This unique family has been preserving the musical instruments of its ancestors for 20 generations.

Agency: Rajasthan
Last Updated:February 10, 2025, 14:26 IST
Jaipur News: जयपुर डागर घराने की 20वीं पीढ़ी के दो भाई-बहन सबाना डागर और इमरान डागर जिन्होंने अपने पूर्वजों के 500 साल पुरानी चीजों को संभालकर रखा हैं. जहां एक ही परिवार के पद्मश्री और पद्मभूषण कलाकारों के हाथो…और पढ़ेंX

डागर आर्काइव में मौजूद 200 वर्ष पुराना डागर घराने का तानपुरा.
राजस्थान अपनी कला संस्कृति और ऐतिहासिक इतिहास के रूप में दुनियाभर में जाना जाता है. यहां के किलें महल जितने खास हैं. उतने ही यहां के म्यूजियम में अपनी अलग पहचान रखते हैं. जहां वर्षों पुरानी एंटीक चीजें रखी हुई हैं. ऐसे ही जयपुर ध्रुवपद संगीत का सबसे पुराना घराना जहां आज भी 200 वर्षों पुराने ध्रुवपद के तानपुरे और एंटीक चीजों को संभालकर रखा हैं. जयपुर डागर घराने की 20वीं पीढ़ी के दो भाई-बहन सबाना डागर और इमरान डागर जिन्होंने अपने पूर्वजों के 500 साल पुरानी चीजों को संभालकर रखा हैं.
जिन्हें देखने के लिए दूर-दूर से आते हैं. जयपुर के रविन्द्र मंच की दूसरी मंजिला पर डागर घराने का का अनोखा आर्काइव बना हुआ हैं. जहां एक ही परिवार के पद्मश्री और पद्मभूषण कलाकारों के हाथों से बजाएं संगीत के वाद्ययंत्र संजो कर रखे हैं. इस आर्काइव में डागर घराने के संगीत रत्नाकर और पद्म भूषण उस्ताद अल्लाबंदे रहीमुद्दीन खान डागर सहित सभी डागर घराने के ध्रुवपद संगीत के सितारों का इतिहास मौजूद हैं. इस अनोखे आर्काइव में राजा महाराजाओं के जमाने की उपाधियां और अन्य ऐसी बेशकिमती चीजें हैं. जो अब इतिहास के रूप में देखी जाती हैं.
200 साल पुराना अनोखा तानपुरा डागर घराने की सबाना डागर बताती हैं कि डागर आर्काइव में वैसे तो सभी चीजें एंटीक हैं लिए लेकिन यहां रखें ध्रुवपद के अनोखे तानपुरे जो वर्षों पुराने हैं, जिन्हें एक ही पीढ़ी के कई लोगों ने संगीत में उपयोग किया और पद्मश्री पुरस्कार जीतें. आज भी आर्काइव में रखे इन किमती वाद्ययंत्रों को देखने के लिए स्टूडेंट्स दूर-दूर से आते हैं. सबाना डागर बताती हैं आर्काइव में रखे ये बेहतरीन तानपुरे राजाओं के समय में तैयार किए गए थे.आपको बता दें डागर घराने का इतिहास राजा महाराजाओं के समय से चला आ रहा है. राजस्थान के अलग-अलग राज घराने जिनमें विशेष रूप से उदयपुर, अलवर और जयपुर के घराने में अपनी ध्रुवपद संगीत की कला से वर्षों तक इन तानपुरों ने अपनी धुन से लोगों को अनोखा संगीत सुनाया, सबान डागर बताती हैं. हमारे पास मौजूद तानपुरे वाद्ययंत्रों का कोई कागजी प्रमाण नहीं हैं लेकिन आज भी इनकी किमत लाखों में हैं.
हाथी दांत और बारिक कढ़ाई से बने हैं तानपुरे सबाना डागर बताती हैं पुराने समय में संगीत के जितने भी वाद्ययंत्र बनते थें. वह बेहद सुंदर और बेशकीमती होते हैं. ऐसे ही हमारे पूर्वजों के वर्षों पुराने तानपुरे जिनपर हांथी दांत की बारिक कढ़ाई की गई हैं साथ ही तानपुरे में अनोखी डिजाइन और मजबूती से तैयार किए गए हैं. इसलिए आज भी वर्षों बाद इनकी चमक और धुन वैसी की वैसी हैं. सबाना डागर बताती हों कि आज ध्रुवपद के लिए विशेष रूप से आगरा में तानपुरे तैयार होते हैं. लेकिन, उनकी डिजाइन इन वर्षों पुराने तानपुरे से बिल्कुल अलग हैं.
Location :
Jaipur,Rajasthan
First Published :
February 10, 2025, 14:26 IST
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200 वर्षों पुराने ध्रुवपद के अनोखे तानपुरे,बजाकर जीते कई कलाकारों ने पद्मश्री



