Rajasthan

दीवाली की खुशियां बनी जहर… सीकर की हवा में घुला केमिकल , चार गुना बढ़े सांस के मरीज, अस्पतालों में हाहाकार

Last Updated:October 24, 2025, 12:27 IST

Sikars Air Quality Deteriorates : दीवाली की चमक के बाद सीकर की हवा जहरीली हो गई है. आतिशबाजी से बढ़े प्रदूषण ने लोगों का सांस लेना मुश्किल कर दिया है. शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 245 पहुंच गया है, जिससे दमा और अस्थमा के मरीजों की संख्या चार गुना बढ़ गई है. अस्पतालों में सांस की तकलीफ से जूझते मरीजों की भीड़ उमड़ रही है.मरीज

सीकर. दीवाली पर हुई आतिशबाजी ने सीकर की हवा को बुरी तरह प्रदूषित कर दिया है. त्योहार के बाद यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 245 तक पहुंच गया, जो सामान्य स्तर से काफी ऊपर है. प्रदूषण का यह स्तर सांस लेने में तकलीफ पैदा कर रहा है. हवा में धूल, धुआं और नमी घुलने से फेफड़ों पर सीधा असर पड़ रहा है, जिससे लोगों में सांस लेने से संबंधी रोग तेजी से बढ़ गए हैं.

प्रदूषण

पॉल्यूशन का असर खासतौर पर अस्थमा और दमा से पीड़ित लोगों पर देखा जा रहा है. त्योहार के बाद से ही अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है. प्रदूषित हवा में मौजूद धुएं के सूक्ष्म कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर फेफड़ों को प्रभावित कर रहे हैं. बुजुर्गों और बच्चों पर इसका असर अधिक दिख रहा है, क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है.

प्रदूषण

सीकर के एसके अस्पताल की श्वसन रोग ओपीडी में बीते दो दिनों में कुल 93 मरीज पहुंचे. सभी को सांस लेने में तकलीफ थी, जिनमें से कई मरीजों की हालत गंभीर पाई गई. अस्पताल प्रशासन ने बताया कि इनमें से 11 मरीजों को भर्ती करना पड़ा, क्योंकि उनका ऑक्सीजन लेवल काफी कम था. डॉक्टरों ने बताया कि पॉल्यूशन से फेफड़ों में सूजन और संक्रमण के मामले भी बढ़े हैं.

हॉपिटल

अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार सामान्य दिनों में श्वसन ओपीडी में औसतन 20 दमा या अस्थमा के मरीज पहुंचते हैं. मगर इन दो दिनों में यह संख्या चार गुना तक बढ़ गई है. इससे साफ है कि दिवाली पर प्रदूषण के स्तर में आई बढ़ोतरी ने मरीजों की स्थिति को गंभीर बना दिया है. डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि वे सुबह-शाम घर से बाहर निकलने से बचें और मास्क का उपयोग करें.

हॉस्पिटल

एसके अस्पताल के मेडिसिन विभाग की ओपीडी में भी मरीजों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है. दो दिनों में 1100 से ज्यादा लोग इलाज के लिए पहुंचे. इनमें से अधिकांश को सांस में तकलीफ, खांसी और गले में जलन जैसी शिकायतें थीं. डॉक्टरों ने बताया कि इन्फ्लूएंजा वायरस और बदलते मौसम के साथ-साथ हवा में मौजूद धुएं के कण इन बीमारियों को बढ़ा रहे हैं. सामान्य उपचार से राहत नहीं मिल रही है.

मरीज

डॉक्टरों का कहना है कि हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व फेफड़ों में सूजन और संक्रमण पैदा कर रहे हैं. प्रदूषण के कारण एलर्जी, खांसी और सांस की तकलीफ के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. कुछ मरीजों को तो घर पर ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत तक पड़ रही है. डॉक्टरों ने सलाह दी है कि जिन लोगों को पहले से अस्थमा या दमा की समस्या है, वे बाहर कम निकलें और इनहेलर साथ रखें.

मरीज

एसके अस्पताल के लंग्स स्पेशलिस्ट डॉ. प्रहलाद दायमा ने बताया कि मानसून के बाद जब सर्दी शुरू होती है, तो हवा में मौजूद नमी नीचे बैठ जाती है. इसी समय जब आतिशबाजी और प्रदूषण बढ़ता है, तो धुआं और धूल के कण उसी नमी में मिलकर भारी हो जाते हैं और जमीन के करीब ठहरते हैं. ये कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचकर सांस लेने में कठिनाई और दमा जैसी बीमारियों को बढ़ावा देते हैं.

First Published :

October 24, 2025, 12:27 IST

homerajasthan

दीवाली के बाद सीकर में जहरीली हवा, सांस के मरीजों से भरे अस्पताल

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj