More Than 60000 Penguins Starved To Death Near South Africa | समंदर में 60 हजार पेंगुइन भूख से तड़प-तड़प कर मरीं, अब विलुप्त होने का खतरा

Last Updated:December 05, 2025, 18:36 IST
दक्षिण अफ्रीका के तटों पर 60,000 से अधिक अफ्रीकी पेंगुइन की भूख से मौत हो गई है. एक नई स्टडी के मुताबिक, इनकी मुख्य खुराक सार्डिन मछलियों की भारी कमी और ओवरफिशिंग इसके लिए जिम्मेदार है. यह मौतें मुख्य रूप से पंख बदलने (मोल्टिंग) की प्रक्रिया के दौरान हुईं. 2024 में इस प्रजाति को गंभीर रूप से लुप्तप्राय घोषित कर दिया गया है.
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मछलियां गायब हुईं तो अफ्रीकी पेंगुइन भी हो गए साफ, 8 साल में खत्म हो गई पूरी कॉलोनी, चौंकाने वाला खुलासा (Photo : USGS)
दक्षिण अफ्रीका के तट पर एक दिल दहला देने वाली त्रासदी सामने आई है. यहां करीब 60,000 अफ्रीकी पेंगुइन भूख से तड़पकर मर गए हैं. एक नई वैज्ञानिक स्टडी में यह खौफनाक खुलासा हुआ है. मरने की मुख्य वजह सार्डिन मछलियों की कमी बताई गई है. सार्डिन मछली ही इन पेंगुइन का मुख्य भोजन है. दासेन और रॉबेन आइलैंड की दो प्रमुख प्रजनन कॉलोनियों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं. यहां 2004 से 2012 के बीच 95% पेंगुइन खत्म हो चुके हैं. वैज्ञानिक इसे क्लाइमेट क्राइसिस और अंधाधुंध फिशिंग का नतीजा मान रहे हैं. इंसानी लालच ने इन बेजुबानों के मुंह से निवाला छीन लिया है. यह रिपोर्ट ‘ऑस्ट्रिच: जर्नल ऑफ अफ्रीकन ऑर्निथोलॉजी’ में प्रकाशित हुई है.
इतनी बड़ी संख्या में पेंगुइन की मौत कैसे हुई?
स्टडी में पेंगुइन की मौत के तरीके पर रोशनी डाली गई है. अफ्रीकी पेंगुइन हर साल अपने पुराने पंख गिराते हैं. उनकी जगह नए पंख आते हैं जो उन्हें सर्दी और पानी से बचाते हैं. इस प्रक्रिया को मोल्टिंग (Moulting) कहते हैं. यह करीब 21 दिन तक चलती है. सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इस दौरान पेंगुइन जमीन पर ही रहते हैं. वे शिकार के लिए समंदर में नहीं जा सकते. जिंदा रहने के लिए उन्हें इस प्रक्रिया से पहले खूब खाकर अपने शरीर में चर्बी बढ़ानी होती है.
यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर के डॉ. रिचर्ड शर्ली ने बताया कि अगर मोल्टिंग से पहले उन्हें खाना नहीं मिलता तो वे कमजोर हो जाते हैं. उनके पास 21 दिन के उपवास के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं बचती. या तो वे भूख से पहले ही मर जाते हैं या फिर मोल्टिंग के तुरंत बाद. वैज्ञानिकों को जमीन पर लाशें नहीं मिलीं. उनका मानना है कि कमजोर पेंगुइन शिकार की तलाश में समंदर में गए और वहीं डूबकर मर गए.
स्टडी के मुताबिक पश्चिमी दक्षिण अफ्रीका के तट पर सार्डिन मछलियों (Sardinops sagax) की तादाद में भारी गिरावट आई है. 2004 के बाद से सार्डिन का बायोमास अपने अधिकतम स्तर के मुकाबले 25% तक गिर गया है. पानी के तापमान और खारेपन में बदलाव ने मछलियों के प्रजनन को प्रभावित किया है.
रही सही कसर कमर्शियल फिशिंग ने पूरी कर दी. इस इलाके में बड़े पैमाने पर मछली पकड़ने का काम जारी रहा. पेंगुइन को खाना नहीं मिला और वे भूख से मरते रहे. यह पर्यावरण के असंतुलन का एक भयावह उदाहरण है.
अफ्रीकी पेंगुइन के सिर्फ 10 हजार जोड़े बचे
हालात इतने बुरे हैं कि 2024 में अफ्रीकी पेंगुइन को ‘क्रिटिकली एनडेंजर्ड’ (गंभीर रूप से लुप्तप्राय) घोषित कर दिया गया. अब दुनिया में सिर्फ 10,000 प्रजनन करने वाले जोड़े बचे हैं. पिछले 30 सालों में इस प्रजाति की आबादी में करीब 80% की गिरावट आई है. नेल्सन मंडेला यूनिवर्सिटी की लोरियन पिचग्रू ने इसे बेहद चिंताजनक बताया है. उन्होंने कहा कि यह छोटे मछलियों के कुप्रबंधन का नतीजा है. स्थिति समय के साथ सुधरने के बजाय बिगड़ती जा रही है. यह सिर्फ पेंगुइन के लिए ही नहीं बल्कि उन सभी जीवों के लिए खतरा है जो इन मछलियों पर निर्भर हैं.
पेंगुइन को विलुप्त होने से बचाने के लिए अब कुछ कड़े फैसले लिए जा रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका की छह सबसे बड़ी पेंगुइन कॉलोनियों के आसपास कमर्शियल ‘पर्स-सीन फिशिंग’ पर रोक लगा दी गई है. इसमें बड़े जाल से मछलियों के झुंड को घेरा जाता है. इसके अलावा संरक्षणवादी कृत्रिम घोंसले बना रहे हैं ताकि चूजों को बचाया जा सके. बीमार और कमजोर पेंगुइन को रेस्क्यू करके हाथ से खाना खिलाया जा रहा है. डॉ. अजवियानेवी मखाडो को उम्मीद है कि फिशिंग पर रोक से पेंगुइन को शिकार मिल सकेगा. यह उनके जीवन चक्र के महत्वपूर्ण हिस्सों में मदद करेगा. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या हम इस नुकसान की भरपाई कर पाएंगे.
About the AuthorDeepak Verma
दीपक वर्मा न्यूज18 हिंदी (डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. लखनऊ में जन्मे और पले-बढ़े दीपक की जर्नलिज्म जर्नी की शुरुआत प्रिंट मीडिया से हुई थी, लेकिन जल्द ही उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म…और पढ़ें
First Published :
December 05, 2025, 18:35 IST
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समंदर में 60 हजार पेंगुइन भूख से तड़प-तड़प कर मरीं, अब विलुप्त होने का खतरा



