40 साल की निस्वार्थ सेवा की कहानी, कैसे एक शिक्षक ने स्काउट-गाइड आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया

कोटा. राजस्थान में भारत स्काउट एवं गाइड आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले समर्पित शिक्षाविद और समाजसेवी प्रकाश जायसवाल बीते लगभग चार दशकों से निस्वार्थ भाव से अपनी सेवाएं दे रहे हैं. वर्ष 1985 में रोवर–रेंजर स्काउट गाइड से जुड़कर उन्होंने सेवा, अनुशासन और नेतृत्व की इस यात्रा की शुरुआत की, जो आज भी पूरे समर्पण और निरंतरता के साथ जारी है. स्काउटिंग को उन्होंने केवल गतिविधि नहीं, बल्कि जीवन मूल्य और चरित्र निर्माण का माध्यम बनाया.
प्रकाश जायसवाल की उत्कृष्ट सेवाओं को देखते हुए उन्हें वर्ष 1989 में राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित किया गया, जो स्काउट–गाइड आंदोलन का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है. शिक्षक के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने हमेशा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता दी. वर्ष 1996 से 2005 तक उन्होंने स्काउट मास्टर के रूप में सेवाएं दीं और सैकड़ों विद्यार्थियों को अनुशासन, सेवा भावना और राष्ट्रभक्ति के संस्कार दिए. इसके बाद वर्ष 2006 से अब तक वे स्काउट कब मास्टर के रूप में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
संगठनात्मक जिम्मेदारियां और नेतृत्ववर्ष 2014 से प्रकाश जायसवाल को स्काउट–गाइड (कब, बुलबुल, रोवर, रेंजर, स्काउट–गाइड) का प्रभारी नियुक्त किया गया. इसके साथ ही वे विद्यालय प्रभारी की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं. संगठनात्मक स्तर पर उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है. वर्तमान में वे राजस्थान राज्य भारत स्काउट एवं गाइड स्थानीय संघ कोटा दक्षिण के सचिव तथा राजस्थान राज्य भारत स्काउट एवं गाइड, कोटा जिले के प्रधान के पद पर कार्यरत हैं. उनके नेतृत्व में संगठनात्मक गतिविधियों को नई दिशा और मजबूती मिली है.
विद्यार्थियों को स्काउटिंग से जोड़ने का अभियानप्रकाश जायसवाल सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को स्काउट–गाइड आंदोलन से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत हैं. वे विद्यार्थियों को स्काउटिंग के लाभ, उद्देश्य और भविष्य में मिलने वाले अवसरों की जानकारी देकर प्रेरित करते हैं. उनके प्रयासों से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के हजारों विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का मंच मिला है और उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व और सेवा की भावना विकसित हुई है.
पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिकाशिक्षा और स्काउटिंग के साथ-साथ प्रकाश जायसवाल एक सक्रिय पर्यावरण प्रेमी भी हैं. उनके नेतृत्व में महावीर नगर विस्तार योजना, आंवली, रोझड़ी, पिसा हेड़ा, सुल्तानपुर, बमोरी जगपुरा, अलनिया स्काउट एवं गाइड क्षेत्र, बारां जिले के पलसवा और शम्बूपुरा सहित कोटा शहर के ग्रीन पार्क में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाए गए हैं. इसके अलावा उन्होंने अपने माता–पिता की पुण्य स्मृति में आंवली क्षेत्र में वन विकसित करने का कार्य भी प्रारंभ किया है, जो सामाजिक और पर्यावरणीय चेतना का उदाहरण है.
छात्र उपलब्धियां और प्रशिक्षण का परिणामराजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, आवासन मंडल केशवपुरा में शिक्षक के रूप में कार्यरत रहते हुए उनकी ट्रेनिंग से राज्य स्तर पर 216 विद्यार्थी और राष्ट्रीय स्तर पर 124 विद्यार्थी सम्मानित हो चुके हैं. वहीं 7 विद्यार्थियों को राष्ट्रपति अवार्ड भी प्राप्त हो चुका है. यह आंकड़े उनके प्रशिक्षण कौशल, मार्गदर्शन और समर्पण का स्पष्ट प्रमाण हैं.
राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर उपलब्धियांकब–बुलबुल गतिविधियों में उन्होंने तीन बार रीजनल लेवल पर राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया और तीनों बार चैंपियनशिप जीतकर राज्य का नाम रोशन किया. एक बार राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए बिहार के बरौनी में आयोजित राष्ट्रीय कबिंग चैंपियनशिप में भी जीत हासिल की. इन उपलब्धियों ने राजस्थान को स्काउट–गाइड गतिविधियों में राष्ट्रीय पहचान दिलाई.
वर्तमान जिम्मेदारियां और नई पहलवर्तमान में प्रकाश जायसवाल शिक्षा विभाग कर्मचारीगण सहकारी सभा 696 के चेयरमैन भी हैं. उनके प्रयासों से सरकारी स्कूलों और ओपन स्काउटिंग से जुड़े विद्यार्थियों को निशुल्क स्काउट–गाइड ड्रेस उपलब्ध कराने की योजना शुरू की गई है, ताकि आर्थिक कारणों से कोई भी विद्यार्थी इस आंदोलन से वंचित न रहे.
सेवा और प्रेरणा का जीवंत उदाहरणनिसंदेह, प्रकाश जायसवाल का जीवन सेवा, अनुशासन, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायक उदाहरण है. उनका समर्पण न केवल स्काउट–गाइड आंदोलन को मजबूत कर रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी के लिए भी प्रेरित करता रहेगा.



