Rajasthan

Napier Grass Farming Success Story in Rajasthan.

Last Updated:October 28, 2025, 08:49 IST

Dausa: दौसा जिले के डोलीका गांव के किसान गिर्राज मीणा ने नेपियर घास की खेती कर हरे चारे की समस्या का समाधान निकाला है. एक बार लगाने के बाद यह घास 20 साल तक खेत में बनी रहती है और एक बीघा भूमि से लाखों की आमदनी संभव है. यह घास पशुओं के लिए पौष्टिक है और कम पानी में भी उग जाती है. अब कई किसान भी इस खेती की ओर बढ़ रहे हैं.

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Dausa: पशुपालकों के लिए अब हरे चारे की कमी दूर होती नजर आ रही है. दौसा जिले के कई किसान अब पारंपरिक चारे की जगह नेपियर घास (Napier Grass) की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. यह घास न केवल पशुओं के लिए पौष्टिक और उपयोगी साबित हो रही है, बल्कि इससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिल रहा है.

सिकराय उपखंड के डोलीका गांव निवासी किसान गिर्राज प्रसाद मीणा ने अपने खेत में नेपियर घास लगाकर एक मिसाल पेश की है. उन्होंने बताया कि पहले उन्हें बाजार से बार-बार सूखा या हरा चारा खरीदना पड़ता था, जिससे खर्चा अधिक होता था. लेकिन अब नेपियर घास लगाने के बाद न सिर्फ अपने पशुओं के लिए सालभर हरा चारा मिल जाता है, बल्कि आसपास के किसानों को भी यह घास बेचकर वे अच्छी आमदनी कर रहे हैं.

20 साल तक देती है लगातार फसलगिर्राज मीणा बताते हैं कि नेपियर घास की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे एक बार लगाने के बाद करीब 20 वर्षों तक खेत में बनाए रखा जा सकता है. इसके लिए बार-बार बीज या पौधों की जरूरत नहीं पड़ती. शुरुआत में उन्होंने एक बिस्वा भूमि पर यह घास लगाई थी, लेकिन लाभ देखने के बाद अब चार से पांच बिस्वा जमीन पर इसकी खेती कर रहे हैं. यह घास कम पानी में भी आसानी से उग जाती है, जिससे सूखे या सीमित सिंचाई वाले इलाकों में भी इसे सफलतापूर्वक लगाया जा सकता है.

एक बीघा से लाखों की आमदनीनेपियर घास की एक बीघा भूमि से तैयार फसल की बिक्री पर लगभग तीन से चार लाख रुपये तक की आय संभव है. मीणा के अनुसार, नेपियर घास का स्वाद मीठा होता है, जिसे पशु बड़े चाव से खाते हैं. इससे दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है. यह घास इतनी घनी और ऊंची होती है कि दूर से देखने पर यह गन्ने की फसल जैसी नजर आती है.

सरकार भी कर रही प्रोत्साहितभारत सरकार और कृषि विभाग भी किसानों को नेपियर घास की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं. विभाग की ओर से समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर और पौध वितरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. गिर्राज मीणा का कहना है कि यदि किसान थोड़ी मेहनत करें तो नेपियर घास के जरिए हरे चारे की समस्या समाप्त होने के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी भी की जा सकती है. उनकी इस पहल को देखकर आस-पास के कई किसान भी अब नेपियर घास की खेती करने की तैयारी कर रहे हैं.

Location :

Dausa,Dausa,Rajasthan

First Published :

October 28, 2025, 08:36 IST

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एक बार लगाओ, 20 साल तक मुनाफा कमाओ… दौसा के किसान ने हरे चारे से बनाई लाखों

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