Rajasthan

दीपावली पर घर में यह श्रीयंत्र करें स्थापित, बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, इन धातु से होता है तैयार

निखिल स्वामी/बीकानेर.आपने श्रीयंत्र का नाम तो कभी न कभी सुना होगा. अगर नहीं सुना है तो हम आपको श्रीयंत्र के बारे में बताएंगे. आखिर श्रीयंत्र होता क्या है और यह बनता कैसे है. दीपावली नजदीक आते ही श्रीयंत्र की डिमांड बाजारों में खूब बढ़ जाती है. इन दिनों बीकानेर में एक व्यक्ति श्रीयंत्र बनाकर बेच रहा है और खास बात यह है की पूरे बीकानेर में सिर्फ यही व्यक्ति श्रीयंत्र बनाता है.

यह व्यक्ति सुबह से शाम तक श्रीयंत्र ही बनाता रहता है. हम बात कर कर रहे है बीकानेर के गणपत लाल ठंठेरा की. जिसकी ठंठेरा बाजार में एक दुकान है. इनके पास देशभर से पंडित और आम आदमी श्रीयंत्र बनवाते है. अब तक यह हजारों श्रीयंत्र बना चुके है और उन्होंने अपने पास रखे पुराने औजार से पीतल, तांबा, चांदी पर श्रीयंत्र बनाए है. उनके हाथ की अंगुलिया भी एक स्केल की तरह काम करती है.

गणपत लाल ठंठेरा ने बताया कि वे पिछले 40 सालों से श्रीयंत्र बना रहे हैं. उनका परिवार का व्यापार कार्य बर्तनों पर नाम लिखने और बर्तनों की बिक्री से जुड़ा हुआ है. बीकानेर में वे ही एकमात्र व्यक्ति हैं जो श्रीयंत्र बनाते हैं. वे रोजाना 4 से 5 मंगल यंत्र बनाते हैं, जो 5×5 फीट के होते हैं. श्रीयंत्र बनाने में लगभग दो दिन का समय लगता है. वे बताते हैं कि उनकी कीमत 50 रुपए से 3 हजार रुपए है. वे पीतल, तांबा, चांदी और  लोहे पर भी श्रीयंत्र बनाते है. वे बताते है कि उनके पास बीकानेर के अलावा कलकत्ता, मुंबई सहित कई जगहों से लोग ऑर्डर देते हैं.

छोटी उम्र में पिता के निधन के बाद काम संभाला
गणपत ने बताया कि उनके पिताजी छोटी उम्र में गुजर गए थे और उन्होंने अपने परिवार की दुकान में काम करने का निर्णय लिया. परिवार में उन पर बड़ा भी दायित्व आया और उन्हें अपने परिवार के लिए विभिन्न जिम्मेदारियां संभालनी पड़ी. एक दिन वे अचानक कुछ नया करने का विचार किया, और उन्होंने एक पंडित से श्रीयंत्र के बारे में सुना. कुछ दिनों की मेहनत के बाद ही उन्होंने अपने पहले श्रीयंत्र को बना दिया, और तब से लेकर आजतक वे सिर्फ श्रीयंत्र बनाते हैं.

देशभर से कई ऑर्डर मिले
गणपत ने बताया कि देश और प्रदेश, बीकानेर के कई पंडित उन्हें श्रीयंत्र बनाने के ऑर्डर देते हैं, और कई बार पंडित जी उन्हें कागज पर श्रीयंत्र की आकृति सहित बनाकर भेज देते हैं. इसके बाद, यहां पर पीतल, तांबा, चांदी पर श्रीयंत्र बनाया जाता है. बड़े जगहों पर पंडित जी उन्हें श्रीयंत्र के बारे में सिर्फ बताते हैं, किसी तरह के कागज नहीं भेजते हैं, फिर भी वे एकदम सही तरीके से श्रीयंत्र बनाकर भेज देते हैं.

श्रीयंत्र को लेकर यह है मान्यता
श्रीयंत्र का महत्व विशेष रूप से देवी लक्ष्मी के प्रति है, और इसकी उपस्थिति माता लक्ष्मी की कृपा को बढ़ावा देती है. जब आप श्रीयंत्र को किसी स्थान पर स्थापित करते हैं, तो वहां पर ही देवी लक्ष्मी का स्थाई आवास बन जाता है. इसलिए बहुत सारे लोग इसे अपने तिजोरी या पूजा के मंदिर में रखते हैं, ताकि वहां पर माता लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहे. श्रीयंत्र की रेखाओं और बिंदुओं से कई कोण बनते हैं, और इन कोणों में मंत्रों में मौजूद शक्ति का आधार होता है. श्रीयंत्र में 9 कोण होते हैं, जिनसे छोटे-छोटे 45 कोण बनते हैं, और इसमें कुल 9 चक्र होते हैं, जो 9 देवियों का प्रतीक होते हैं.

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