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सिर्फ सर्दी में मिलती हैं ये 5 भाजी! एक बार चख लीं, तो बार-बार मांगेंगे, स्वाद और सेहत का खजाना

Last Updated:December 24, 2025, 19:35 IST

सर्दी का मौसम ठिठुरन तो लाता है लेकिन यह मौसम अपने साथ खानपान की भी कई लाजवाब चीजें लाता है. मध्य प्रदेश का बालाघाट जिला आदिवासी बहुल जिला है, जहां पर ठंड के मौसम में तरह-तरह की भाजिया खाने को मिलती हैं. ये भाजियां जितनी स्वादिष्ट होती हैं, उतनी ही पौष्टिक भी.बालाघाट जिला आदिवासी बहुल जिला है, जहां पर ठंड के मौसम में तरह-तरह की भाजिया खाने को मिलती है. ये भाजियां जितनी स्वादिष्ट होती है उतनी ही पौष्टिक भी. ये भाजियां अक्सर जंगलों में और खेतों में मिलती है. खास तौर से ठंड के दिनों में कई तरह की भाजियां आती है, जो मार्केट को और भी सुंदर बना देती है. लोग इन्हें बड़े ही चाव से खाते हैं और साल भर इसका इंतजार करते हैं. ऐसे में हम आपको बता रहे है बालाघाट की फेमस पांच भाजियों के बारे में...

ये भाजियां अक्सर जंगलों में और खेतों में मिलती हैं, खासतौर से ठंड के दिनों में कई तरह की भाजियां आती हैं, जो मार्केट को और भी सुंदर बना देती हैं. लोग इन्हें बड़े ही चाव से खाते हैं और सालभर इनका इंतजार करते हैं. आज हम आपको बता रहे हैं बालाघाट की फेमस पांच भाजियों के बारे में.

बालाघाट में धान के बाद लखौरी की बुआई की जाती है, जिसे कहीं पर लाखड़ी तो कही पर तििवरा भी कहते हैं. ये खास तौर से मध्य प्रदेश के बालाघाट,  छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में उगती है. दिसंबर और जनवरी में ये बड़ी होने लगती है और इसकी भाजी को तोड़ा जाता है. इसे पीसकर इसकी सब्जी बनाई जाती है, जिसका स्वाद  हल्का मीठा और मिट्टी की सौंधी खुशबू वाला होता है. इसमें कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं. 

बालाघाट में धान के बाद लखौरी की बुआई की जाती है, जिसे कहीं पर लाखड़ी तो कही पर तिविरा भी कहते हैं. यह खासतौर से मध्य प्रदेश के बालाघाट, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में उगाई जाती है. दिसंबर और जनवरी में यह बड़ी होने लगती है और इसकी भाजी को तोड़ा जाता है. इसे पीसकर इसकी सब्जी बनाई जाती है, जिसका स्वाद हल्का मीठा और मिट्टी की सौंधी खुशबू वाला होता है. इसमें कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं.

बालाघाट के बाजार में चौलाई भाजी की भी काफी डिमांड है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि पोपट की बीजे या सेम मिलाकर इसकी सब्जी से लोग काफी प्रभावित होते हैं. इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए भी काफी लाभकारी है. इसे खास तौर से आलू के साथ बनाया जाता है और खड़ी लाल मिर्च सब्जी के स्वाद को और भी बढ़ा देती है, जो रोटी के साथ खाया जाता है. 

बालाघाट के बाजार में चौलाई भाजी की भी काफी डिमांड रहती है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि पोपट की बीजे या सेम मिलाकर इसकी सब्जी से लोग काफी प्रभावित होते हैं. इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए काफी लाभकारी हैं. इसे खासतौर से आलू के साथ बनाया जाता है. खड़ी लाल मिर्च सब्जी के स्वाद को और भी बढ़ा देती है, जो रोटी के साथ खाई जाती है.

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लाल भाजी जिसे कही लाल साग और लाल चौलाई के नाम से जाना जाता है. ये मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ और झारखंड के आदिवासी अंचल में शौक से खाया जाता है. वहीं ये सब्जी लोगों को काफी पसंद की जाती है. बालाघाट में इसे आलू और बैंगन के साथ पकाया  जाता है. इसे हल्के रसे और चावल के साथ खाने पर हाथ लाल हो जाता है, जो खाने के शौकीनों को काफी पसंद आता है. इसमें कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो खून की कमी को दूर करता है हड्डियों को मजबूत बनाता है. 

लाल भाजी को कहीं लाल साग और लाल चौलाई के नाम से जाना जाता है. यह मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ और झारखंड के आदिवासी अंचलों में शौक से खाई जाती है. इसकी सब्जी लोगों को काफी पसंद आती है. बालाघाट में इसे आलू और बैंगन के साथ पकाया जाता है. इसे हल्की ग्रेवी और चावल के साथ खाने पर हाथ लाल हो जाता है, जो खाने के शौकीनों को काफी पसंद आता है. इसमें कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो खून की कमी को दूर करते हैं और हड्डियों को मजबूत बनाते हैं.

बालाघाट के आदिवासी अंचलों में लोग सरसों की खेती करते हैं. ऐसे में शुद्ध और ऑर्गेनिक सरसों की भाजियों को काफी पसंद करते हैं. इसे आलू के साथ पकाकर सब्जी बनाई जाती है, तो कुछ लोग इसकी चटनी बनाकर चावल के साथ खाते हैं. इसमें युरिक एसिड और विटामिन का भंडार होता है. बालाघाट में इसे धोकर बारिक काटा जाता है फिर लहसुन, सुखी लाल मिर्च और घरेलू मसालों में पकाकर सुखी सब्जी की तरह खाया जाता है.

बालाघाट के आदिवासी अंचलों में लोग सरसों की खेती भी करते हैं. ऐसे में शुद्ध और ऑर्गेनिक सरसों की भाजी को काफी पसंद किया जाता है. इसे आलू के साथ पकाकर सब्जी बनाई जाती है, तो कुछ लोग इसकी चटनी बनाकर चावल के साथ खाते हैं. इसमें विटामिन और मिनरल्स का भंडार होता है. बालाघाट में इसे धोकर बारीक काटा जाता है और फिर लहसुन, सूखी लाल मिर्च और घरेलू मसालों में पकाकर सूखी सब्जी बनाई जाती है.

चने  की बुआई के बाद दिसंबर और जनवरी में चना निपिंग के दौर से गुजरता है. तब इसकी ऊपरी कौले भाग को तोड़ कर इसकी भाजी बनाई जाती है. अब मार्केट में यह आ चुकी है. इसे भाजी का राजा कहा जाता है. इसमें फाइबर होते हैं, जो कब्ज जैसी समस्या से मुक्ति दिलाता है. इसका स्वाद हल्का खट्टा होता है. इसे आप दाल के साथ भी बना सकते हैं और सुखी भी बना सकते हैं.

चने की बुआई के बाद दिसंबर और जनवरी में चना निपिंग के दौर से गुजरता है. तब इसकी ऊपरी कौले भाग को तोड़कर इसकी भाजी बनाई जाती है. अब मार्केट में यह आ चुकी है. इसे भाजी का राजा कहा जाता है. इसमें फाइबर होते हैं, जो कब्ज जैसी समस्या से मुक्ति दिलाते हैं. इसका स्वाद हल्का खट्टा होता है. इसे आप दाल के साथ या सूखी सब्जी के तौर पर भी बना सकते हैं.

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December 24, 2025, 19:35 IST

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