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इजराइल वाली खेती, राजस्थान के गांव में कमाल! कुंडलपुर के किसान कमा रहे करोड़ो

Last Updated:December 09, 2025, 16:11 IST

Agriculture News : सीकर जिले के धोद क्षेत्र का कुंडलपुर गांव आज पूरे राजस्थान में हाइटेक खेती का केंद्र बन गया है. यहां 40 से ज्यादा ग्रीन हाउस और शेडनेट हाउस से किसान सालभर बेहतर क्वालिटी की सब्जियां उगा रहे हैं. आधुनिक तकनीकों से जोखिम कम और मुनाफा कई गुना बढ़ा है, जिससे गांव की पहचान लगातार ऊंचाइयां छू रही है.खेती

Agriculture News: सीकर जिले के धोद क्षेत्र का कुंडलपुर गांव पूरे राजस्थान में हाइटेक खेती के लिए जाना जाता है. इस अकेले गांव में 40 से ज्यादा ग्रीन हाउस और शेडनेट हाउस स्थापित हो चुके हैं, जिनकी वजह से नियंत्रित वातावरण में सब्जियों का उत्पादन कई गुना बढ़ा है. आधुनिक तकनीक अपनाने से किसानों को मौसम के जोखिम कम झेलने पड़ते हैं और वे सालभर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं जिससे गांव की पहचान तेजी से बढ़ी है.

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करीब 3500 आबादी वाले कुंडलपुर में लगभग 1000 किसान उन्नत तकनीकों के साथ खेती कर रहे हैं. ग्रीन हाउस, शेडनेट, मल्चिंग और लोटनल जैसी तकनीकों के कारण उत्पादन लागत कम हुई है और पैदावार ज्यादा मिलने लगी है. इस गांव में किसान पारंपरिक खेती से हटकर ऐसी योजनाओं की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें अधिक लाभ और कम खतरा हो. इसी कारण यहां खेती से जुड़ने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

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गांव के किसान इजरायल की तर्ज पर विकसित तकनीक के अनुसार नियंत्रित वातावरण में खीरा, टमाटर, मिर्च, शिमला मिर्च तथा विभिन्न फूलों की खेती कर रहे हैं. ग्रीन हाउस की वजह से तापमान, नमी और प्रकाश पर पूरा नियंत्रण रहता है, जिससे फसलें बेहतर गुणवत्ता की तैयार होती हैं. बेहतर क्वालिटी के कारण किसानों को स्थानीय तथा बाहरी बाजारों में महंगे दाम मिलते हैं, जिससे उनकी आय में तेजी से वृद्धि हुई है. इसके अलावा यहां के कुछ किसान मधुमक्खी पालन भी रखते हैं

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कुंडलपुर गांव के पूर्व सरपंच भोलाराम मीणा ने बताया कि कुंडलपुर में हाइटेक खेती की शुरुआत लगभग दस वर्ष पहले किसान प्रेमाराम यादव ने की थी. उन्होंने जोखिम उठाते हुए नई तकनीक अपनाई और बेहतर परिणाम मिलने पर उनकी सफलता पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन गई. धीरे-धीरे गांव के अन्य किसानों ने भी नवाचारों को अपनाना शुरू किया और आज स्थिति यह है कि करीब 70 प्रतिशत किसान इस उन्नत तकनीक से खेती कर रहे हैं. इस बदलाव ने गांव की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है.

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पूर्व सरपंच भोलाराम मीणा ने बताया कि यहां की हाइटेक खेती में आधुनिक सिंचाई पद्धतियां प्रमुख भूमिका निभाती हैं. ड्रिप सिंचाई, फॉगिंग सिस्टम और फर्टिगेशन तकनीक से पानी की बचत होती है और पौधों को आवश्यक पोषक तत्व समय पर मिलते हैं. इन प्रणालियों से उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ किसानों को अधिक मेहनत भी नहीं करनी पड़ती. नियंत्रित सिंचाई और पोषण प्रबंधन के कारण फसलों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता में भी अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है.

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इन नवाचारों और तेजी से बढ़ती उत्पादकता को देखते हुए उद्यान विभाग ने कुंडलपुर को हाइटेक हॉर्टिकल्चर मॉडल क्लस्टर गांव घोषित किया है. उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस मॉडल ने किसानों की आय को कई गुना बढ़ाया है और गांव में रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं. खेती से जुड़े कामों में युवाओं की भागीदारी बढ़ी है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन साफ दिखाई दे रहा है.

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उद्यान विभाग ने पिछले वर्ष जिलेभर में करीब 60 ग्रीन हाउस और शेडनेट हाउस स्थापित करवाए थे, जिनमें सबसे अधिक 28 यूनिट कुंडलपुर में लगवाए गए. इन इकाइयों पर किसानों को लगभग 50 करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया था, जिससे अधिक किसानों ने इस तकनीक को अपनाया था. कृषि विशेषज्ञों की देखरेख और किसानों की मेहनत ने मिलकर कुंडलपुर को केवल सीकर ही नहीं बल्कि पूरे राजस्थान का सबसे मजबूत हाइटेक खेती केंद्र बना दिया है.

First Published :

December 09, 2025, 16:11 IST

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