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मोबाइल बैन पर मचा था बवाल, अब समाज ने प्रस्ताव वापस लिया, जानें असली वजह और अंदर की पूरी कहानी

Last Updated:December 25, 2025, 15:52 IST

Jalore News : सुंधा पट्टी परगना में आंजना चौधरी समाज ने महिलाओं और बच्चियों के कैमरे वाले मोबाइल बैन का प्रस्ताव फिलहाल वापस लिया, अब डिजिटल जागरूकता अभियान चलाने की योजना है. हाल ही में समाज की एक बैठक में महिलाओं और बच्चियों के लिए मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर एक प्रस्ताव रखा गया था, जिसे सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में मोबाइल बैन के रूप में प्रस्तुत किया गया.

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जालौर. जालोर जिले के सुंधा पट्टी परगना में आंजना चौधरी समाज द्वारा महिलाओं और बच्चियों के मोबाइल फोन उपयोग को लेकर लिए गए फैसले पर अब बड़ा मोड़ आ गया है. समाज ने कैमरे वाले मोबाइल फोन पर बैन से जुड़े प्रस्ताव को फिलहाल वापस ले लिया है. इस फैसले के बाद जिलेभर में चल रही चर्चाओं और प्रतिक्रियाओं पर विराम लगने की उम्मीद जताई जा रही है.

हाल ही में समाज की एक बैठक में महिलाओं और बच्चियों के लिए मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर एक प्रस्ताव रखा गया था, जिसे सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में मोबाइल बैन के रूप में प्रस्तुत किया गया. इसके बाद समाज के भीतर और बाहर इस निर्णय को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं. कई लोगों ने इसे महिलाओं और बच्चियों की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा, जबकि कुछ लोगों ने इसे समय की आवश्यकता बताया.

प्रस्ताव को लेकर बढ़ा विवादमामले ने जब तूल पकड़ लिया तो आंजना चौधरी समाज के अध्यक्ष सुजानाराम चौधरी सहित समाज के प्रबुद्ध लोगों ने बैठक कर पूरे विषय की समीक्षा की. बैठक के बाद यह स्पष्ट किया गया कि प्रस्ताव को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था. समाज ने साफ कहा कि मोबाइल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की उनकी कोई मंशा नहीं थी और न ही महिलाओं या बच्चियों की आजादी पर रोक लगाने का कोई विचार था.

प्रस्ताव का उद्देश्य क्या थासमाज के सदस्य नथाराम चौधरी गजीपुरा ने जानकारी दी कि इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य बच्चों को मोबाइल की बढ़ती लत, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव, ऑनलाइन गेमिंग और साइबर क्राइम जैसी समस्याओं से बचाना था. मौजूदा समय में बच्चे और किशोर मोबाइल के अत्यधिक उपयोग के कारण पढ़ाई और सामाजिक जीवन से दूर होते जा रहे हैं, जिसे लेकर समाज चिंतित है. इसी चिंता के चलते यह विषय बैठक में रखा गया था.

फिलहाल प्रस्ताव वापसजिस तरह से यह प्रस्ताव सामने आया और जिस तरह की प्रतिक्रियाएं मिलीं, उन्हें देखते हुए समाज ने फिलहाल इसे वापस लेने का निर्णय लिया है. समाज का कहना है कि भविष्य में बच्चों की सुरक्षा, सही मार्गदर्शन और डिजिटल जागरूकता को लेकर अभियान चलाए जाएंगे, ताकि बिना किसी सख्त प्रतिबंध के बेहतर समाधान निकाला जा सके.

नथाराम चौधरी गजीपुरा ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि मोबाइल बैन का प्रस्ताव गलत तरीके से पेश किया गया था. हमारा उद्देश्य महिलाओं या बच्चियों पर रोक लगाना नहीं था, बल्कि बच्चों को मोबाइल की लत, सोशल मीडिया और साइबर क्राइम से बचाना था. मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए समाज ने यह प्रस्ताव फिलहाल वापस ले लिया है.

About the AuthorAnand Pandey

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें

Location :

Jalor,Rajasthan

First Published :

December 25, 2025, 15:52 IST

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