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जमीन पर चलने वाले ‘दैत्‍य’ पलभर में होंगे खाक, आर्मी को मिलने वाला है ऐसा ब्रह्मास्‍त्र, दुश्‍मनों के लिए तबाही – Indian Army Man Portable Anti Tank Guided Missile MPATGM system Defence Research and Development Organisation DRDO innovation

Agency:एजेंसियां

Last Updated:November 10, 2025, 06:37 IST

Portable Anti Tank Guided Missile: आर्मी, नेवी और एयरफोर्स को मजबूत और अपग्रेड करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है. इसका उद्देश्‍य समंदर और आसमान से लेकर जमीन तक की सीमा को सुरक्षित करना है. DRDO इसमें अहम भूमिका निभा रहा है.जमीन पर चलने वाले 'दैत्‍य' पलभर में होंगे खाक, आर्मी को मिलेगा ऐसा ब्रह्मोसइंडियन आर्मी को जल्‍द ही पोर्टेबल एंटी टैंक मिसाइल की आपूर्ति की जाएगी. (फाइल फोटो)

Portable Anti Tank Guided Missile: भारतीय सेना को जल्द ही एक बड़ी बढ़त मिलने वाली है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित स्वदेशी मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) सिस्टम 2026 तक सेना में शामिल हो जाएगा. यह मिसाइल आयातित पुरानी प्रणालियों की जगह लेगी और भारत को उन्नत युद्धक्षेत्र हथियारों में आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम देगी. MPATGM में ‘फायर-एंड-फॉरगेट’ तकनीक है, जो मौजूदा दूसरी पीढ़ी की MILAN और Konkurs मिसाइलों से कहीं आगे है. पुरानी वायर-गाइडेड मिसाइलों में सैनिक को टारगेट पर नजर रखनी पड़ती थी, लेकिन नई मिसाइल लॉन्च होने के बाद खुद ही लक्ष्य को ट्रैक कर नष्ट कर देती है. इससे सैनिक तुरंत सुरक्षित स्थान पर जा सकता है, जो आधुनिक युद्ध में जान बचाने के लिए बेहद जरूरी है.

साल 2020 के गलवान बॉर्डर संघर्ष में पहाड़ी इलाकों में पोर्टेबल एंटी-टैंक हथियारों की जरूरत साफ हुई. इसके जवाब में रक्षा मंत्रालय ने 2015 में ₹73.46 करोड़ के बजट से MPATGM प्रोजेक्ट मंजूर किया. नाग मिसाइल परिवार की इस मैन-पोर्टेबल वर्जन को पैदल सैनिकों, पैरा-स्पेशल फोर्सेज और एयरबोर्न यूनिट्स के लिए डिजाइन किया गया. उत्पादन की जिम्मेदारी भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) को सौंपी गई, जिसने तेलंगाना के भानुर में 2018 तक विशेष फैक्ट्री स्थापित कर ली. कोविड महामारी से टेस्टिंग में देरी हुई, लेकिन सीकर और प्रोपल्शन डिजाइन में लगातार सुधार होते रहे.

वजन काफी कम

कुल वजन 30 किलोग्राम से कम होने से यह मुश्किल इलाकों में भी आसानी से ले जाया जा सकता है. मिसाइल का वजन 14.5 किग्रा और कमांड लॉन्च यूनिट (त्रिपॉड सहित) 14.25 किग्रा है. दो सैनिकों की टीम इसे चला सकती है. रेंज 200 मीटर से 4,000 मीटर तक है, जो रेगिस्तान, पहाड़ और शहरी इलाकों सभी में प्रभावी है. टैंडेम हाई एक्सप्लोसिव एंटी-टैंक (HEAT) वॉरहेड आधुनिक टैंकों की कंपोजिट और एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर (ERA) को हराने में सक्षम है. पहला चार्ज ERA को निष्क्रिय करता है, दूसरा मुख्य चार्ज 650 मिलीमीटर से ज्यादा रोल्ड होमोजीनियस आर्मर भेद देता है. इमेजिंग इंफ्रा-रेड (IIR) सीकर दुश्मन वाहनों की हीट सिग्नेचर पर लॉक करता है, खराब मौसम में भी सटीक हिट सुनिश्चित करता है. दो अटैक मोड हैं: डायरेक्ट अटैक मतलबल साइड या रियर से सीधा हमला. और दूसरा टॉप अटैक है, जिसमें ऊपर चढ़कर टैंक के सबसे कमजोर हिस्से (टरेट/इंजन डेक) को टारगेट किया जाता है. 90% से ज्यादा स्वदेशी कंपोनेंट्स के साथ यह अमेरिकी Javelin और इजरायली Spike-LR के बराबर का है.

सफल परीक्षण

2018-19 में राजस्थान में शुरुआती फ्लाइट टेस्ट, 2021-22 में पोस्ट-पैंडेमिक ट्रायल्स और अगस्त 2024 में पोखरण में कठिन परिस्थितियों में टैंडेम वॉरहेड की प्रभावशीलता साबित हुई. रक्षा मंत्रालय के सभी मानकों को पार किया. 2026 में लद्दाख की भयंकर ठंड और शहरी युद्ध परिदृश्यों में अंतिम यूजर ट्रायल्स होंगे. इसके बाद BDL और निजी पार्टनर VEM टेक्नोलॉजीज बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करेंगे. पहली डिलीवरी 2027 में होगी. इससे अस्थायी रूप से खरीदे गए इजरायली Spike सिस्टम धीरे-धीरे बाहर हो जाएंगे. MPATGM सिर्फ हथियार अपग्रेड नहीं, बल्कि भारत की परिपक्व रक्षा औद्योगिक क्षमता का प्रतीक है. यह सैनिकों को हल्का, आसान और घातक हथियार देगा और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को रणनीतिक तकनीकों में ठोस सफलता प्रदान करेगा.

Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

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First Published :

November 10, 2025, 06:33 IST

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