भ्रष्टाचार पर ज्ञान देने के 1 घंटे बाद ही पलट गया था राजस्थान का यह DSP, पढ़ें रिश्वतखोरी का अजब-गजब केस

जयपुर. 9 दिसंबर 2020 को अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निवारण दिवस के मौके पर राजस्थान के सवाई माधोपुर में एक ऐसा ड्रामा हुआ था, जिसने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया था. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के डिप्टी एसपी भैरूलाल मीणा ने सुबह अपने ही दफ्तर में आयोजित समारोह में मंच संभाला. खाकी वर्दी, चमचमाती नेमप्लेट, हाथ में माइक थामी और उन्होंने जोर-शोर से भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगाई. उन्होंने कहा “भारत को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का संकल्प लें. कोई भी सरकारी कर्मचारी घूस मांगे तो तुरंत टोल-फ्री नंबर 1064 पर शिकायत दर्ज करें. ईमानदारी ही राष्ट्र की असली ताकत है.” उनके इस भाषण की तारीफें हुई. लोग कहने लगे “ACB DSP ने दिखाया भ्रष्टाचार के खिलाफ दम”. लेकिन किसे पता था कि यही DSP ठीक एक घंटे बाद उसी दफ्तर के अपने कमरे में 80 हजार रूपये की मासिक रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाएंगे.
घटना की शुरुआत सुबह 10 बजे हुई. ACB कार्यालय में अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार दिवस मनाया जा रहा था. DSP भैरूलाल मीणा मुख्य वक्ता थे. कोटा की आकाशवाणी कॉलोनी के रहने वाले मीणा सवाई माधोपुर में स्पेशल ब्रांच (SB) चौकी प्रभारी के तौर पर तैनात थे. रिटायरमेंट में महज दो साल बाकी थे. भाषण के दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीतियों की तारीफ की और आमजन से अपील की कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएं. उनके इस ओजस्वी भाषण को सुनकर मौजूद अधिकारी-कर्मचारी गदगद हो गए. कुछ ने तो मोबाइल पर रिकॉर्डिंग भी शुरू कर दी. लेकिन ठीक 11:05 बजे तस्वीर पलट गई.
ACB ने गुप्त सूचना पर ऐसे बिछाया था जाल
ACB के महानिदेशक बीएल सोनी को गुप्त सूचना मिली थी कि DSP भैरूलाल मीणा विभिन्न विभागों से मासिक रिश्वत वसूल रहे हैं. सूचना का सत्यापन करवाया गया तो पुख्ता सबूत मिले. इसके बाद जयपुर से ACB की स्पेशल ट्रैप टीम रवाना हुई. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ के नेतृत्व में 8 सदस्यीय टीम ने सवाई माधोपुर पहुंचकर जाल बिछाया. शिकायतकर्ता की भूमिका में जिला परिवहन अधिकारी (DTO) महेशचंद शर्मा को तैयार किया गया. तय प्लान के मुताबिक DTO महेशचंद DSP के कार्यालय पहुंचे. मीणा अपने केबिन में अकेले थे. DTO ने मेज पर 80 हजार रूपये का लिफाफा रखा और कहा, “सर, इस महीने का हो गया.” DSP ने लिफाफा उठाया, गिना और जेब में रख लिया.
मासिक रिश्चत लेते थे ACB के डीएसपी
बस, यही वो पल था. दरवाजा धड़ाम से खुला और ACB टीम ने छापा मार दिया. DSP के हाथ पर केमिकल पाउडर छिड़का गया, जो नोटों के संपर्क में आते ही चमक उठा.इसके बाद लिफाफा जब्त कर लिया गया और दोनों अधिकारी DSP भैरूलाल मीणा और DTO महेशचंद शर्मा हथकड़ी में नजर आने लगे. पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह मासिक रिश्वत का सिलसिला पिछले कई महीनों से चल रहा था. DSP विभिन्न विभागों के अधिकारियों से ‘मंथली’ वसूलते थे और बदले में उनके अवैध कार्यों को नजरअंदाज करते थे. DTO महेशचंद सवाई माधोपुर में करीब डेढ़ साल से तैनात थे, जबकि DSP एक साल से ज्यादा समय से पदस्थ थे.
राजस्थान पुलिस के गलियारों में आज भी है चर्चा का विषय
उस दौरान ACB महानिदेशक बीएल सोनी ने प्रेस को बताया था कि “हमें विश्वसनीय सूचना मिली थी कि DSP साहब नियमित रूप से रिश्वत लेते हैं. हमने सत्यापन करवाया और ट्रैप लगाया. दोनों को रंगे हाथों पकड़ा गया. यह हमारे लिए भी शर्मनाक है, लेकिन कानून सबके लिए बराबर है.” गिरफ्तारी के बाद दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. यह खबर जैसे ही बाहर आई, पूरे राजस्थान में हड़कंप मच गया. आज, पांच साल बाद भी यह मामला कोर्ट में लंबित है. DSP भैरूलाल मीणा रिटायर हो चुके हैं. DTO महेशचंद का ट्रांसफर हो चुका है. लेकिन सवाई माधोपुर का यह कांड राजस्थान पुलिस के गलियारों में आज भी चर्चा का विषय है. नए अधिकारियों को ट्रेनिंग के दौरान यह उदाहरण दिया जाता है कि भाषण देने से पहले जेब चेक कर लो.



