Rajasthan

दौसा के किसान ने कर दिखाया कुछ ऐसा…..की घर की रसोई, पशुओं के आहार, और जैविक खाद से लेकर बढ़ रही फसल की पैदावार

दौसा. जहां एक ओर बढ़ती महंगाई के दौर में लोग घरेलू खर्चों से परेशान हैं, वहीं दौसा जिले के एक किसान ने अपनी सोच और मेहनत से न केवल अपने घर का खर्च कम किया है, बल्कि खेतों में भी उत्पादन बढ़ाकर दूसरों के लिए मिसाल पेश की है. धूलकोट गांव निवासी किसान रामसिंह गुर्जर ठेकेदार ने करीब पांच से छह वर्ष पहले अपने घर पर गोबर गैस प्लांट लगाकर एक ऐसी व्यवस्था तैयार की है, जिससे उन्हें हर वर्ष हजारों रुपए की बचत हो रही है.

रामसिंह गुर्जर ने बताया कि उन्होंने यह गोबर गैस प्लांट सरकारी अनुदान के तहत लगवाया था. उस समय उन्हें यह नहीं पता था कि यह प्लांट भविष्य में इतना लाभदायक साबित होगा. आज गोबर गैस प्लांट के माध्यम से न केवल घर की रसोई का काम चल रहा है, बल्कि पशुओं के आहार तैयार करने से लेकर खेतों के लिए जैविक खाद तक इसी से बन रही है.

घरेलू उपयोग में आ रही गोबर गैसकिसान ने बताया कि गोबर गैस प्लांट से निकलने वाली गैस को पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घर तक पहुंचाया गया है, जहां इस गैस पर चाय बनाने, भोजन पकाने और पशुओं के चारे को तैयार करने का कार्य किया जाता है. अब उन्हें एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. पहले हर महीने गैस सिलेंडर भरवाने में 900 से 1000 रुपए तक खर्च होते थे, लेकिन अब यह खर्च पूरी तरह बच गया है. पांच सालों में किसान रामसिंह के अनुसार, उन्होंने करीब 10 से 12 हजार रुपए की सीधी बचत की है. इस बचत से वे अन्य कृषि कार्यों में निवेश कर रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी में भी वृद्धि हुई है.

खेतों में मिल रहा जैविक खाद का लाभरामसिंह ने बताया कि गोबर गैस प्लांट से गैस निकालने के बाद जो अवशेष (स्लरी) बचता है, वही खेतों में जैविक खाद के रूप में प्रयोग किया जाता है. यह खाद पूरी तरह रासायनिक मुक्त होती है और इससे फसल की पैदावार भी बेहतर होती है. उनका कहना है कि इस खाद से मिट्टी की उर्वरक शक्ति बनी रहती है और फसलों की गुणवत्ता में सुधार आता है. इस कारण खेतों की पैदावार पहले से अधिक हो गई है, जिसे बाजार में भी आसानी से बेचा जा सकता है.

किसान रामसिंह ने बताया कि गोबर गैस से चलने वाले चूल्हे से किसी भी प्रकार के हादसे का डर नहीं होता. उन्होंने कहा, जब तक चूल्हे पर गैस जलाने की प्रक्रिया नहीं की जाती, तब तक इसमें आग नहीं लगती. एलपीजी सिलेंडर से आग या विस्फोट की खबरें आए दिन सुनने को मिलती हैं, लेकिन गोबर गैस पूरी तरह सुरक्षित और पर्यावरण हितैषी है. उनका कहना है कि इस गैस से निकलने वाला धुआं भी बहुत कम होता है, जिससे घर में प्रदूषण नहीं होता. वहीं, इस गैस के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन भी घटता है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम है.

गोबर गैस योजना ग्रामीण विकास की दिशा में बड़ा कदम

रामसिंह गुर्जर ने बताया कि आज भी बहुत से किसान गैस सिलेंडर पर निर्भर हैं, जबकि उनके पास पर्याप्त पशुधन और गोबर उपलब्ध है. उन्होंने अन्य किसानों से अपील की है कि वे भी अपने घरों या खेतों में गोबर गैस प्लांट लगाएं. इससे न केवल गैस की बचत होगी, बल्कि खेतों में डालने के लिए उत्तम जैविक खाद भी तैयार होगी, जो रासायनिक खादों की अपेक्षा सस्ती और स्वास्थ्यवर्धक होती है. सरकार की ओर से ग्रामीण इलाकों में गोबर गैस प्लांट लगाने के लिए अनुदान योजनाएं चलाई जा रही हैं.

ऐसे में किसान अगर इन योजनाओं का लाभ उठाएं तो वे न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बन सकते हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, ऊर्जा और पर्यावरण संतुलन भी बनाए रख सकते हैं. रामसिंह गुर्जर का यह कदम गांव के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है, उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर इच्छा शक्ति और सही दिशा में प्रयास हो, तो ग्रामीण नवाचार से आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है.

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