जयपुर के जैन मुनि मोहनलाल का अद्भुत कैलेंडर: एक पेज में दस हजार सालों की तारीख और वार का रहस्य!

जयपुर: हर व्यक्ति के जीवन में समय सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक होता है, इसलिए महान विद्वानों ने लोगों को समय के साथ चलने के लिए तारीख, वार और प्रमुख महत्वपूर्ण तिथियों के लिए अलग-अलग कैलेंडर तैयार किए, जिनका महत्व हर व्यक्ति के जीवन से जुड़ा होता है. ऐसे ही जयपुर के विद्वान लोगों ने भी वर्षों पहले अद्भुत कैलेंडर तैयार किए, जिन्हें देखकर लोग आश्चर्यचकित रह जाते हैं.
ऐसे ही जयपुर के जैन मुनि श्री मोहनलाल जी ने समय की गहराइयों को समझने और गणनाओं को जानने के लिए एक ऐसा अद्भुत कैलेंडर तैयार किया था, जिसमें दस हजार सालों के लिए लोग तारीख और वार एक साथ देख सकते हैं. इस अद्भुत कैलेंडर को लेकर लोकल-18 ने जयपुर के हर्षति कोटेचा जैन को बताया कि जैन संत श्री मुनि मोहनलाल ने गहन अध्ययन और वर्षों की साधना के बाद 23 मई 1972 को ऐसा अनोखा कैलेंडर तैयार किया, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है. हर्षति बताते हैं कि इस अनोखे कैलेंडर में लोग आने वाले दस हजार सालों की तारीख और वार देख सकते हैं. जैसे एक सदी में 100 साल होते हैं, वैसे ही इस कैलेंडर को 100 सदी के आधार पर तैयार किया गया है ताकि दस हजार सालों का लेखा-जोखा रखा जा सके.
एक पेज पर दस हजार सालों की अद्भुत गणना
लोकल-18 से बात करते हुए हर्षति बताते हैं कि मुनि मोहनलाल ने इस कैलेंडर को ख़ासतौर पर अपने नाम से ही तैयार किया था. इसमें उन्होंने धार्मिक, खगोलीय और पारंपरिक सिद्धांतों के आधार पर दस हजार वर्षों की जानकारी को व्यवस्थित और वैज्ञानिक रूप में प्रस्तुत किया है. आने वाले दस हजार सालों की तारीख और वार का पता लगाने के लिए एक खास ट्रिक का इस्तेमाल किया गया है. जैसे सप्ताह में सात दिन होते हैं, वैसे ही मुनि मोहनलाल के नाम में भी सात का अंक मौजूद है, उनके नाम के अनुसार ही इस कैलेंडर को अद्भुत रूप में तैयार किया गया.
कैलेंडर की सबसे खास बात यह है कि यह सिर्फ एक पेज पर तैयार किया गया है, जबकि अन्य कैलेंडरों की तरह यह 10 से 12 पेज का नहीं है. केवल एक पेज देखकर ही दस हजार सालों की तारीख और वार का पता लगाया जा सकता है. हर्षति का कहना है कि समय के रहस्यों को सरल रूप में आम जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से इसे तैयार किया गया था, लेकिन अब यह कैलेंडर स्वयं में एक धरोहर बन चुका है. मुनि मोहनलाल ने इस कैलेंडर को अपने पिता श्री सुनील जी कोटेचा को दिया था, जो उनके प्रति समर्पित सेवा-श्रावक थे.
कैसे पता चलता है दस हजार सालों की तारीख और वार
हर्षति बताते हैं कि यह कैलेंडर केवल समय का लेखा-जोखा ही नहीं है, बल्कि परंपरा, ज्ञान और साधना का एक जीवंत दस्तावेज़ भी है. इसमें खासतौर पर जिस वर्ष की तारीख का वार देखना हो, वह वर्ष और उसकी सदी को आमने-सामने अक्षरों के साथ मिलाकर, महीनों के सामने देख सकते हैं. इसके जरिए यथेष्ट तारीख के सामने का वार पता लगाया जा सकता है. हर्षति बताते हैं कि वह इस कैलेंडर को राजस्थान की अलग-अलग प्रदर्शनियों में लेकर जाते हैं, और इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट जाती है. जयपुर स्थापना दिवस के मौके पर उन्होंने लोगों के लिए इसे होटल आईटीसी राजपूताना में प्रदर्शित किया.



