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ये है थार का काला शहंशाह! स्पेन से उड़कर जैसलमेर पहुंचे शिकारी पक्षी, 7 किमी दूर से देख लेते हैं भोजन

जैसलमेर. रेत के समंदर में पहली बार 300 से ज्यादा शिकारी गिद्ध हिमालय की ऊंची चोटियों को पार कर जैसलमेर पहुंचे हैं. सर्दियों की दस्तक के साथ स्पेन, दक्षिण यूरोप, तिब्बत, तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान जैसे ठंडे देशों से उड़ान भरकर ये गिद्ध अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमाएं लांघते हुए स्वर्णनगरी की धरती पर उतरे हैं.  पहली बार बड़ी तादाद में शिकारी गिद्ध हिमालय की ऊंची बर्फीली चोटियों को पार कर जैसलमेर पहुंचे हैं.

सर्द मौसम की शुरुआत के साथ ही इन प्रवासी पक्षियों ने मध्य एशिया के ठंडे इलाकों से लंबी उड़ान भरकर स्वर्ण नगरी को अपना अस्थायी बसेरा बनाया है. जैसलमेर पहुंचे सिनेरियस गिद्ध और यूरेशियन गिद्ध आमतौर पर ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और आस-पास के बर्फीले पहाड़ी क्षेत्रों में पाए जाते हैं. सर्दियों में भोजन और अनुकूल तापमान की तलाश में ये गिद्ध अपनी भौगोलिक सीमाएं पार कर भारत के पश्चिमी रेगिस्तानी इलाकों तक पहुंचते हैं.

पर्यावरण के लिए शुभ संकेत माने जाते हैं शिकारी गिद्ध

सिनेरियस और यूरेशियन गिद्धों की इतनी बड़ी संख्या में मौजूदगी ने पर्यावरण प्रेमियों और पक्षी विशेषज्ञों में खासा उत्साह भर दिया है. गिद्धों को पर्यावरण का सफाईकर्मी माना जाता है. मृत पशुओं के अवशेषों को खाकर ये संक्रमण और बीमारियों को फैलने से रोकते हैं. पिछले कुछ दशकों में भारत में गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट आई थी, लेकिन अब जैसलमेर जैसे क्षेत्रों में इनकी बढ़ती मौजूदगी को पर्यावरण संतुलन और संरक्षण प्रयासों की सफलता के रूप में देखा जा रहा है.

जैसलमेर बना सुरक्षित प्रवास स्थल

वन्यजीव प्रेमी सुमेर सिंह सांवता ने लोकल 18 को बताया कि जैसलमेर में खुले इलाके, कम मानवीय हस्तक्षेप और भोजन की उपलब्धता के कारण यह क्षेत्र प्रवासी गिद्धों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह पहली मर्तबा है जब स्वर्ण नगरी के देगराय ओरण में एक साथ 300 से अधिक शिकारी गिद्ध पहुंचे है.

सिनेरियस गिद्ध की ये है पहचान

सिनेरियस गिद्ध जिसे ‘मोंक वल्चर’ या ‘ब्लैक वल्चर’ भी कहा जाता है. अपनी राजसी बनावट के लिए जाना जाता है. इस पक्षी का पंख फैलाव करीब 3 मीटर (10 फीट) तक होता है. जब यह आसमान में पंख फैलाकर उड़ता है तो किसी छोटे ग्लाइडर जैसा नजर आता है. इसका पूरा शरीर गहरे भूरे या काले रंग का होता है. इसकी चोंच इतनी मजबूत होती है कि यह मृत मवेशियों की सबसे सख्त खाल को भी आसानी से फाड़ सकता है.

5-7 किमी दूर जमीन पर पड़े भोजन को पहचान लेता है गिद्ध

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने इसे संकट के करीब श्रेणी में रखा है. जबकि यूरेशियन ग्रिफन पक्षी बहुत सामाजिक होते हैं और अक्सर बड़े समूहों में उड़ते हैं. इनकी नजर इतनी तेज होती है कि 5-7 किलोमीटर की ऊंचाई से भी ये जमीन पर पड़े भोजन को पहचान लेते हैं. इनकी गर्दन लंबी और सफेद रोएं से ढकी होती है जबकि शरीर का बाकी हिस्सा रेतीले या हल्के भूरे रंग का होता है.

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