पैकेटबंद खाने में छिपे ये 6 प्रिजर्वेटिव्स बढ़ा रहे हैं कैंसर और डायबिटीज का खतरा, नई रिसर्च में डराने वाला खुलासा!

बाजार से खरीदी गई बिस्किट, सॉस, जैम या पैकेटबंद मीट की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए जिन प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल होता है, वे आपकी सेहत के लिए ‘धीमे जहर’ का काम कर रहे हैं. फ्रांस में हुई दो बड़ी स्टडीज में पाया गया है कि सोडियम नाइट्राइट और पोटैशियम सॉर्बेट जैसे तत्व कैंसर और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं. फ्रांस में हुई दो स्टडीज में यह पाया गया है कि सोडियम नाइट्राइट, पोटैशियम नाइट्रेट, सॉर्बेट्स, पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट, एसीटेट्स और एसीटिक एसिड जैसे प्रिजर्वेटिव्स कैंसर और टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम को बढ़ाता है. आइए पहले यह जानते हैं कि प्रिजर्वेटिव्स क्या होता है.
क्या होते हैं प्रिजर्वेटिव्स और क्यों हैं खतरनाक?
प्रिजर्वेटिव्स वे केमिकल हैं जो खाने को बैक्टीरिया और फफूंद से बचाकर महीनों तक ताजा रखते हैं. नमक और चीनी प्राकृतिक प्रिजर्वेटिव्स हैं, लेकिन आज फूड इंडस्ट्री सोडियम नाइट्राइट, पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट और एसीटेट्स जैसे सिंथेटिक केमिकल्स का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही है. ये केमिकल्स प्रोसेस्ड मीट, चीज, चॉकलेट और पेस्ट्रीज में आम हैं. पश्चिमी देशों में मांस को बड़े पैमाने पर इसी तरह संरक्षित रखा जाता है. इसे प्रोसेस्ड मीट कहा जाता है. इसी तरह हमारे यहां सॉस यानी चटनी, चीज, जैम, चॉकलेट, बिस्किट, पैस्ट्रीज आदि में भी प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल किया जाता है. पहले के जमाने में मांस को ताजा रखने के लिए गरम मसाले का इस्तेमाल किया जाता था. आज सैकड़ों तरह के सिंथेटिक यानी केमिकल वाले प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल खाद्य पदार्थों में किए जाते हैं. सोडियम नाइट्राइट, पोटैशियम नाइट्रेट, सॉर्बेट्स, पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट, एसीटेट्स और एसीटिक एसिड, सोडियम एरिथॉर्बेट, एरिथॉर्बेट्स जैसे कई प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल फूड इंडस्ट्री में होता है.
रिसर्च में सामने आई ये बात
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस में दो नई स्टडीज की गई है. इसमें फूड की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले आम प्रिज़र्वेटिव्स लेने वाले लोगों पर रिसर्च की गई है. इसी रिसर्च में यह पाया गया है कि ये आम इस्तेमाल वाले प्रिजर्वेटिव्स कई तरह के कैंसर और टाइप 2 डायबिटीज़ के खतरे को बढ़ाते हैं. अध्ययन की वरिष्ठ लेखिका मैथिल्ड टुविएर ने कहा कि इन प्रिज़र्वेटिव्स का इस्तेमाल दुनिया भर में किए जाते हैं. इस अध्ययन को 2009 में शुरू किया गया था. इसमें 1.7 लाख से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया. टुविएर ने कहा कि ये दुनिया की पहली दो स्टडीज़ हैं, जो इन फूड एडिटिव्स के संपर्क और कैंसर व टाइप 2 डायबिटीज़ के बीच संबंधों को दर्शाती है. इसलिए हमें इस संदेश को लेकर बेहद सतर्क रहना चाहिए. हालांकि अभी इन नतीजों की पुष्टि होना अभी बाकी है.
प्रिज़र्वेटिव्स से कैंसर के संबंध
यह अध्ययन बीएमजे (BMJ) जर्नल में प्रकाशित हुआ. इस अध्ययन में 58 तरह के प्रिज़र्वेटिव्स के प्रभाव का गहराई से विश्लेषण किया गया. 14 साल तक प्रिजर्वेटिव्स लेने वाले लोगों को फॉलो किया गया. जिन लोगों ने सबसे ज़्यादा प्रिज़र्वेटिव युक्त खाद्य पदार्थ खाए थे उनकी तुलना उन लोगों से की गई जिन्होंने सबसे कम सेवन किया था. शोधकर्ताओं ने उन 17 प्रिज़र्वेटिव्स पर विशेष रूप से गहन अध्ययन किया, जिनका सेवन कम से कम 10 प्रतिशत प्रतिभागियों द्वारा किया जाता था. इनमें से 11 का कैंसर से कोई संबंध नहीं पाया गया. हालांकि, जिन 6 प्रिज़र्वेटिव्स का संबंध कैंसर से पाया गया, उन्हें अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन सुरक्षित माने जाने वाले प्रिजर्वेटिव्स में रखा है. इनमें सोडियम नाइट्राइट, पोटैशियम नाइट्रेट, सॉर्बेट्स, पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट, एसीटेट्स और एसीटिक एसिड शामिल हैं.
प्रोसेस्ड मीट से सबसे ज्यादा खतरा
सोडियम नाइट्राइट को आमतौर पर बेकन, हैम और डेली मीट जैसे प्रोसेस्ड मीट में इस्तेमाल किया जाता है. इस अध्ययन में पाया गया कि इन चीजों का सेवन करने वालों में प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम में 32% अधिक होता है. वहीं पोटैशियम नाइट्रेट ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम में 22% बढ़ाता है. वहीं इन चीजों का सेवन करने वालों में सभी प्रकार के कैंसर के जोखिम में 13% बढ़ जाता है. डब्ल्यूएचओ ने पहले ही चेतावनी दी है कि लंबे समय तक प्रोसेस्ड मीट का सेवन कैंसर का कारण हो सकता है. इसका सीधा संबंध कोलन कैंसर से बताया गया है. सॉर्बेट्स प्रिजर्वेटिव्स खासतौर पर पोटैशियम सॉर्बेट ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम में 26 प्रतिशत बढ़ाता है. पोटैशियम सॉर्बेट पानी में घुलनशील लवण होते हैं, जिनका उपयोग वाइन, बेकरी उत्पादों, चीज और सॉस में फफूंद, यीस्ट और कुछ बैक्टीरिया को रोकने के लिए किया जाता है.
टाइप 2 डायबिटीज़ और प्रिज़र्वेटिव्स
टाइप 2 डायबिटीज़ पर किए गए अध्ययन में 1.09 लाख लोगों को शामिल किया गया. इन लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे 17 प्रिज़र्वेटिव्स की जांच की गई, उनमें से 12 का संबंध टाइप 2 डायबिटीज़ से था. यानी जिन लोगों ने इन 17 प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल ज्यादा किया उनमें टाइप 2 डायबिटीज का खतरा 50 फीसदी ज्यादा था. वहीं पोटैशियम सॉर्बेट, पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट, सोडियम नाइट्राइट, एसीटिक एसिड और सोडियम एसीटेट का इस्तेमाल करने वालों में इसका खतरा सबसे ज्यादा पाया गया. दूसरी कैल्शियम प्रोपियोनेट से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा 42 प्रतिशत ज्यादा पाया गया. कैल्शियम प्रोपियोनेट सफेद पाउडर होता है और इसका इस्तेमाल फफूंद और बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकने के लिए किया जाता है.



