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Tilkutta Halwa Jaipur Winter Special

Tilkutta Halwa Jaipur Winter Special: सर्दियों के शुरू होते ही जयपुर के विंटर फेयरों में लोगों की भीड़ बढ़ जाती है. ठंड के मौसम में लोग अपने खान-पान में शुद्धता और स्वाद को प्राथमिकता देते हैं. ऐसे में ड्राइफ्रूट लड्डू, गर्म मिठाइयां और खासकर राजा-महाराजाओं के समय का मुकाबलत करने वाला तिलकुट्टा हलवा सबसे अधिक पसंद किया जाता है. यह हलवा न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि तिल के कारण शरीर को गर्म रखने और आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करने में भी सहायक होता है. आज भी लोग पूरे साल इसके स्वाद के लिए इंतजार करते हैं.

तिलकुट्टा हलवा क्यों है खास?तिलकुट्टा हलवा राजस्थान की पारंपरिक मिठाई है जिसे पहले हाथों से तैयार किया जाता था. लेकिन समय के साथ इसे बड़ी मशीनों में बनाया जाने लगा है. इस हलवे के महत्वपूर्ण अवयव हैं—

तिल (Sesame Seeds)
देशी गुड़ (Jaggery)
खोपरा (Coconut)
ड्राई-फ्रूट्स

तिलहन से तेल निकालने वाली बड़ी घाणी मशीन में पहले तिल को कूटा जाता है. इसके बाद उसमें गुड़ की मिठास और खोपरे का स्वाद मिलाया जाता है. मशीन के जरिए तैयार किया गया यह हलवा पूरी तरह शुद्ध और मिलावट रहित होता है, जो इसकी लोकप्रियता का मुख्य कारण है.

चित्तौड़गढ़ से आते हैं विशेषज्ञ हलवाईलोकल-18 से बातचीत में चित्तौड़गढ़ के हलवाई भारत चौधरी बताते हैं कि तिलकुट्टा हलवा जयपुर में कम तैयार होता है. इसलिए वे हर साल सर्दियों में जयपुर आकर मेले में इसे लाइव तैयार करते हैं. उन्होंने बताया कि यह हलवा मेहनत और समय मांगने वाला होता है, इसलिए लोग मशीन-तैयार तिलकुट्टा ज्यादा पसंद करते हैं. यह प्रक्रिया ग्राहकों को शुद्धता का भरोसा भी दिलाती है.

हलवे की कीमत ₹250 प्रति किलो है, जिसे खरीदने के लिए मेले में लंबी लाइनें लगती हैं.

एक हलवा, दो फायदे — हलवे के साथ मिलता है शुद्ध तिल का तेलइस हलवे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बनाने की प्रक्रिया में 100% शुद्ध तिल का तेल भी निकलता है. ग्राहक हलवा खरीदते समय उसी घाणी मशीन से निकला शुद्ध तिल, सरसों, मूंगफली और सोयाबीन के तेल भी खरीदते हैं. आजकल बाजार में मिलावट के चलते लोग मशीन-निकाला कच्ची घाणी तेल ज्यादा पसंद कर रहे हैं, क्योंकि यह ताज़गी और शुद्धता की गारंटी देता है.

भारत चौधरी बताते हैं कि इस पारंपरिक पद्धति से तैयार हलवा और तेल की वजह से वे सर्दियों के मौसम में लाखों रुपये तक की कमाई कर लेते हैं. पुराने समय की यह तकनीक आज भी लोगों के लिए स्वाद और सेहत दोनों का भरोसा बनी हुई है.

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