तकनीक और जमाना बदल गए! लेकिन चिमनाराम का जज्बा अडिग, साइकिल से पहुंचा रहे परंपरा और प्रकृति का संदेश

Last Updated:December 26, 2025, 10:33 IST
Jodhpur Unique Postman: जोधपुर के पोस्टमैन चिमनाराम आधुनिक दौर में भी साइकिल से डाक बांटकर पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं. पिछले 12 वर्षों से वे सर्दी, गर्मी और लंबी दूरी की परवाह किए बिना साइकिल पर ही घर-घर डाक पहुंचा रहे हैं. उनका मानना है कि बढ़ते वाहनों से प्रदूषण बढ़ रहा है और साइकिल इसका बेहतर समाधान है. उनकी यह पहल न केवल सेहत के लिए फायदेमंद है, बल्कि समाज को प्रकृति से जुड़ने का संदेश भी देती है.
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जोधपुर. एक समय था जब साइकिल पर घंटी बजाते हुए डाकिया घर-घर चिट्ठियां पहुंचाता था और लोग डाक आने का बेसब्री से इंतजार करते थे. वक्त बदला, तकनीक बदली और डाक व्यवस्था भी आधुनिक हो गई. आज डाकिया साइकिल की जगह बाइक या अन्य साधनों से डाक बांटता नजर आता है. लेकिन जोधपुर में एक ऐसे पोस्टमैन हैं, जिन्होंने बदलते जमाने के बावजूद साइकिल से नाता नहीं तोड़ा है. शहर के चिमनाराम पिछले करीब 12 वर्षों से साइकिल पर ही डाक बांट रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश दे रहे हैं.
आज जब दुनिया तेज रफ्तार जिंदगी और आधुनिक वाहनों की ओर बढ़ चुकी है, उस दौर में चिमनाराम का साइकिल पर डटे रहना लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है. बाइक, कार और हाइवे के इस दौर में वे हर रोज साइकिल लेकर निकलते हैं और अपने क्षेत्र में घर-घर डाक पहुंचाते हैं. सर्दी हो या भीषण गर्मी, लंबी दूरी हो या थकान उनके संकल्प में कभी कमी नहीं आई. वे मानते हैं कि साइकिल न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी सबसे सुरक्षित साधन है.
12 सालों से साइकिल बांटते आ रहे हैं डाक
चिमनाराम बताते हैं कि आजकल लगभग हर घर में दो से तीन वाहन हैं, जिनसे प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है. इसी चिंता ने उन्हें साइकिल को ही अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरित किया. उनका कहना है कि अगर हर व्यक्ति अपने रोजमर्रा के जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करे, तो पर्यावरण को काफी हद तक बचाया जा सकता है. इसी सोच के साथ वे पिछले 12 सालों से साइकिल पर डाक बांटते आ रहे हैं. इस दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा. कई लोगों ने ताना मारा कि बदलते जमाने में साइकिल से डाक क्यों बांटते हो, लेकिन चिमनाराम अपने फैसले पर अडिग रहे.
लोगों को पर्यावरण संरक्षण का भी देते हैं संदेश
उन्होंने आलोचना की बजाय लोगों को समझाना बेहतर समझा. धीरे-धीरे लोगों ने उनके विचारों को समझा और समर्थन देना शुरू किया. आज उनकी साइकिल सिर्फ डाक पहुंचाने का जरिया नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का चलता-फिरता संदेश बन चुकी है.चिमनाराम का मानना है कि प्रकृति से जुड़ाव ही जीवन को संतुलित रख सकता है. उनका उद्देश्य है कि लोग पर्यावरण के प्रति गंभीर हों और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा और सुरक्षित भविष्य छोड़ सकें. उनकी सादगी, सेवा भावना और संकल्प आज समाज के लिए मिसाल बन चुका है.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
Location :
Jodhpur,Rajasthan
First Published :
December 26, 2025, 10:33 IST
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तकनीक और जमाना बदल गए, लेकिन चिमनाराम का जज्बा अडिग, साइकिल से दे रहे संदेश



