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Last Updated:November 04, 2025, 13:41 IST
Rajasthan Chutney Recipe: राजस्थान के पारंपरिक स्वाद में इस छोटे से फल की चटनी का अपना अलग ही महत्व है. ये न सिर्फ खाने के स्वाद को बढ़ाती है बल्कि पाचन को दुरुस्त रखने में भी मदद करती है. देसी नुस्खों से बनी ये चटनी आज भी हर राजस्थानी रसोई की पहचान बनी हुई है.
सीकर. राजस्थान की पारंपरिक थाली में कई देसी स्वाद शामिल हैं, जिनमें डासरिया का नाम भी खास तौर पर लिया जाता है. यह छोटा सा फल न केवल स्वाद में खट्टा-मीठा होता है, बल्कि अपने औषधीय गुणों के कारण लोगों के बीच बेहद प्रसिद्ध है. ग्रामीण इलाकों में इसका उपयोग आम तौर पर भोजन के साथ चटनी, अचार या सूखे मसाले के रूप में किया जाता है, जो खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ सेहत भी सुधारता है.

आयुर्वेदिक डॉक्टर नरेंद्र कुमार के अनुसार, डासरिया में फाइबर, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा पाई जाती है. यही कारण है कि यह फल पाचन शक्ति को दुरुस्त रखने, कब्ज से राहत देने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. राजस्थानी लोग इसे अक्सर सर्दियो के मौसम में अपनी डाइट में शामिल करते हैं ताकि शरीर में ऊर्जा बनी रहे और मौसमी बीमारियों से बचाव हो. इस छोटे राजस्थानी फल का स्वाद भी बेहद लाजवाब होता है.

गृहणी सुमित्रा मौर्य ने बताया कि डासरिया का स्वाद जब पारंपरिक राजस्थानी मसालों के साथ मिलता है, तो यह एक बेहतरीन चटनी बन जाती है. इसे बनाने के लिए पहले फलों को उबालकर नरम किया जाता है, फिर मसालों जैसे लाल मिर्च, जीरा, हींग, सौंफ और धनिया पाउडर के साथ कूटकर तैयार किया जाता है. इसमें गुड़ मिलाने से इसका स्वाद खट्टा-मीठा हो जाता है, जो दाल-बाटी या बाजरे की रोटी के साथ शानदार लगता है.

गृहणी सुमित्रा मौर्य ने बताया कि डासरिया की चटनी बनाना न केवल आसान है, बल्कि यह लंबे समय तक खराब भी नहीं होती. ग्रामीण घरों में इसे मिट्टी के बर्तनों या कांच की बोतलों में भरकर हफ्तों तक सुरक्षित रखा जाता है. यह चटनी न केवल स्वाद बढ़ाती है, बल्कि परिवार के हर सदस्य के लिए पाचन को संतुलित रखने में भी सहायक होती है.

राजस्थान में डासरिया को भूख बढ़ाने वाला फल भी कहा जाता है. जो लोग भूख कम लगने या पाचन संबंधी परेशानी से जूझते हैं, उनके लिए यह चटनी एक प्राकृतिक उपाय है. इसमें मौजूद खट्टे तत्व पाचन रसों को एक्टिव करते हैं, जिससे भोजन जल्दी पचता है. यही कारण है कि ग्रामीण इलाकों में इसे हर भोजन के साथ थोड़ा-थोड़ा खाया जाता है. इसके अलावा इसकी चटनी के साथ भी भेजना खाया जाता है. इससे खाने का स्वाद और भी अधिक बढ़ जाता है.

आयुर्वेदिक डॉक्टर नरेंद्र कुमार ने बताया कि इस डासरिया केवल स्वाद या पाचन के लिए नहीं, बल्कि यह शरीर को पोषण देने में भी अहम भूमिका निभाता है. इसमें मौजूद आयरन और गुड़ का मेल खून की कमी को दूर करने में मदद करता है. साथ ही, इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाकर त्वचा को भी स्वस्थ बनाए रखते हैं. यानी इसे घरेलू टॉनिक के रूप में भी उपयोग में लिया जाता है. यह उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है.
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November 04, 2025, 13:41 IST
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इस छोटी सी चटनी में छिपा है सेहत का राज, पाचन भी दुरुस्त और स्वाद भी मस्त



