अनोखी है इस बावड़ी की कहानी, राजकुमारी को सपने में दिखी फिर कारीगरों को दिया बनाने का आदेश…

सिरोही : प्राचीन समय में पानी के संरक्षण के लिए कई सुंदर बावडियां राजा-महाराजाओं द्वारा बनवाई जाती थी, लेकिन आज हम आपको ऐसी बावड़ी के बारे में बताने जा रहे हैं जो राजा की पुत्री द्वारा बनवाई गई थी. इस बावड़ी को स्वप्न बावड़ी के नाम से भी जाना जाता है. हम बात कर रहे हैं सिरोही जिले के बसंतगढ़ गांव स्थित लाण वापी या लाहिनी बावड़ी की.
बावड़ी या वाव एक प्राचीन जलाशय होता है, जिसके पैंदे तक सीढियां बनी होती है. बावडियां केवल जलाशय होने के साथ ही एक प्राचीन धरोहर के रूप में भी जानी जाती है. बावडियों के आसपास सुंदर कलाकृतियां भी करवाई जाती रही है. राजस्थान की सबसे प्राचीन वाहडियों में से एक और जिले की सबसे प्राचीन बावड़ी लाहिनी बावड़ी को पूर्व में सरस्वती बावड़ी कहा जाता था. बाद में 1042 ईस्वी इस बावड़ी का निर्माण आबू के शासक धंधुक की पुत्री और चौहान शासक विग्रहराज द्वितीय की पत्नी लाहिनी देवी के द्वारा करवाया गया था.
इस वजह से इसका नाम लाहिनी बावड़ी हो गया. इस बावड़ी में बैलों से पानी खींचने के लिए भी जगह बनी हुई हैं. चारों तरफ सुंदर नक्काशी के साथ ही पास में दो प्राचीन मंदिर भी बने हुए हैं. इसमें एक मंदिर में शिवलिंग स्थापित है. वहीं बावड़ी के एक तरफ भगवान विष्णु का मंदिर बना हुआ है. आज भी इस बावड़ी में भरे पानी का आसपास के लोग उपयोग करते हैं.
इसलिए कहा जाता है सपनों की बावड़ी इस प्राचीन बावड़ी को सपनों की बावड़ी भी कहा जाता था. क्योंकि ये बावड़ी बनाने का लाहिनी को स्वप्न आया था. इसके बाद कारीगरों से उनके सपने में दिखाई दी गई बावड़ी की जानकारी दी गई. फिर कारीगरों ने इस बावड़ी का निर्माण किया.
बावड़ी से मिला था अभिलेख इस बावड़ी से एक प्राचीन अभिलेख मिला था. जो परमार राजा पूर्णपाल के समय की था. विक्रम संवत 1099 की इस प्रशस्ति में परमार राजा उत्पलराज से पूर्णपाल तक आबू के परमारों की वंशावली दी गई थी. इस प्रशस्ति से ज्ञात हुआ था कि पूर्णपाल की छोटी बहिन लाहिनी का विवाह विग्रहराज से हुआ था. विधवा होने पर अपने छोटे भाई के पास वटपुर वर्तमान के बसंतगढ़ आ गई थी. उसने यहां टूटे सूर्य मंदिर और इस बावड़ी का निर्माण करवाया था. इस अभिलेख में वटपुर नाम के शहर के निर्माण का भी वर्णन मिलता है. इस वटपुर में तालाब, भवन और दुर्ग थे.
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FIRST PUBLISHED : July 24, 2024, 23:10 IST