डकैतों का अड्डा अब बना पर्यटन हॉटस्पॉट! चंबल घाटियों में इतिहास, रोमांच, घड़ियाल और दिव्यता का संगम

देवेंद्र सेन/कोटा : भारत की प्रमुख नदियों में से एक चंबल नदी, अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और गहरी घाटियों के लिए प्रसिद्ध है. यह नदी न केवल तीन राज्यों को जोड़ती है, बल्कि जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई, पर्यटन और धार्मिक आस्था का भी अहम स्रोत है. चंबल नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में स्थित महू (Mhow) के पास जनापाव पहाड़ी से होता है.
विंध्याचल पर्वत श्रेणी से निकलकर यह नदी मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सीमाओं से होती हुई आगे बढ़ती है. लगभग 960 से 1024 किलोमीटर लंबी यात्रा तय करने के बाद यह नदी उत्तर प्रदेश के पचनदा में जाकर यमुना नदी में समाहित हो जाती है.
नदी पर बने प्रमुख बांधचंबल नदी पर बने बांध न केवल जल-विद्युत उत्पादन में महत्वपूर्ण हैं बल्कि सिंचाई और जल प्रबंधन में भी अहम भूमिका निभाते हैं. प्रमुख बांध इस प्रकार हैं— • गांधी सागर बांध (मध्य प्रदेश) • राणा प्रताप सागर बांध (राजस्थान) • जवाहर सागर बांध • कोटा बैराज (कोटा, राजस्थान) ये चारों बांध मिलकर चंबल वैली प्रोजेक्ट बनाते हैं, जिसने पूरे क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.
चंबल किनारे के प्रमुख पिकनिक स्पॉटचंबल नदी के आसपास कई खूबसूरत स्थल हैं जो प्रकृति प्रेमियों और परिवारों की पहली पसंद बने हुए हैं— • चंबल गार्डन, कोटा – हरियाली और शांत वातावरण से भरपूर सुंदर पिकनिक स्थल. • चंबल रिवर फ्रंट, कोटा – आधुनिक और आकर्षक रिवरफ्रंट, बोटिंग, फाउंटेन एवं लाइट शो की सुविधा. • गड़ड़िया महादेव घाटी व्यू पॉइंट – राजस्थान के सबसे सुंदर दृश्य स्थलों में से एक, जहां से चंबल की गहरी घाटियों का अद्भुत नजारा दिखाई देता है. • चंबल बोट सफारी – घाटियों, घड़ियाल, डॉल्फिन और पक्षियों को करीब से देखने का एक आकर्षक अनुभव.
धार्मिक महत्व: किनारे बसे प्रमुख मंदिरचंबल नदी के किनारों पर कई प्राचीन मंदिर स्थित हैं— • गट्टेश्वर (घाटेश्वर) शिव मंदिर (बदौली/बारोली) से 10वीं–11वीं शताब्दी का ऐतिहासिक शिव मंदिर, प्राचीन स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण. • गराडिया महादेव महादेव मंदिर – चंबल घाटी में स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था का अनोखा संगम है. इन मंदिरों के कारण चंबल क्षेत्र धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.
कितनी पुरानी है चंबल नदी?भू-विज्ञान के अनुसार चंबल नदी भारतीय उपमहाद्वीप की बहुत पुरानी नदियों में से एक है. इसकी घाटियां अत्यंत गहरी हैं, जो इसके प्राचीन भू-वैज्ञानिक इतिहास का प्रमाण देती हैं. कई शोध बताते हैं कि चंबल का प्रवाह मार्ग गंगा–यमुना प्रणाली से भी पुराना हो सकता है.
वन्यजीवन का सुरक्षित घरचंबल नदी का पारिस्थितिकी तंत्र अनूठा है. यहां पाए जाते हैं— • घड़ियाल • गंगा डॉल्फिन • सॉफ्ट-शेल कछुए • विभिन्न प्रवासी व स्थानीय पक्षी , इन्हीं कारणों से यहां नेशनल चंबल सेंचुरी भी स्थापित की गई है, जो देश के सबसे महत्वपूर्ण संरक्षण क्षेत्रों में से एक है.
चंबल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमिचंबल घाटी कभी कुख्यात डकैतों के लिए जानी जाती थी, जिन्होंने दशकों तक बीहड़ों में अपना साम्राज्य कायम रखा. आज यह क्षेत्र पर्यटन और संरक्षण का केंद्र बन चुका है, और चंबल की पहचान धीरे-धीरे बदल चुकी है. चंबल नदी सिर्फ एक जलधारा नहीं—यह इतिहास, संस्कृति, पर्यटन, आस्था और पर्यावरण का संगम है. जनापाव से यमुना तक की इसकी यात्रा तीन राज्यों की जीवनरेखा है. बांधों से लेकर घाटियों तक और पिकनिक स्पॉट से लेकर प्राचीन मंदिरों तक, चंबल हर रूप में समृद्ध है और अपनी पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है.



