राजस्थान का अनोखा तीर्थ, जानें पौराणिक कथा

Last Updated:November 20, 2025, 19:03 IST
राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित मचकुंड तीर्थ को सभी तीर्थों का भांजा कहा जाता है. मान्यता है कि देवासुर संग्राम के दौरान देवताओं ने अयोध्या के चक्रवर्ती राजा मानदाता से सहायता मांगी, जिसके बाद उनके पुत्र राजा मचकुंड ने देवताओं की ओर से लंबे समय तक युद्ध किया और विजय दिलाई. युद्ध के बाद थके राजा मचकुंड को देवताओं ने धौलागढ़ की एक गुफा में विश्राम के लिए भेजा और वरदान दिया कि जो भी उन्हें कच्ची नींद से जगाएगा, वह भस्म हो जाएगा.
भारत में तीर्थ स्थल तो कई है जहां वर्षभर लाखों की तादाद में भक्त पहुंचते हैं. लेकिन राजस्थान के धौलपुर जिले में मचकुंड नाम का एक तीर्थ स्थल ऐसा बना हुआ है, जिसे सभी तीर्थ स्थलों का भांजा कहा जाता है. सभी तीर्थ स्थलों का भांजा कहा जानें के पीछे ऐसी मान्यता छुपी है कि जब देवासुर संग्राम देवताओं और दानवों में युद्ध हो रहा था तो देवता उस युद्ध में पराजित होने वाले थे तभी देवता अयोध्या के चक्रवर्ती राजा मानदाता जी से सहायता मागने जाते है.

अयोध्या के चक्रवर्ती राजा मानदाता देवताओं की तरफ से युद्ध लड़ने के लिए अपने पुत्र राजा मचकुंड को भेजते हैं.<br />यह युद्ध कई युगों तक चला था और इस युद्ध में देवताओं को जीत हुई यह युद्ध कई वर्षों तक चलने के कारण राजा मचकुंड विश्राम करना चाहते थे, तभी देवताओं ने उन्हें धौलागढ़ (जिसे आज धौलपुर कहा जाता है) नाम की पहाड़ी पर भेज दिया और कहा कि आप यहां पर विश्राम करिए अगर आपको कोई कच्ची नींद जगाएगा उठाएगा तो वह जलकर भस्म हो जाएगा.

धोलागढ़ गुफा में मचकुंड महाराज विश्राम करने चले जाते हैं देवासुर संग्राम के बाद मथुरा में कालयावन नामक असुर का आतंक था. कालयावन को वरदान था कि सामने युद्व लड़ने से उसे कोई पराजित नहीं कर सकता. भगवान श्री कृष्ण कालयान से युद्ध करते-करते मथुरा से धोलागढ़ की गुफा पहुंचते हैं, जहां राजा मचकुंड विश्राम कर रहे होते हैं.
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भगवान श्री कृष्णा अपने पीतांबर वस्त्र को मचकुंड महाराज के ऊपर डाल देते हैं. जिससे कालया वन समझता है कि यहां पर कृष्ण सो रहे हैं तो कालयावन लात मारते हुए उस पीतांबर वस्त्र को हटाता है, जिससे राजा मचकुंड की नींद खुल जाती है और कालयावन उनकी आंखों के तेज से भस्म हो जाता है.

तब धौलागढ़ नामक जगह पर ही मचकुंड महाराज और देवताओं ने यज्ञ किया और और देवताओं ने राजा मचकुंड को वरदान दिया कि आपको अब तीर्थ का भांजा कहा जाएगा.<br />भादों माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तथा षष्ठी को मचकुंड का लक्खी मेला आयोजित होता है. इसे देवछठ मेले के नाम से भी जाना जाता है, इस मेले में देवछठ के दिन हजारों श्रध्दालू मचकुंड के पवित्र सरोवर में स्नान करते है शादी की मोहरे भी यहां विसर्जित की जाती है.
First Published :
November 20, 2025, 19:03 IST
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धौलपुर का मचकुंड धाम, राजस्थान का अनोखा तीर्थ, जानें इसकी पौराणिक कथा



