दुनिया को उल्टे चश्मे से देखने वाला वो शख्स, जिसकी कलम से निकला कालजयी टीवी शो, हंसी से भर दी दर्शकों की जिंदगी

Last Updated:December 26, 2025, 07:37 IST
दिलीप जोशी का शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ पिछले कई सालों से दर्शकों को एंटरटेन कर रहा है. यह सबसे लंबा चलने वाला शो साबित हुआ. बड़ों से लेकर बच्चे तक इस सीरियल के फैन हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि यह शो जिस शख्स की कलम से निकला है वह कोई और नहीं, बल्कि तारक जनुभाई मेहता हैं. उन्होंने दुनिया को हमेशा उल्टे चश्मे से देखा और उसे लोगों के सामने पेश किया है. आज तारक मेहता की बर्थ एनिवर्सरी है. चलिए इस मौके पर उनके करियर पर एक नजर डालते हैं.
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तारक मेहता ने जिंदगीभर लोगों को अपनी रचनाओं से हंसाने का काम किया.
नई दिल्ली. ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ टीवी की दुनिया का पॉपुलर शो है. इस सीरियल ने हर वर्ग के दर्शकों के दिलों में कब्जा किया है. लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि इस शो की शुरुआत कैसे हुई. इसका पूरा क्रेडिट गुजराती साहित्य के प्रसिद्ध हास्यकार, कॉलमनिस्ट और नाटककार तारक जनुभाई मेहता को जाता है, जिनकी आज यानी 26 दिसंबर को जयंती है. वह एक ऐसे साहित्यकार थे, जो दुनिया को सीधे नहीं बल्कि उल्टे चश्मे से देखते थे. उनकी रचनाएं पाठकों, दर्शकों को आज भी खिलखिलाकर हंसने पर मजबूर करती हैं.
तारक मेहता का जन्म 26 दिसंबर 1929 को अहमदाबाद, गुजरात में हुआ था. वह मुख्य रूप से अपनी मशहूर साप्ताहिक कॉलम ‘दुनिया ने उंधा चश्मा’ के लिए जाने जाते हैं, जो मार्च 1971 में गुजराती साप्ताहिक पत्रिका ‘चित्रलेखा’ में पहली बार प्रकाशित हुई थी. इस कॉलम में वह समकालीन सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को हास्य के उल्टे चश्मे से देखते थे, जिससे पाठकों को हंसी के साथ गहरा संदेश मिलता था.
तारक मेहता ने अपने करियर में लिखीं 80 से ज्यादा किताबें
तारक मेहता ने अपने करियर में 80 से अधिक किताबें लिखीं. इनमें से कई उनके कॉलम पर आधारित थीं, जबकि तीन किताबें कई अखबारों में छपे उनके लेखों का संकलन थीं. एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी शैली के बारे में बताया था कि दुनिया ने उंधा चश्मा कॉलम के जरिए समाज की कमियों को हल्के-फुल्के व्यंग्य से उजागर करना उनका मकसद है. उन्होंने बताया था, ‘मैं मुद्दों को उल्टे चश्मे से देखता हूं, ताकि लोग हंसते-हंसते सोचें. हास्य कटु नहीं, बल्कि मिठास भरा होना चाहिए, जो दिल को छूए और बदलाव लाए.’
तारक मेहता को मिला पद्म श्री सम्मान
वह गुजराती थिएटर के भी प्रमुख व्यक्तित्व थे और कई हास्य नाटकों का उन्होंने अनुवाद किया. उनकी लेखनी में हल्का-फुल्का व्यंग्य था, जो समाज की कमियों पर चुटकी लेता था, लेकिन कभी कटु नहीं होता. साल 2015 में भारत सरकार ने उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्म श्री सम्मान से नवाजा.
कैसे हुई ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की शुरुआत?
साल 2008 में निर्माता असित कुमार मोदी ने उनकी इसी कॉलम पर आधारित धारावाहिक ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ शुरू किया, जो सोनी सब चैनल पर प्रसारित होता है. यह शो भारत के सबसे लंबे चलने वाले कॉमेडी सीरियल्स में से एक है और गोकुलधाम सोसाइटी के किरदारों के माध्यम से रोजमर्रा की जिंदगी की हंसी-मजाक दिखाता है. शो में तारक मेहता का किरदार पहले शैलेश लोढ़ा ने निभाया. तारक मेहता की लेखनी ने न केवल गुजराती साहित्य को समृद्ध किया, बल्कि टीवी के जरिए पूरे देश में हंसी का संदेश फैलाया. तारक मेहता का निधन 1 मार्च 2017 को लंबी बीमारी के बाद 87 साल की आयु में अहमदाबाद में हुआ था.
About the AuthorKamta Prasad
साल 2015 में दैनिक भास्कर से करियर की शुरुआत की. फिर दैनिक जागरण में बतौर टीम लीड काम किया. डिजिटल करियर की शुरुआत आज तक से की और एबीपी, ज़ी न्यूज़, बिज़नेस वर्ल्ड जैसे संस्थानों में काम किया. पिछले 6 सालों से …और पढ़ें
First Published :
December 26, 2025, 07:37 IST
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दुनिया को उल्टे चश्मे से देखने वाला वो शख्स, जिसकी कलम से निकला कालजयी टीवी शो



