चमत्कारी है यह जंगली पौधा! दर्जनों बीमारी का है रामबाण दवा, रोजाना सेवन के फायदे गिन नहीं पाएंगे आप

Last Updated:December 13, 2025, 10:53 IST
स्क्रू ट्री हेल्थ बेनिफिट: आवर्तनी जिसे मरोड़फली या स्क्रू ट्री कहा जाता है, एक प्राकृतिक औषधीय पौधा है. यह पेट दर्द, मरोड़, दस्त, पेचिश और पाचन संबंधी समस्याओं में बेहद लाभकारी है. इसके चूर्ण या काढ़े से पाचन तंत्र मजबूत होता है, संक्रमण और कृमियों से राहत मिलती है. कान दर्द और स्राव में भी इसका उपयोग प्रभावी है. आयुर्वेद में इसे एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-इंफेक्शन एजेंट माना गया है. हल्की मात्रा में शहद के साथ सेवन इसे और असरदार बनाता है.
प्रकृति ने हमारे आस-पास ऐसे अनमोल पौधे बिखेर रखे हैं, जिनके गुणों से अधिकांश लोग अनजान रहते हैं. इन्हीं छुपे हुए खज़ानों में से एक है आवर्तनी, जिसे में मरोड़फली कहा जाता है. जंगलों, खेतों और रास्तों के किनारे आमतौर पर दिख जाने वाला यह साधारण-सा पौधा वास्तव में औषधीय गुणों से भरा हुआ है. इसकी सबसे खास पहचान इसका घुमावदार फल होता है, जो किसी पेंच (स्क्रू) की तरह मुड़ा हुआ दिखता है इसलिए इसे स्क्रू ट्री भी कहा जाता है. दिखने में भले ही यह साधारण लगे, लेकिन आयुर्वेद में यह पाचन और संक्रमण से जुड़े रोगों के लिए बेहद प्रभावी माना गया है.

आवर्तनी का उपयोग सदियों से घरेलू चिकित्सा में होता आया है. पेट दर्द, मरोड़, दस्त और पेचिश जैसी समस्याओं में इसकी फलियों से बना चूर्ण या काढ़ा तुरंत राहत देता है. यही नहीं, यह पौधा अपने एंटी-इंफ्लेमेटरी, कफ-पित्तशामक और कृमिनाशक गुणों के कारण शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाने में सक्षम है. कान दर्द और कान के स्राव में भी इसका रस बेहद कारगर माना जाता है. इतने व्यापक उपयोगों के बावजूद लोग इसकी उपयोगिता को पहचान नहीं पाते, जबकि यह एक सस्ता, प्राकृतिक और सुरक्षित औषधीय विकल्प है जो आसानी से मिल जाता है.

हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. अंजु चौधरी ने बताया की आवर्तनी पेट से जुड़ी समस्याओं में बेहद लाभकारी होती है. आवर्तनी का सबसे अधिक उपयोग पाचन तंत्र को ठीक रखने में किया जाता है. यह पेट का दर्द, मरोड़ (ऐंठन), अतिसार (डायरिया), पेचिश इन स्थितियों में इसके चूर्ण या काढ़े का सेवन तुरंत राहत देता है. यह आँतों के संक्रमण को दूर कर पाचन प्रक्रिया को मजबूत बनाता है.इसके अलावा आवर्तनी पेट के कीड़ों (कृमियों) को खत्म करने में कारगर मानी जाती है. बच्चों और बड़ों दोनों में होने वाली कृमि समस्या में इसका चूर्ण बड़ी तेजी से प्रभाव दिखाता है.
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यह कान दर्द और कान से स्राव में उपयोगी होती है. सके फल का रस या फल से निकाला गया तेल कान में डालने से कान का दर्द, कान से पानी/मवाद बहना में आराम मिलता है. यह एक प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-इंफेक्शन एजेंट के रूप में काम करता है. आवर्तनी का प्रयोग रक्त को शुद्ध करने तथा रक्तस्राव रोकने में भी किया जाता है. इसके गुण शरीर में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालते हैं और त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. ग्रामीण सीमा देवी ने बताया कि आवर्तनी का उपयोग चूर्ण के रूप में कर सकते हैं. पेट दर्द होने पर आधा चम्मच आवर्तनी चूर्ण गुनगुने पानी के साथ दिन में 1-2 बार लें.

डायरिया/पेचिश होने पर चूर्ण को छाछ या गुनगुने पानी में मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है. इसके अलावा काढा बनाकर भी पीया जा सकता है. 2-3 सूखी आवर्तनी फलियों को पानी में उबालें और आधा रहने तक धीमी आंच पर पकाएँ. यह काढ़ा पेट दर्द, गैस, और संक्रमण में बहुत प्रभावी है. इसे दिन में एक बार पिया जा सकता है. कान दर्द में उपयोग के लिए फल को हल्का गरम कर उसका रस निकालें या बाजार में उपलब्ध आवर्तनी तेल का इस्तेमाल करें. कान में 1–2 बूंद डालने से दर्द और स्राव में राहत मिलती है.

बहुत हल्की मात्रा में चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर खाने से पेट में होने वाले कीड़े खत्म हो जाते है. आवर्तनी एक बहुउपयोगी, प्राकृतिक और असरदार औषधीय पौधा है जो पेट संबंधी रोगों, संक्रमणों, कान दर्द और रक्त शुद्धि में बेहद लाभकारी है. आसानी से उपलब्ध होने के बावजूद लोग इसके अद्भुत गुणों से अनजान रहते हैं. यदि इसका सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह कई आम बीमारियों का सरल और प्रभावी घरेलू इलाज साबित हो सकता है.
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December 13, 2025, 10:53 IST
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