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तारामती बारादरी इतिहास | Taramati Baradari History and Bollywood Connection

Last Updated:November 22, 2025, 10:04 IST

Taramati Baradari History: तारामती बारादरी हैदराबाद की एक ऐतिहासिक सराय है जिसे अब्दुल्ला कुतुब शाह ने अपनी प्रिय दरबारी नर्तकी तारामती के नाम पर बनवाया था. बॉलीवुड फिल्म शूट, प्री-वेडिंग शूट और बेजोड़ वास्तुकला के कारण यह आज एक लोकप्रिय टूरिज्म स्पॉट है.
तारामती बारादरी इब्राहिम बाग का एक ऐतिहासिक सराय है बारादरी का निर्माण मूसी नदी के तट पर किया गया था। पर्यटन विभाग के अनुसार इसका नाम गोलकुंडा के सातवें सुल्तान अब्दुल्ला कुतुब शाह के शासनकाल से जुड़ा है जिन्होंने अपनी प्रिय वेश्या, दरबारी नर्तकी तारामती के नाम पर यह नाम रखा था। तारामती बारादरी एक ऐतिहासिक जगह के साथ-साथ साथ बॉलीवुड फ़िल्मों की शूटिंग और प्री-वेडिंग शूटिंग के लिए खास मानी जाती है.

तारामती बारादरी इब्राहिम बाग का एक ऐतिहासिक सराय है, जिसका निर्माण मूसी नदी के तट पर किया गया था. पर्यटन विभाग के अनुसार, इसका नाम गोलकुंडा के सातवें सुल्तान अब्दुल्ला कुतुब शाह के शासनकाल से जुड़ा है. कहा जाता है कि उन्होंने अपनी प्रिय वेश्या और दरबारी नर्तकी तारामती के नाम पर यह नाम रखा था. तारामती बारादरी एक ऐतिहासिक जगह होने के साथ-साथ, बॉलीवुड फ़िल्मों की शूटिंग और प्री-वेडिंग शूटिंग के लिए एक ख़ास स्थल मानी जाती है.

तारामती कौन थीं? तारामती के बारे में ऐतिहासिक सबूत कम हैं लेकिन लोककथाएं और इतिहास के टुकड़े मिलाकर जो तस्वीर बनती है वह बेहद रोचक है।

तारामती कौन थीं?<br />तारामती कौन थीं, इसके बारे में ऐतिहासिक सबूत कम हैं, लेकिन लोककथाएं और इतिहास के टुकड़े मिलाकर जो तस्वीर बनती है, वह बेहद रोचक है. माना जाता है कि वह गोलकुंडा के सातवें सुल्तान अब्दुल्ला कुतुब शाह की प्रिय वेश्या और दरबारी नर्तकी थीं, जिनके नाम पर मूसी नदी के तट पर तारामती बारादरी का निर्माण किया गया था. लोककथाओं में उन्हें एक प्रतिभाशाली और सम्मानित कलाकार के रूप में याद किया जाता है, जिनका सुल्तान के शासनकाल में महत्वपूर्ण स्थान था.

एक मशहूर वेश्या और नर्तकी तारामती गोलकुंडा के सुल्तान अब्दुल्ला कुतुब शाह (सन् 1626-1672) के दरबार की एक प्रसिद्ध वेश्या और नर्तकी थीं। उस जमाने में दरबारी नर्तकियां सिर्फ मनोरंजन ही नहीं बल्कि कला और संस्कृति की प्रतीक भी मानी जाती थीं। वे शास्त्रीय संगीत और नृत्य में निपुण होती थीं।

एक मशहूर वेश्या और नर्तकी<br />तारामती गोलकुंडा के सुल्तान अब्दुल्ला कुतुब शाह (सन् 1626-1672) के दरबार की एक प्रसिद्ध वेश्या और नर्तकी थीं. उस ज़माने में दरबारी नर्तकियाँ सिर्फ मनोरंजन ही नहीं बल्कि कला और संस्कृति की प्रतीक भी मानी जाती थीं. वे शास्त्रीय संगीत और नृत्य में निपुण होती थीं, जिससे उन्हें दरबार में एक विशेष सम्मान प्राप्त था. तारामती का नाम उस काल की कलात्मक समृद्धि से जुड़ा हुआ है.

