Medicinal Plants Farming | Horticulture Benefits | Barren Land Improvement | Agriculture News | Medicinal Herbs Cultivation | Organic Farming Tips

Last Updated:December 09, 2025, 10:29 IST
Medicinal Plants Farming: औषधीय पौधों की खेती आज किसानों के लिए बड़ा अवसर बन चुकी है. ये पौधे न केवल बागवानी खेती के लिए फायदेमंद हैं, बल्कि बंजर जमीन को भी उपजाऊ बनाने की क्षमता रखते हैं. कम पानी, कम रखरखाव और अधिक आय—इनकी सबसे बड़ी विशेषताएं हैं. बाजार में इनकी लगातार बढ़ती डिमांड किसानों को स्थायी आय का भरोसा देती है. 
सीकर. अरंडी का पौधा प्राचीन समय से ही अपने औषधीय गुणों और खेती जैसी उपयोगी खूबियों के लिए जाना जाता है. इस पौधों को बागवानी खेती में मिट्टी का सोना कहते हैं. इस पौधों की पत्तियों का उपयोग आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों में किया जाता है. ये पत्तियां इतनी पोषक होती हैं कि बंजर सी मिट्टी को भी धीरे-धीरे उपजाऊ बना देती हैं. आज भी गांवों में अरंडी के पत्तों का इस्तेमाल मिट्टी सुधारने, पौधों को ताकत देने और प्राकृतिक खाद तैयार करने के लिए खूब होता है.

अरंडी की पत्तियां गलने पर नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे ज़रूरी पोषक तत्व छोड़ती हैं, जो पौधों की बढ़वार को तेज करते हैं. इन्हें सुखाकर मिट्टी में मिलाया जाए तो मिट्टी की उर्वरता बढ़ जाती है. रासायनिक खाद की तरह इनसे कोई साइड इफेक्ट नहीं होता और यह धीरे-धीरे मिट्टी की बनावट को भी सुधारती हैं. घर की किचन गार्डनिंग से लेकर खेतों तक, हर जगह यह प्राकृतिक खाद की तरह काम करती हैं.

अरंडी की पत्तियों की एक और बड़ी खासियत है कि इनमें मौजूद प्राकृतिक तत्व कई तरह के कीटों को दूर रखते हैं. इनमें पाए जाने वाले गुण दीमक, सफेद मक्खी और रस चूसने वाले कीड़ों से पौधों की रक्षा करते हैं. अगर इनके पत्तों को पानी में भिगोकर उसका छिड़काव किया जाए, तो यह एक बढ़िया जैविक कीटनाशक बन जाता है, जो पौधों को बिना नुकसान पहुंचाए कीटों का प्रकोप कम करता है.
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मल्चिंग के लिए भी अरंडी की पत्तिया बेहद उपयोगी साबित होती हैं. जब इन सूखी पत्तियों को पौधों के चारों तरफ बिछा दिया जाता है, तो मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है और खरपतवार भी कम उगते हैं. गर्मी के मौसम में पौधों को पानी बचाने में यह तरीका काफी मदद करता है. साथ ही, पत्तियाँ धीरे-धीरे गलकर मिट्टी में मिलती रहती हैं और उसे पोषक बनाती रहती हैं.

कम्पोस्ट बनाने वालों के लिए अरंडी की पत्तियां किसी वरदान से कम नहीं हैं. ये पत्तियां बहुत तेजी से गलती हैं, जिससे कम्पोस्ट जल्दी तैयार हो जाता है. जब ये कम्पोस्ट के साथ मिलती हैं, तो इसमें नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे पौधों को अच्छा ग्रोथ बूस्टर मिलता है. यह कम्पोस्ट पौधों की जड़ों को मजबूत करता है और पत्तियों को ज्यादा हरा-भरा बनाता है.

अरंडी की पत्तियों में मौजूद सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे मैग्नीशियम, कैल्शियम और आयरन मिट्टी की गुणवत्ता को काफी बेहतर बना देते है. ये तत्व खासकर पत्तेदार सब्ज़ियों और फूलों वाले पौधों के लिए बहुत लाभदायक होते हैं. पत्तों के घोल का छिड़काव पौधों में क्लोरोफिल बढ़ाता है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता है. यही वजह है कि इसे एक प्राकृतिक टॉनिक या ग्रोथ बूस्टर भी कहा जाता है.

पुराने समय में किसान अरंडी के पत्तों का उपयोग बीजों को सुरक्षित रखने में भी करते थे. बीज बोने से पहले इनके रस से उपचार करने पर बीज फफूंद और कीड़ों से बच जाते हैं, जिससे अंकुरण बेहतर होता है. नीम की खली, वर्मी कम्पोस्ट या गोबर खाद के साथ इस्तेमाल करने पर ये पत्तियां और भी असरदार हो जाती हैं. ऐसे में अरंडी की पत्तियां पौधों को पोषण देने से लेकर मिट्टी को स्वस्थ बनाने तक हर काम में लाभ पहुंचाती हैं.
First Published :
December 09, 2025, 10:29 IST
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बागवानी खेती में क्रांति! ये हर्बल पौधे देंगे ज्यादा उत्पादन, साइड इफेक्ट जीरो



