ट्रिगर नहीं, बत्ती और बारूद से ही हो जाता था फायर! भरतपुर संग्रहालय में सहेजी गईं 16वीं सदी की खौफनाक बंदूकें

Last Updated:January 10, 2026, 12:42 IST
Dharohar : भरतपुर का राजकीय संग्रहालय इतिहास के उन पन्नों को सहेजे है, जहां जंग बत्ती और बारूद से लड़ी जाती थी. 16वीं सदी की दुर्लभ तोड़ेदार बंदूकें आज भी यहां सुरक्षित हैं, जो उस दौर की युद्ध तकनीक, सैनिकों की रणनीति और हथियार निर्माण की अनोखी प्रणाली की कहानी बयां करती हैं.
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भरतपुर : भरतपुर के राजकीय संग्रहालय में इतिहास की अनेक ऐसी धरोहरें सुरक्षित रखी गई हैं. जो अपने आप में बेहद अनोखी और अद्भुत हैं. ये धरोहरें न केवल भरतपुर के गौरवशाली अतीत को दर्शाती हैं. बल्कि उस दौर की तकनीक और जीवनशैली की भी झलक पेश करती हैं. इन्हीं धरोहरों में संग्रहालय में संरक्षित प्राचीन बंदूकें विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. जिनकी बनावट और चलने की प्रणाली आज की आधुनिक बंदूकों से बिल्कुल अलग है.
संग्रहालय अधिकारी राजन सिंह ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि राजकीय संग्रहालय में कई ऐसी ऐतिहासिक वस्तुएं रखी गई हैं. जो भरतपुर के इतिहास के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. इन्हीं में से एक 16वीं सदी में बनी प्राचीन बंदूकें हैं, जिन्हें उस समय तोड़ेदार कहा जाता था ये बंदूकें अपनी कार्यप्रणाली के कारण काफी खास मानी जाती हैं. 16वीं सदी में बनने वाली तोड़ेदार बंदूकों में आज की तरह ट्रिगर सिस्टम नहीं होता था और ना ही कोई पत्थर था इन बंदूकों की नाल आगे से तोड़कर खोली जाती थी और उसी रास्ते से बारूद भरा जाता था.
बत्ती-बारूद से चलती थीं 16वीं सदी की बंदूकेंबारूद में आग लगाने के लिए रस्सी और बत्ती का उपयोग किया जाता था जब बत्ती में आग लगाई जाती थी तो वह धीरे-धीरे बारूद तक पहुंचती थी और फायर होता था यही वजह है कि इन बंदूकों को चलाने की प्रक्रिया काफी अलग और जटिल मानी जाती थी उन्होंने बताया कि उस समय हथियार निर्माण की तकनीक आज की तरह विकसित नहीं थी लेकिन फिर भी इन तोड़ेदार बंदूकों को उस दौर की उन्नत तकनीक का प्रतीक माना जाता है. युद्ध और सुरक्षा के लिहाज से इन हथियारों की अहम भूमिका थी इन बंदूकों के माध्यम से यह समझा जा सकता है कि 16वीं सदी में किस तरह के हथियारों का प्रयोग किया जाता था और सैनिक किस प्रकार युद्ध लड़ते थे.
भरतपुर संग्रहालय में सुरक्षित ऐतिहासिक तोड़ेदार बंदूकेंभरतपुर के राजकीय संग्रहालय में रखी ये तोड़ेदार बंदूकें आज भी अच्छी स्थिति में संरक्षित हैं और इतिहास प्रेमियों शोधकर्ताओं व पर्यटकों को आकर्षित करती हैं. संग्रहालय प्रशासन का कहना है कि इन धरोहरों के संरक्षण के साथ-साथ लोगों को इनके ऐतिहासिक महत्व के बारे में जानकारी देना भी उनका उद्देश्य है. भरतपुर का यह संग्रहालय अतीत और वर्तमान के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में कार्य कर रहा है और आने वाली पीढ़ियों को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ रहा है.
About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal
A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें
Location :
Bharatpur,Rajasthan
First Published :
January 10, 2026, 12:39 IST
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ट्रिगर नहीं, बत्ती-बारूद से होता था फायर! 16वीं सदी की खौफनाक बंदूकें



