सरकार से उम्मीद टूटी, ग्रामीणों ने खुद भद्रावती नदी पर 150 फीट लंबी पुलिया बनाई, श्रमदान से लिखा बदलाव का इतिहास

करौली. राजस्थान के करौली स्थित बिचपुरी ग्राम पंचायत के महाराजपुरा और आस-पास के गांव के ग्रामीणों ने वह कर दिखाया, जिसे वर्षों से सरकारें और जनप्रतिनिधि पूरा नहीं कर पाए. ग्रामीणों की माने तो गांव में होकर गुजरने वाली भद्रावती नदी के चलते हर साल बारिश के दिनों में ग्रामीण सड़क ठप पड़ जाती थी. यह समस्या ग्रामीणों के हौसले और एकजुटता के आगे टिक नहीं पाया. सरकारी इंतज़ार कब तक, यह सोचकर ग्रामीण खुद आगे आए और अब 10 दिन में पत्थर और लोहे के जाल से ऐसी मजबूत पुलिया नदी पर खड़ी कर दी कि अब न नदी का बहाव रुकावट बनेगा और न गांववालों का जीवन.
भद्रावती नदी बारिश में इतने उफान पर आ जाती थी कि 9-10 महीने तक पानी उतरता ही नहीं था. स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर गर्भवती महिलाओं, मरीजों, बुजुर्गों तक हर किसी के लिए यह रास्ता पहाड़ जैसा हो जाता था. यहां तक कि अस्पताल पहुंचना मुश्किल हो जाता था. साथ ही शहर तक पहुंचना भी नामुमकिन हो जाता था और बरसात में दुर्घटनाओं का डर हमेशा सिर पर मंडराता रहता था. अब श्रमदान से बनी पुलिया ने लोगों की समस्या दूर कर दिया है.
मांगें हुई अनसुनी तो ग्रामीणों ने खुद उठाया जिम्मा
करौली के इस गांव के लोग कई सालों तक जनप्रतिनिधियों और अफसरों से पुलिया बनाने की गुहार लगाई. लेकिन पर फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही थी और सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे. आखिरकार ग्रामीणों ने तय कर लिया कि अब करेंगे तो खुद ही करेंगे. इस पुलिया के निर्माण से पहले गांव के मोहन सिंह, गिर्राज, रामेश्वर, पप्पू ठेकेदार, सियाराम और गांव के युवाओं ने बैठक कर बड़ा फैसला लिया. सबसे पहले उन्होंने हर घर से 10 हजार रुपये और हर घर से एक व्यक्ति का श्रमदान लिया.
ग्रामीणों ने 10 दिन में नदी पर बना दिया पुलिया
ग्रामीणों ने ट्रैक्टरों की मदद से नदी में भारी पत्थर डाले. फिर पत्थर, मिट्टी और लोहे के जाल से ऐसी मजबूत संरचना तैयार की कि देखते ही देखते 150 फीट लंबी और 15-20 फीट चौड़ी पुलिया बनकर तैयार हो गई. अब इस पर दोपहिया से लेकर चारपहिया वाहन तक आसानी से निकल रहे हैं.
तेज बहाव से बचाने के लिए लगाया लोहे का जाल
नदी में बहाव जब तेज होता है तो पत्थर खिसकने का खतरा रहता है. इसे ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों ने पुलिया के नीचे और किनारों पर लोहे का मजबूत जाल बिछाया, जिससे पानी भी निकलता रहे और पुलिया भी सुरक्षित रहे.
अब नहीं रूकेगी जिंदगी
गांववालों के मुताबिक, इस पुलिया के बन जाने से अब बरसात में रास्ता बंद नहीं होगा. न बच्चों की पढ़ाई रुकेगी, न मरीजों को परेशानी होगी. सबसे बड़ी बात, दुर्घटनाओं का खतरा भी कम हो जाएगा. इस पहल से बिचपुरी और महाराजपुरा के ग्रामीणों ने साबित कर दिया कि जब समस्या सामने खड़ी हो जाए और व्यवस्था मौन हो जाए, तो सामूहिक हिम्मत किसी भी मुश्किल पर भारी पड़ सकती है. यह पुलिया सिर्फ पत्थरों से बनी संरचना नहीं, बल्कि ग्रामीण एकजुटता की सबसे मजबूत मिसाल है.



