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42 गानों वाली इकलौती फिल्म, कोठे पर जन्मी 16 साल की लड़की बनी पहली सुपरस्टार, तांगेवाले ने गिरवी रख दिए घोड़े तक

Last Updated:November 13, 2025, 18:33 IST

किसी के लिए दीवानगी क्या होती है? जब उसके लिए हम कुछ भी कर गुजरें. ऐसे ही पागलपन स्टार्स के लिए फैंस के बीच भी होता है. वह उनकी फिल्में देखने के लिए बेकरार होते हैं. चेहरे स्टार्स को भगवान की तरह पूजते हैं.

ठीक ऐसे ही, पहली सुपरस्टार के लिए हुआ था. वो फीमेल सुपरस्टार, जो 16 की उम्र में सक्सेसफुल हो गईं. उनके लिए लोगों के बीच पागलपन हुआ करता था. एक तांगेवाले ने तो उनकी फिल्म 22 बार देखी थी और घोड़े तक गिरवी रख दिए थे.

ये किस्सा है सिंगर और एक्ट्रेस कज्जनबाई का. जिनका जन्म तो बदनाम गलियों में हुआ. मगर वह खुद कोठे से उठकर शाही महल तक पहुंचीं और वो भी अपने दम पर. उनकी गायिकी के लोग ऐसे दीवाने थे कि उन्हें सुनने के लिए कुछ भी कर गुजरते थे. उनका ये टैलेंट ही उन्हें फिल्मों तक लाया. उन्होंने भी बतौर हीरोइन भी काम किया और खूब सक्सेसफुल रहीं. उस जमाने में वह किसी राजकुमारी से कम लग्जरी लाइफ नहीं जीती थीं. चलिए आज आपको कज्जनबाई और उनकी फिल्म के किस्से से रूबरू करवाते हैं.

15 फरवरी 1915 में कज्जनबाई का जन्म लखनऊ की तवायफ सुग्गनबाई के घर हुआ. वह एक नवाब की बेटी थीं. उनका असली नाम जहांआरा कज्जन था. उनकी मां तवायफ थीं और उनकी महफिल में एक से एक नवाब व रईस आता था. वह अपने गानों के लिए मशहूर थीं. मगर एक वक्त आया आया जब तवायफों और कोठों का विरोध हुआ तो सारी तवायफें आर्टिस्ट बन गईं. कज्जनबाई में भी मां का टेलेंट आया.

बचपन से ही उन्होंने गाना बजाना देखा था. मगर सुग्गन ने बेटी को खास ट्रेनिंग दिलवाने का फैसला लिया. इसलिए इंग्लिश और उर्दू सीखने के लिए बेटी को पटना भेजा जहां उन्हें क्लासिकल सिंगिंग की ट्रेनिंग मिल सके. यही वजह है कि कज्जनबाई की हिंदी-उर्दू ही नहीं बल्कि अंग्रेजी भी बहुत अच्छी थी.

कज्जनबाई धीरे धीरे गाने, शेर व शायरी करने लगीं. उनकी धीरे धीरें पहचान बनने लगी. एक दिन प्रोड्यूसर जमशेद मदन ने उन्हें अपनी फिल्म के लिए कास्ट किया. वह भारत की दूसरी बोलती फिल्म शिरीन फरहाद बना रहे थे. बस इस तरह कज्जनबाई फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंचीं.

शुरुआत में कज्जनबाई अपने गानों के लिए मशहूर थीं. उनकी परफॉर्मेंस के तब खूब चर्चे होते थे. उस जमाने में उन्हें एक परफॉर्मेंस के 250-300 रुपये मिला करते थे. जब वह गानों से स्टार बन गई थीं तो वह देश की दूसरी बोलती फिल्म शिरनी फरहाद में नजर आईं. उन्होंने इस फिल्म के लिए गाने भी गाए.

शिरनी फरहाद फिल्म की बात करें तो इसमें 42 गाने थे जो कज्जनबाई और निसार ने मिलकर गाए. ये फिल्म देश की पहली बोलती फिल्म आलम आरा के चंद हफ्ते बाद ही रिलीज हुई थी. प्ले पर बनी फिल्म ने उस जमाने में इतिहास रच दिया था जिसमें 42 गाने थे. फिल्म तो खूब सफल हुई ही साथ ही कज्जनबाई भी सुपरहिट हो गईं. 16 की उम्र में वह हिंदी सिनेमा की पहली सुपरस्टार बन गईं.

कहते हैं कि हिंदी सिनेमा की ये फिल्म इतनी चर्चित हुई कि लाहौर के एक तांगेवाले ने 22 बार कज्जनबाई के लिए ये फिल्म देखी. उन्होंने अपने घोड़े तक गिरवी रख दिए थे.

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November 13, 2025, 18:33 IST

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