यह सियासत है जनाब, बड़ा अजब गजब है इसका मिजाज, यहां समय की नजाकत पर टिकी होती है दोस्ती और दुश्मनी

Last Updated:January 07, 2026, 12:57 IST
Jaisalmer Congress Politics : जैसलमेर कांग्रेस की राजनीति एक बार फिर से करवट ले रही है. नए साल में जैसलमेर कांग्रेस के दोनों गुट एक साथ एक मंच पर आ गए हैं! पश्चिमी राजस्थान की कांग्रेस की राजनीति में आया यह बदलाव चर्चा का विषय बना हुआ है. यहां कांग्रेस के दो ध्रुव माने जाने वाले गाजी फकीर परिवार और पूर्व विधायक रूपाराम धनदेव की नए साल पर एक मंच पर उपस्थिति एकता का संदेश दे रही है.
फकीर परिवार का जैसलमेर की राजनीति में जबर्दस्त दबदबा रहा है.
जैसलमेर. राजस्थान की सियासत में ‘मरुधरा की राजनीति’ का मिजाज कब करवट ले ले कहना मुश्किल होता है. पश्चिमी राजस्थान में भारत-पाकिस्तान के बॉर्डर पर बसे जैसलमेर और बाड़मेर की राजनीति अक्सर सुर्खियों में रहती है. कभी अपनों की ‘अपनों’ से लड़ाई के चलते तो कभी नेता विशेष के कारण. जैसलमेर की राजनीति में बीते पांच बरसों से कांग्रेस साफ तौर पर दो खेमों में बंटी हुई थी. फकीर परिवार (पूर्व मंत्री सालेह मोहम्मद और वर्तमान जिलाध्यक्ष अमरदीन फकीर का परिवार) और रूपाराम धनदेव इसके दो ध्रुव थे. लेकिन नए साल के आगाज के साथ ही इसमें बदलाव देखा जा रहा है. कांग्रेस के नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति के बाद बदलाव की बयार देखने को मिल रही है. राजनीति के जानकारों का अनुभव बताता है कि सियासत में ना तो कभी कोई स्थाई दोस्त होता है और ना ही कोई स्थाई दुश्मन. सबकुछ समय की नजाकत पर निर्भर करता है. कुछ ऐसा ही जैसलमेर में होता दिखाई दे रहा है.
जैसलमेर में सोमवार रात जो कुछ हुआ उसने सरहदी जिले की राजनीति को फिर से चर्चा में ला दिया. मौका था जैसलमेर कांग्रेस के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष अमरदीन फकीर के 39वें जन्मदिन का. एक निजी होटल में आयोजित इस जन्मदिन समारोह में कांग्रेस के दोनों धड़ों समेत इलाके के कई और बड़े नेता मौजूद रहे. केक कटे और बधाइयों का दौर चला. फिर संगीत की धुनों पर ऐसा नजारा दिखा जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी. अमरदीन फकीर जैसलमेर कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद के सगे भाई हैं.
कांग्रेस की राजनीति फकीर परिवार के इर्दगिर्द घूमती रही हैये इलाके में मुस्लिम समाज के धर्मगुरु रहे गाजी फकीर के बेटे हैं. फकीर परिवार का जैसलमेर की राजनीति में जबर्दस्त दबदबा रहा है. इस लंबे चौड़े परिवार से कैबिनेट मंत्री समेत जिला प्रमुख, प्रधान, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य चुने जाते रहे हैं. बाद में इस परिवार को रूपाराम धनदेव ने राजनीतिक चुनौती दी तो कांग्रेस दो धड़ों में बंट गई. लेकिन कांग्रेस की राजनीति यहां फकीर परिवार के इर्दगिर्द घूमती रही है.
कांग्रेस नेता बोले- कोई फूट नहीं सब एकजुट हैंकार्यक्रम औपचारिक जन्मदिन समारोह से आगे बढ़कर राजनीतिक संदेश का मंच बन गया. अमरदीन फकीर के जन्मदिन पर 39 केक काटे गए. नेताओं ने इसे सिर्फ उत्सव नहीं बल्कि आने वाले चुनावों की तैयारी का संकेत बताया. मंच से साफ कहा गया कि कांग्रेस में अब किसी तरह की फूट नहीं है. सभी नेता एकजुट हैं और संगठन को मजबूत करने के लिए साथ चलेंगे.
