चौमूं के मीठे और खट्टे बेर बन रहे जयपुर की पहचान, MP, UP और हिमाचल में भी है इनकी भारी डिमांड

Last Updated:February 28, 2025, 10:49 IST
Agriculture News: राजस्थान के जयपुर के बेर की केवल प्रदेश में ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी काफी डिमांड है. यहां की चौमू मंडी से देश के कई राज्यों में बेर की सप्लाई की जाती है. यह बेर यहां के कुछ किसानों क…और पढ़ेंX
बेर
हाइलाइट्स
जयपुर के चौमूं के बेर की देशभर में भारी मांग है.चौमूं मंडी से बेर की सप्लाई कई राज्यों में होती है.बेर की खेती किसानों की आमदनी का मुख्य स्रोत है.
जयपुर. राजस्थान में किसान उन्नत तकनीकों का उपयोग कर बेर की खेती कर रहे हैं. छोटे, गोल व स्वाद में लाजवाब जयपुर के चौमूं के बेर राजस्थान में ही नहीं बल्कि बाहरी राज्यों में भी प्रसिद्ध है. इस बेर की चार महीने की पैदावार किसानों की आमदनी का जरिया है. आपको बता दें चौमूं क्षेत्र में बेर के चमेली, पेमली और खट -मीठा बेर की खेती सबसे ज्यादा होती है. चौमूं मंडी से भारी मात्रा में गुजरात, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, हिमाचल सहित अन्य राज्यों में भी बेर की सप्लाई की जाती है. इस क्षेत्र में होने वाले बेर दो साइज के होते हैं, एक पेमली बेर, जो मोटा और मीठा होता है. दूसरा चमेली बेर, गोल छोटा होने के साथ स्वाद में खट्टा-मीठा होता है. तो चलिए जानते हैं इनके बारे में
एक पेड़ से डेढ़ क्विंटल तक उत्पादन आपको बता दें, कि चौमूं के एनएच 52 पर जगह-जगह आपको बेर से सजी हुई दुकानें इन दिनों देखने को मिल जाएंगी. बेर का सीजन जनवरी महीने के दूसरे सप्ताह से शुरू होकर अप्रैल महीने के अंत तक चलता है. इसके साथ ही कई परिवारों के तो बेर किसानों की आमदनी का मुख्य संसाधन भी हैं. बता दें, एक बड़ी झाड़ी के पेड़ से 50 किलो से डेढ़ क्विंटल तक उत्पादन होता है. बेर स्थानीय स्तर पर 15 रुपए से 50 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक जाता है. किसानों की मानें तो एक पेड़ से करीब एक क्विंटल के उत्पादन से लेकर दो क्विंटल तक उत्पादन होता है. वहीं, अच्छे और मोटे बेर मंडी में करीब 20 रुपए किलो से लेकर 50 रुपए किलो तक के भाव से बिकते हैं. किसान इन मीठे बेरों की छंटनी करके अलग-अलग रेटों में दुकानदार को बेचते हैं. वहीं दुकानदार करीब 30 रुपए किलो से लेकर 100 रूपए किलो तक के बाजार भाव से बेर बेच रहे हैं
दो किस्मों की होती है बेर की खेती आपको बता दें,चौमूं सहित आसपास के इलाके में भी बेर की काफी खेती की जाती हैं. यहां किसान सालों से बेर की खेती कर रहे हैं. यहां बेरों की दो स्थानीय किस्म हैं- चमेली बेर, जो छोटा व गोल होता है. दूसरा पेमली बेर जो कि मोटा होता है. हालांकि अब किसान हाइब्रिड में थाई एप्पल बेरों की किस्में भी लगा रहे हैं. पेमली बेर को ग्राफ्टेड पेड़ की तरह तैयार किया जाता है. इस किस्म का बेर काफी मोटा और मीठा होता है.
Location :
Jaipur,Rajasthan
First Published :
February 28, 2025, 10:49 IST
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चौमूं के बेर बन रहे जयपुर की पहचान, MP, UP और हिमाचल में भी है इनकी डिमांड