The miracle of the pulse watch and 150 years of history

Last Updated:December 20, 2025, 09:54 IST
Watch wearing God Gopinathji Jaipur: जयपुर के गोपीनाथ जी मंदिर में भगवान कृष्ण कलाई पर घड़ी धारण करते हैं. मान्यता है कि एक अंग्रेज द्वारा बांधी गई नब्ज वाली घड़ी मूर्ति के हाथ पर चलने लगी थी. तब से भक्त यहाँ घड़ी चढ़ाते हैं और यह मंदिर ‘घड़ी वाले भगवान’ के नाम से प्रसिद्ध है.
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जयपुर के घड़ी वाले गोपीनाथ जी: पल्स वॉच से शुरू हुई परंपरा
Watch wearing God Gopinathji Jaipur: कहते हैं जहाँ श्रद्धा हो वहाँ तर्क की कोई जगह नहीं होती. गुलाबी नगरी जयपुर के परकोटा क्षेत्र (ओल्ड सिटी) की तंग गलियों में स्थित करीब 150 साल पुराना गोपीनाथ जी का मंदिर इसका जीता-जागता उदाहरण है. पूरे देश में यह इकलौता ऐसा मंदिर है जहाँ भगवान कृष्ण के रूप गोपीनाथ जी अपने हाथों में घड़ी पहनते हैं. इन्हें ‘घड़ी वाले भगवान’ के नाम से जाना जाता है. यहाँ आने वाले भक्त भगवान के दर्शन के साथ-साथ उनकी कलाई पर बंधी घड़ी को देखकर विस्मित रह जाते हैं.
इस अनूठी परंपरा के पीछे एक दिलचस्प इतिहास छिपा है. कहा जाता है कि गुलाम भारत के समय एक अंग्रेज अधिकारी ने सुना कि यहाँ के विग्रह (मूर्ति) सजीव हैं और उनमें जीवन का स्पंदन है. उस जमाने में नब्ज (पल्स) से चलने वाली घड़ियाँ आती थीं, जो हाथ की धड़कन से ऊर्जा लेकर चलती थीं. अंग्रेज ने अपनी नब्ज वाली घड़ी भगवान गोपीनाथ जी की कलाई पर बांध दी. आश्चर्यजनक रूप से वह घड़ी बंद नहीं हुई बल्कि लगातार चलने लगी. इस घटना के बाद गोपीनाथ जी की ख्याति सात समंदर पार तक फैल गई.
शेखावत समाज के ईष्ट और भक्तों की अटूट आस्थागोपीनाथ जी भगवान राजपूतों के शेखावत वंश के ईष्ट देव माने जाते हैं. शेखावत समाज सहित देश-विदेश से बड़ी तादाद में श्रद्धालु यहाँ दर्शनों के लिए पहुँचते हैं. भक्तों की आस्था इतनी गहरी है कि वे यहाँ अपनी मनोकामना पूरी होने पर भगवान को महंगी घड़ियाँ भेंट स्वरूप चढ़ाते हैं. पिछले 70 सालों से भगवान की कलाई पर निरंतर घड़ी बंधी हुई है. श्रृंगार के साथ समय-समय पर इन घड़ियों को बदला भी जाता है. आज भी श्रद्धालु ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से विशेष रूप से इन ‘घड़ी वाले कान्हा’ के दर्शन करने जयपुर आते हैं.
बंगाली पुजारियों की पीढ़ियाँ कर रही हैं सेवाइस मंदिर की एक और खासियत यहाँ की पूजा पद्धति है. सदियों से इस मंदिर में बंगाल के ब्राह्मण परिवार ही पुजारी के रूप में सेवा दे रहे हैं. वर्तमान में उसी परिवार की नई पीढ़ियाँ इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं. यद्यपि अब पल्स वाली घड़ियाँ बाजार में कम मिलती हैं, लेकिन भक्त श्रद्धा स्वरूप डिजिटल और एनालॉग हर तरह की घड़ियाँ चढ़ाते हैं. भगवान की कलाई पर घड़ी देखकर ऐसा आभास होता है मानो संसार का समय स्वयं गोपीनाथ जी ही चला रहे हों.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें
Location :
Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
December 20, 2025, 09:54 IST
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