा और जंगल सफारी का अनुभव भी करते हैं.

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जालोर का ऐतिहासिक जहाज मंदिर अपनी अनोखी संरचना और धार्मिक महत्व के कारण खास पहचान रखता है. यह मंदिर मंडवाला गाँव में स्थित है और पूरी तरह संगमरमर से तराशा गया है, जिसे पहाड़ को काटकर नाव के आकार में बनाया गया है. इसी विशेष बनावट के कारण इसे “जहाज मंदिर” कहा जाता है. मंदिर की स्थापना 1993 में जैन धर्म के लिए की गई थी और 9 मई 1993 को इसकी आधारशिला रखी गई. जहाज मंदिर जैन श्रद्धालुओं के साथ-साथ इतिहास, वास्तुकला और मूर्तिकला में रुचि रखने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित करता है. शांत वातावरण और प्राकृतिक परिवेश इसे एक आदर्श पिकनिक और पर्यटन स्थल बनाते हैं. पर्यटक यहां केवल दर्शन के लिए ही नहीं आते, बल्कि मंदिर के अद्भुत संगमरमर नक्काशी और नाव जैसे निर्माण को करीब से देखने के लिए भी लंबे समय तक ठहरते हैं.

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December 19, 2025, 17:04 IST

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जालोर के पिकनिक और पर्यटन स्थल: अरावली की हरियाली और इतिहास का अद्भुत मिश्रण

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