शौर्य की मिसाल! गांव में हर शुभ काम मेजर शैतान सिंह मंदिर से क्यों शुरू होता है? वजह कर देगी हैरान

Last Updated:November 18, 2025, 20:58 IST
Jodhpur Major Shaitan Singh Mandir: गांव में हर शुभ कार्य की शुरुआत मेजर शैतान सिंह मंदिर से की जाती है. ग्रामीणों का मानना है कि रेज़ांग ला युद्ध के हीरो मेजर शैतान सिंह न सिर्फ देश के बल्कि उनके गांव के भी संरक्षक हैं. मंदिर में आशीर्वाद लेने के बाद ही लोग शादी, गृह-प्रवेश या नई शुरुआत करते हैं. ग्रामीणों के अनुसार, इससे काम में सफलता और घर में शांति बनी रहती है.
जोधपुर: जोधपुर की शौर्यभूमि और उस धरती का एक ऐसा वीर, जिसकी वीरता का इतिहास आज भी पूरी दुनिया में उदहारण बनकर खड़ा है परमवीर चक्र विजेता मेजर शैतान सिंह भाटी.आज उनके बलिदान दिवस पर, हम सिर्फ एक सैनिक को याद नहीं कर रहे… हम उस आस्था को प्रणाम कर रहे हैं, जो अपने गांव में मंदिर के रूप में जीवित है. जोधपुर का बनासर गांव, जिसे अब शैतान सिंह नगर कहा जाता है, वहां मेजर भाटी सिर्फ एक शहीद नहीं वो हैं घर-आंगन के संरक्षक,गांव की परंपराओं के केंद्र,और हर नई शुरुआत के आराध्य.
दूल्हा सबसे पहले इस मंदिर में आकर माथा टेकताकिसी भी शुभ काम की शुरुआत चाहे नया घर बने, खेत की पहली फसल कटे, घर में बच्चा पैदा हो या शादी की शहनाइयां बजें. परमवीर चक्र विजेता भाटी के गांव में पीढ़ियों से परंपरा चल रही है. कोई भी शुभ काम मेजर साहब के मंदिर में धोक लगाए बिना शुरू नहीं होता. यहां शादी की बारात निकलने से पहले दूल्हा सबसे पहले इस मंदिर में आकर माथा टेकता है. परमवीर मेजर के नरपत सिंह भाटी बताते हैं कि गांव में किसी घर में नया काम हो, बच्चा पैदा हो, फसल कट जाए या शादी-ब्याह हो, सबसे पहले मेजर साहब की पूजा होती है.
रोज ढोल-नगाड़ों से होती है पूजासड़क के किनारे पर ही बने इस मंदिर में घुसते ही गर्भगृह में बीचो-बीच मेजर शैतान सिंह की प्रतिमा लगी हुई है.प्रतिमा सफेद मार्बल की बनी हुई है। शैतान सिंह की कुछ तस्वीरें पास ही बने कांच के बॉक्स में भी रखी हुई हैं। इसी बॉक्स के बाहर दीये रखे हुए हैं.इसके नीचे मेजर शैतान सिंह और उनके साथियों को शहादत के सम्मान में मिले हुए अवाॅड्र्स की जानकारी भी मार्बल पत्थर से बनी पट्टिका पर लिखी हुई है.मंदिर में गर्भगृह के चारों तरफ परिक्रमा के लिए भी स्थान बना हुआ है। वहीं मंदिर के बाहर स्थित खेजड़ी पर यहां आने वाले लोग मन्नत का धागा भी बांधते हैं
शहीद की पुरानी हवेली के ठीक सामने बना मंदिर सुबह-शाम श्रद्धालुओं से भरा रहता है.परमवीर मेजर के पौत्र राजेन्द्र सिंह भाटी बताते हैं, ‘शहादत के समय दादाजी की उम्र सिर्फ 38 साल थी, लेकिन उन्होंने जो जज्बा दिखाया वह आज तक गांव की रगों में बहता हैबनासर गांव अब शैतान सिंह नगर कहलाता है.गांव के मंदिर को लोग ‘मेजर साहब का मंदिर’ कहते हैं। पास ही उच्च माध्यमिक विद्यालय का नाम ‘परमवीर चक्र मेजर शैतान सिंह उमावि’ रखा गया है. यहां पढ़ने वाले बच्चे रोज उनकी प्रतिमा के सामने सलामी देकर दिन की शुरुआत
Jagriti Dubey
With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion, career, politica…और पढ़ें
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Location :
Jodhpur,Rajasthan
First Published :
November 18, 2025, 20:58 IST
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गांव में हर शुभ काम मेजर शैतान सिंह मंदिर से क्यों शुरू होता है? जानें वजह



