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पशुपालन का शुरू कर रहें हैं बिजनेस, दूध देने वाली इस नस्ल का जरूर करें पालन

Last Updated:December 05, 2025, 15:11 IST

Animal husbandry : राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में थारपारकर गाय कम खर्च में ज्यादा दूध देती है, देखरेख आसान है और बाजार में दूध की मांग भी अच्छी रहती है, जिससे पशुपालकों को मुनाफा होता है.bhilwara

भीलवाड़ा – पशुपालन का व्यवसाय आज के टाइम पर चाहें शहरी हो या ग्रामीण क्षेत्र, लोगों के लिए इनकम का मजबूत साधन बनता जा रहा है. खासतौर पर राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में जहां खेती के साथ-साथ पशुपालन परंपरागत पेशा रहा है वहां दूध देने वाली अच्छी नस्ल की गाय पालकर किसान और पशुपालक अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. अगर कोई पशुपालक कम खर्च में ज्यादा दूध उत्पादन चाहता है और देखरेख भी आसान हो, तो उसके लिए थारपारकर नस्ल की गाय सबसे बेहतर विकल्प मानी जाती है.

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थारपारकर गाय मूल रूप से राजस्थान और सिंध क्षेत्र की प्रसिद्ध नस्ल है. यह गाय गर्म और शुष्क जलवायु को आसानी से सहन कर लेती है, इसलिए राजस्थान जैसे राज्य में इसका पालन करना बेहद आसान है. इस नस्ल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सामान्य चारे पर भी अच्छा दूध देती है और बीमारियों का खतरा भी अन्य नस्लों की तुलना में कम रहता है.

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दूध उत्पादन की बात करें तो थारपारकर गाय औसतन प्रतिदिन 10 से 15 लीटर तक दूध देती है. अच्छी देखरेख और संतुलित आहार मिलने पर इसका दूध उत्पादन और भी बढ़ सकता है. इसके दूध में फैट की मात्रा अधिक होती है, जिससे घी , मक्खन और अन्य दुग्ध उत्पादों का उत्पादन भी बेहतर होता है. यही कारण है कि बाजार में इसके दूध की मांग भी अच्छी रहती है.

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देखरेख के मामले में यह नस्ल बेहद मजबूत मानी जाती है. इसे ज्यादा महंगे चारे या विशेष प्रबंधन की जरूरत नहीं होती. हरा चारा, सूखा भूसा और थोड़ा-सा दाना ही इसके लिए पर्याप्त होता है. गर्मी, सर्दी और बारिश हर मौसम में यह गाय आसानी से खुद को ढाल लेती है, जिससे पशुपालकों का इलाज और रख-रखाव पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाता है.

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खर्च की बात करें तो थारपारकर गाय पर अन्य विदेशी नस्लों की तुलना में बहुत कम लागत आती है. विदेशी गायों के लिए जहां संतुलित आहार, ठंडा वातावरण और नियमित पशु चिकित्सा जरूरी होती है, वहीं थारपारकर कम साधनों में भी अच्छा उत्पादन देती है. यही वजह है कि छोटे और मध्यम स्तर के पशुपालकों के लिए यह नस्ल काफी फायदेमंद साबित हो रही है.

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अगर कोई व्यक्ति कम पूंजी में पशुपालन का व्यवसाय शुरू करना चाहता है, तो उसे थारपारकर गाय से शुरुआत करनी चाहिए. इससे दूध का नियमित उत्पादन मिलेगा, बाजार में अच्छी बिक्री होगी और धीरे-धीरे पशुपालक अपनी आमदनी बढ़ा सकता है. सरकार की पशुपालन योजनाओं का लाभ लेकर इस नस्ल का पालन और भी फायदेमंद बनाया जा सकता है.

First Published :

December 05, 2025, 15:11 IST

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