शाइन इंडिया फाउंडेशन नेत्रदान में अग्रणी, 1500 को मिली रोशनी

Last Updated:December 10, 2025, 17:17 IST
वर्ष 2011 में कोटा रेलवे स्टेशन पर हुआ एक हादसा आज हजारों लोगों की आंखों में नई रोशनी बन चुका है. उस पल से प्रेरित होकर शाइन इंडिया फाउंडेशन की स्थापना हुई, जिसने अब तक 1500 से अधिक नेत्रदान कराए हैं. छोटी-सी शुरुआत से लेकर 200 किलोमीटर के दायरे में लोगों तक रोशनी पहुंचाने तक, यह संस्था निस्वार्थ सेवा और समर्पण की मिसाल बन चुकी है.
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कोटा. कभी एक रेलवे स्टेशन पर हुआ एक छोटा-सा हादसा आज हजारों लोगों की आंखों में रोशनी बन चुका है. वर्ष 2011 में शुरू हुई ‘शाइन इंडिया फाउंडेशन’ आज पूरे हाड़ौती संभाग में नेत्रदान के क्षेत्र में एक मजबूत पहचान बन चुकी है. संस्था अब तक 1500 से अधिक नेत्रदान करवा चुकी है और हर महीने औसतन 20 से 25 जोड़ी नेत्रदान कराए जा रहे हैं. संस्था के संस्थापक की यह प्रेरक कहानी वर्ष 2011 की है, जब वे अपनी पत्नी के साथ सूरत के एक ब्लड बैंक में कार्यरत थे. दिवाली की छुट्टियों में कोटा आते समय रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के रुकते ही एक बच्चा, जो कॉर्निया की गंभीर बीमारी से पीड़ित था, अचानक ट्रेन की आवाज़ से घबरा गया. वह इधर-उधर भागा और प्लेटफॉर्म पर फिसलकर बेहोश हो गया, परिवार को ट्रेन में बैठाकर लौटते समय जब उन्होंने उस बच्चे को बेहोशी की हालत में देखा, तो उसकी आंखें पूरी तरह सफेद नजर आ रही थी.
वहीं मौजूद लोगों ने कहा कि अगर इस बच्चे को आंखों का दान मिल जाए तो वह दोबारा दुनिया देख सकता है. यह बात उनके दिल-दिमाग में तीर की तरह चुभ गई और उसी पल उन्होंने फैसला लिया कि अब वे ऐसे बच्चों के लिए ही अपना जीवन समर्पित करेंगे. इसके बाद उन्होंने अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़ दी और कोटा आकर नेत्रदान के क्षेत्र में काम शुरू किया, शुरुआत बेहद कठिन थी. पूरे एक साल तक लगातार मेहनत के बावजूद वे सिर्फ दो नेत्रदान ही करवा सके. लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लोगों के बीच जाकर घर-घर, गली-गली नेत्रदान के महत्व और जागरूकता फैलाते रहे.
आज 200 किलोमीटर के दायरे में कहीं भी पहुंच जाती है टीमलगातार 14 वर्षों की अथक मेहनत का ही परिणाम है कि आज शाइन इंडिया फाउंडेशन प्रदेश की एकमात्र ऐसी संस्था बन चुकी है, जो 200 किलोमीटर के दायरे में कहीं भी जाकर नेत्रदान कराती है. चाहे गांव में सड़क हो या न हो, मौसम कैसा भी हो—संस्था की टीम नेत्रदान की सूचना मिलते ही तुरंत निकल पड़ती है. संस्था ने नेत्रदान को लेकर तीन अलग-अलग वर्गों के लिए विशेष जागरूकता अभियान भी चलाए हैं. छोटे बच्चों के लिए स्कूलों में कार्यशालाएं और संवाद कार्यक्रम, युवाओं के लिए प्रतियोगिताएं, रैलियां और जागरूकता अभियान; और बुजुर्गों के लिए घर-घर जाकर नेत्रदान, अंगदान और देहदान की जानकारी. इन प्रयासों का असर यह हुआ कि आज पूरे हाड़ौती संभाग से 1500 से अधिक नेत्रदान हो चुके हैं. कई नेत्रदान ऐसे गांवों से भी हुए हैं, जहां न तो ठीक से सड़क है और न ही आबादी 200 घरों से ज्यादा है.
देश ही नहीं, विदेश तक मिल चुका है सम्मानशाइन इंडिया फाउंडेशन को उसके सेवा कार्यों के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई बार सम्मानित किया जा चुका है. इतना ही नहीं, संस्था को लंदन के ‘हाउस ऑफ लॉर्ड्स’ में भी विशेष सम्मान मिल चुका है. इसके अलावा संस्था ने वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी अपना नाम दर्ज कराया है. संस्था का साफ कहना है कि नेत्रदान के लिए दूरी और मौसम कभी बाधा नहीं बनते, जैसे ही कहीं से सूचना मिलती है, टीम बिना किसी चिंता के तुरंत रवाना हो जाती है. यही समर्पण आज शाइन इंडिया फाउंडेशन को सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि हजारों जरूरतमंद लोगों के लिए नई जिंदगी की उम्मीद बना चुका है. आज शाइन इंडिया फाउंडेशन की यह यात्रा यह साबित करती है कि एक छोटे से हादसे से भी समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है, बस जरूरत होती है सच्चे इरादों और निस्वार्थ सेवा भाव की.
About the AuthorMonali Paul
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें
First Published :
December 10, 2025, 17:17 IST
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