पूर्व विधायक रूपाराम धनदेव जमकर थिरकेसमारोह के दौरान होटल में जैसे ही संगीत शुरू हुआ तो पूर्व विधायक रूपाराम धनदेव खुद को रोक नहीं पाए. उनके डांस करते ही माहौल हल्का और उत्साहपूर्ण हो गया. यह सीन मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड हुआ जो बाद में सोशल मीडिया पर सामने आया. यह वीडियो इसलिए भी ज्यादा चर्चा में है क्योंकि इससे पहले 31 दिसंबर की रात का धनदेव का एक डांस वीडियो पहले ही वायरल हो चुका है. अब जन्मदिन समारोह से जुड़ा यह दूसरा वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में इसकी अलग-अलग व्याख्या की जा रही है.
39 केक काटे गएडांस के दौरान पूर्व मंत्री हरीश चौधरी और पूर्व अल्पसंख्यक मामलात मंत्री सालेह मोहम्मद तालियां बजाते नजर आए. एक ही जाजम पर बैठे नेताओं की यह तस्वीर उन चर्चाओं का जवाब मानी जा रही है जिनमें जैसलमेर कांग्रेस को बंटी हुई बताया जाता रहा है. कार्यक्रम में मौजूद नेताओं ने साफ संकेत दिया कि संगठन के भीतर अब पुराने मतभेद पीछे छूट चुके हैं. 39 केक काटे जाने को भी प्रतीकात्मक बताया गया.
आपसी खींचतान का पार्टी को भुगतना पड़ा था खामियाजानेताओं ने कहा कि यह सिर्फ जन्मदिन नहीं बल्कि 2026 के पंचायत और निकाय चुनाव तथा 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी का संकेत है. संदेश सीधा था कांग्रेस अब एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरेगी. जैसलमेर कांग्रेस लंबे समय तक दो धड़ों में बंटी रही है. फकीर परिवार का खेमा और धनदेव परिवार का खेमा. पिछले चुनावों में इस आपसी खींचतान का नुकसान पार्टी को उठाना पड़ा था. लेकिन जन्मदिन समारोह में दोनों गुटों के नेताओं की एक मंच पर मौजूदगी को बदले हुए हालात के तौर पर देखा जा रहा है.
अमरदीन फकीर को लेकर सवाल उठ रहे थेजिलाध्यक्ष बनने के बाद अमरदीन फकीर को लेकर सवाल उठते रहे हैं कि क्या वे दोनों गुटों को साथ ला पाएंगे. लेकिन सोमवार रात का आयोजन और वहां दिखी तस्वीरें इस दिशा में उनकी सफलता के तौर पर देखी जा रही है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे संगठन को मजबूती मिल सकती है. कार्यक्रम में जैसलमेर के साथ-साथ बाड़मेर जिले की राजनीति की झलक भी दिखी. पूर्व मंत्री हरीश चौधरी, पूर्व मंत्री शाले मोहम्मद, बाड़मेर जिलाध्यक्ष लक्ष्मण गोदारा, जिला प्रमुख महेंद्र चौधरी आदि नेताओं की मौजूदगी ने आयोजन को राजनीतिक रूप से और अहम बना दिया.
About the AuthorSandeep Rathore
संदीप राठौड़ ने वर्ष 2000 में भास्कर सुमूह से पत्रकारिता की जयपुर से शुरुआत की. बाद में कोटा और भीलवाड़ा में राजस्थान पत्रिका के रेजीडेंट एडिटर की जिम्मेदारी निभाई. 2017 से के साथ नए सफर की शुरुआत की. वर…और पढ़ें
Location :
Jaisalmer,Jaisalmer,Rajasthan
First Published :
January 07, 2026, 12:57 IST
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यह सियासत है जनाब, बड़ा अजब गजब है इसका मिजाज, यहां मौका ही सबकुछ होता है