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सुल्तान की दीवानगी कहा जाता है कि सुल्तान अब्दुल्ला कुतुब शाह तारामती की सुंदरता और उनकी कला के इतने दीवाने हो गए थे कि उन्होंने अपने महल गोलकुंडा किला से मूसी नदी के दूसरे किनारे तक एक विशाल दीवार जिसे पुराना पुल कहा जाता है बनवा दी ताकि वह आसानी से उनसे मिलने आ-जा सकें।

सुल्तान की दीवानगी<br />कहा जाता है कि सुल्तान अब्दुल्ला कुतुब शाह तारामती की सुंदरता और उनकी कला के इतने दीवाने हो गए थे कि उन्होंने अपने महल गोलकुंडा किला से मूसी नदी के दूसरे किनारे तक एक विशाल दीवार बनवा दी, जिसे पुराना पुल कहा जाता है. इस पुल या मार्ग के निर्माण का उद्देश्य यह था कि वह आसानी से उनसे मिलने आ-जा सकें और उनकी कला का आनंद ले सकें. यह कथा सुल्तान के तारामती के प्रति गहरे लगाव और उनके समय की भव्य निर्माण कला को दर्शाती है.

प्रेम और विलासिता का प्रतीक तारामती का नाम इब्राहिम बाग और उसकी इमारतों से इस तरह जुड़ गया कि वह हैदराबाद के इतिहास में प्रेम और विलासिता की एक किंवदंती बन गईं। बारादरी का नाम उन्हीं के नाम पर रखा गया जो सुल्तान के प्रति उनके विशेष स्थान को दर्शाता है।

प्रेम और विलासिता का प्रतीक<br />तारामती का नाम इब्राहिम बाग और उसकी इमारतों से इस तरह जुड़ गया कि वह हैदराबाद के इतिहास में प्रेम और विलासिता की एक किंवदंती बन गईं. बारादरी का नाम उन्हीं के नाम पर रखा गया था, जो सुल्तान अब्दुल्ला कुतुब शाह के प्रति उनके विशेष स्थान को दर्शाता है. इस प्रकार, तारामती बारादरी न केवल एक ऐतिहासिक संरचना है, बल्कि सुल्तान और दरबारी नर्तकी के गहरे संबंधों की एक जीवंत कहानी भी प्रस्तुत करती है.

तारामती बारादरी का इतिहास इसका निर्माण 17वीं शताब्दी में कुतुब शाही शासकों द्वारा करवाया गया था। यह इब्राहिम बाग का हिस्सा थी जो एक विशाल उद्यान हुआ करता था। यह मूसी नदी के किनारे बनी हुई थी ताकि नदी की ठंडी हवा इमारत के अंदर आसानी से प्रवेश कर सके। यह कुतुब शाही वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण है।

तारामती बारादरी का इतिहास<br />तारामती बारादरी का निर्माण 17वीं शताब्दी में कुतुब शाही शासकों द्वारा करवाया गया था. यह इब्राहिम बाग का हिस्सा थी, जो उस समय एक विशाल उद्यान हुआ करता था. यह बारादरी मूसी नदी के किनारे बनी हुई थी, ताकि नदी की ठंडी हवा इमारत के अंदर आसानी से प्रवेश कर सके, जिससे यह गर्मियों में भी आरामदायक रहे. यह इमारत कुतुब शाही वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो उस समय के इंजीनियरिंग और स्थापत्य कौशल को दर्शाती है.

बॉलीवुड और तारामती बारादरी का नाता इसकी ऐतिहासिक भव्यता और आकर्षक वास्तुकला इसे फिल्म निर्माताओं के लिए एक आदर्श लोकेशन बनाती है। कुछ प्रसिद्ध फिल्में जो यहां शूट हुईं बाहुबली: द बिगिनिंग (2015), रुद्रमादेवी (2015), मैं हूं ना (2004), गोलमाल अगेन (2017) इसके अलावा, यह स्थान प्री-वेडिंग फोटोशूट और म्यूजिक वीडियोज के लिए भी बेहद लोकप्रिय है।

बॉलीवुड और तारामती बारादरी का नाता<br />इसकी ऐतिहासिक भव्यता और आकर्षक वास्तुकला इसे फिल्म निर्माताओं के लिए एक आदर्श लोकेशन बनाती है. कुछ प्रसिद्ध फ़िल्में जो यहाँ शूट हुईं, उनमें बाहुबली: द बिगिनिंग (2015), रुद्रमादेवी (2015), मैं हूँ ना (2004) और गोलमाल अगेन (2017) शामिल हैं. इसके अलावा, यह स्थान प्री-वेडिंग फोटोशूट और म्यूजिक वीडियोज़ के लिए भी बेहद लोकप्रिय है, क्योंकि इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तस्वीरों को एक खास आकर्षण प्रदान करती है.

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November 22, 2025, 10:04 IST

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हैदराबाद की ऐतिहासिक तारामती बारादरी जहां शूट हुई है बॉलीवुड की फ़िल्में, लेकिन क्या आप जानते हैं तारामती कौन थी? 

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