इस साल कजरी तीज पर बन रहा है ‘सौभाग्यवती योग’ पंडित जी से जान लें शुभ मुहूर्त…पूजा विधि, This year, Saubhagyavati Yoga is being formed on Kajri Teej, know the auspicious time, puja method from Pandit

जालौर : राजस्थान में सावन के बाद भाद्रपद माह में कजरी तीज मनाई जाती है. इस साल को 22 अगस्त कज्जली तीज एवं संकट चतुर्थी व्रत मनाया जायेगा. दोनों एक साथ होने से यह व्रत विशेष ‘सौभाग्यवती योग’ बनता है. शादीशुदा महिलाएं हर साल अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए करवा चौथ, हरतालिका तीज, हरियाली तीज, वट सावित्री आदि जैसे कई व्रत रखती हैं. इनमें पति की लम्बी उम्र, बेहतर स्वास्थ और तरक्की के लिए किए जाने वाला कजरी तीज एक प्रमुख व्रत हैं.
कजली तीज, बूढ़ी तीज, बड़ी तीज, और सातूड़ी तीज आदि जैसे नामों से भी जाना जाता है. महिलाओं द्वारा इस दिन पूरे दिन सिर्फ पानी पीकर उपवास किया जाता है. शाम को तलाई पूजा करने के बाद चंद्रदेव के दर्शन के बाद सत्तू, ऋतुफल परोसकर व्रत खोलती हैं.
कज्जली तीज विशेषांकजालौर के ज्योतिषाचार्य पंडित भानु प्रकाश दवे ने लोकल 18 को बताया कि 22 तारीख कजली तीज पर बन रहा है सौभाग्यवती योग…भाद्रपद कृष्ण पक्ष तृतीया गुरुवार, 22 अगस्त को कजली तीज एवं संकट चतुर्थी व्रत मनाया जायेगा. दोनों एक साथ होने से यह व्रत विशेष सौभाग्यवती योग बनाता है. चंद्र दर्शन इस समय रात्रि 9.03 बजे से रहेगा.
भारत के सभी वैदिक विद्वानों ने एकमत से यह निर्णय लिया है जिन पंचांगों में गलती से मानवीय भूलवश दिनांक 21 अगस्त 2024 को कजली तीज लिखा है उसे स्वीकार न करते हुए, त्रुटि को सुधारते हुए बिना किसी भ्रम में आयें 22 अगस्त 2024 को ही कजली तीज व्रत शास्त्रीय सम्मत माना जायेगा.क्या रात्रि में चतुर्थी युक्त कज्जली तीज होने पर व्रत मना सकते हैं?कजली तीज व्रत के संदर्भ में यह मान्यता है कि यदि व्रत के दिन रात में चतुर्थी तिथि पड़ रही हो, तो चंद्रमा के दर्शन और पूजन करना उचित होता है. भाद्रपद के कृष्ण पक्ष में कजली तीज मनाई जाती है और इस दिन चंद्रमा का पूजन और अर्घ्य देने का विशेष महत्व होता है. यदि तीज के दिन रात में चतुर्थी का योग हो, तो व्रतधारी महिलाएं चंद्रमा का पूजन कर सकती हैं और अर्घ्य देकर व्रत पूरा कर सकती हैं.
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FIRST PUBLISHED : August 20, 2024, 21:53 IST