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इंटरनेट पर ‘अजीब चैट’ और सेना की रडार पर आ गया चीनी युवक, जाना था काशी, पहुंच गया कश्मीर कैसे?

देभारतीय सेना की मुस्तैदी और आधुनिक सर्विलांस सिस्टम ने कश्मीर घाटी में एक बड़ी सुरक्षा सेंध को नाकाम कर दिया है. सेना ने इंटरनेट पर हो रही एक असामान्य बातचीत को इंटरसेप्ट किया, जिसके तार सीधे एक चीनी नागरिक से जुड़े मिले. सुरक्षा एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में बिना अनुमति घुसने वाले इस चीनी युवक को हिरासत में ले लिया है.

पकड़े गए 29 वर्षीय चीनी नागरिक का नाम हू कांगताई है. उसकी प्रोफाइल और गतिविधियां किसी साधारण पर्यटक जैसी नहीं, बल्कि किसी गहरे मिशन पर निकले व्यक्ति जैसी लग रही हैं. वह अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में ग्रेजुएट है, लेकिन कश्मीर में वह सीआरपीएफ की तैनाती और आर्टिकल 370 के बारे में गूगल सर्च कर रहा था.

जाना था काशी, पहुंच गया कश्मीर

अधिकारियों के मुताबिक, हू कांगताई 19 नवंबर को टूरिस्ट वीजा पर दिल्ली पहुंचा था. उसके वीजा की शर्तों के अनुसार, उसे वाराणसी, आगरा, जयपुर, सारनाथ, गया और कुशीनगर जैसे बौद्ध धार्मिक स्थलों की यात्रा करनी थी. लेकिन उसने भारतीय सुरक्षा तंत्र को चकमा देने की कोशिश की. अधिकारियों ने बताया, वह स्थानीय लोगों जैसा दिखता था, इसी का फायदा उठाकर उसने 20 नवंबर को लेह की फ्लाइट पकड़ ली. लेह एयरपोर्ट पर उसने जानबूझकर एफआरआरओ (FRRO) काउंटर पर अपना रजिस्ट्रेशन नहीं कराया, जो विदेशी नागरिकों के लिए अनिवार्य है.”

फोन खंगाला तो उड़ गए होश

सुरक्षा एजेंसियों के कान तब खड़े हो गए जब उसके फोन की हिस्ट्री खंगाली गई. एक पर्यटक होने के बावजूद वह इंटरनेट पर कश्मीर घाटी में CRPF की तैनाती के बारे में सर्च कर रहा था. उसकी सर्च हिस्ट्री में जम्मू-कश्मीर से अगस्त 2019 में हटाए गए आर्टिकल 370 से जुड़ी जानकारियां भी मिलीं. सवाल यह है कि एक चीनी पर्यटक, जो बौद्ध स्थलों के दर्शन करने आया था, उसे भारतीय अर्धसैनिक बलों की लोकेशन और भारत के संविधान के अनुच्छेदों में इतनी दिलचस्पी क्यों थी?

सेना के हेडक्वार्टर के पास क्या कर रहा था?

हू कांगताई की मूवमेंट हिस्ट्री भी बेहद संदिग्ध पाई गई है. उसने दक्षिण कश्मीर के अवंतीपोरा के खंडहरों का दौरा किया. यह स्थान रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है क्योंकि यहीं भारतीय सेना की ‘विक्टर फोर्स’ का मुख्यालय स्थित है. श्रीनगर में वह हरवन स्थित एक बौद्ध स्थल पर गया. यह वही इलाका है जहां पिछले साल सुरक्षा बलों ने एक मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के एक आतंकी को ढेर किया था. उसने शंकराचार्य हिल्स, हजरतबल दरगाह और डल झील के पास मुगल गार्डन का भी दौरा किया.

लोकल सिम और बिना रजिस्ट्रेशन का गेस्ट हाउस

हू कांगताई ने अपनी पहचान छुपाने के लिए कई हथकंडे अपनाए. उसने खुले बाजार से एक भारतीय सिम कार्ड का जुगाड़ किया. श्रीनगर में वह किसी बड़े होटल के बजाय एक बिना रजिस्ट्रेशन वाले गेस्ट हाउस में रुका हुआ था, ताकि उसका रिकॉर्ड किसी की नजर में न आए.

बोस्टन से फिजिक्स की डिग्री और दुनिया घूमने का शौक

पूछताछ में पता चला है कि हू ने अमेरिका की प्रतिष्ठित बोस्टन यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में ग्रेजुएशन किया है. उसका पासपोर्ट बताता है कि वह अमेरिका, न्यूजीलैंड, ब्राजील, फिजी और हांगकांग जैसे देशों की यात्रा कर चुका है. वह खुद को एक ‘ट्रेवलर’ बता रहा है, लेकिन उसकी गतिविधियां जासूसी की ओर इशारा कर रही हैं. फिलहाल विभिन्न एजेंसियां उससे कड़ाई से पूछताछ कर रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह वीजा नियमों के उल्लंघन का मामला है. अगर जासूसी के ठोस सबूत नहीं मिलते हैं, तो उसे “वीजा उल्लंघन” के आधार पर डिपोर्ट यानी वापस उसके देश भेजा जा सकता है. लेकिन जिस तरह से सेना ने उसके “इंटरनेट चैटर” को पकड़ा है, यह मामला सामान्य पर्यटन का नहीं लगता.

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