दिन भर थकान और आंखों में धुंधलापन, इस साइलेंट किलर बीमारी के हो सकते हैं संकेत, तुरंत कराए जांच

Last Updated:January 01, 2026, 17:47 IST
Fatigue Blurry vision Diabetes: आमतौर पर लोग थकान को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन यदि आपको लगातार थकान रहती है और इसके साथ ही आपको हरदम देखने में धुंधलापन दिखाई देता है तो इसे मामूली मत समझिए. यह एक साइलेंट किलर बीमारी डायबिटीज का संकेत आ सकता है. आइए इसके बारे में डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. पारस अग्रवाल
आंखों में धुंधलापन को न समझें मामूली.
Fatigue Blurry vision Diabetes: डायबिटीज कभी भी अचानक शुरू नहीं होता. यह शरीर में पनपता रहता है और नाटकीय रुप से किसी दिन अचानक पहचान में आती है कि शुगर बढ़ गई है. कई लोग इन शुरुआती संकेतों को सामान्य उतार-चढ़ाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि वास्तव में शरीर काफी पहले से ही मेटाबॉलिक तनाव को झेलने लगता है. द लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, टाइप 2 डायबिटीज़ का पता चलने से लगभग 13 साल पहले ही इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने लगता है. ऐसे में शुरुआती संकेतों को पहचानना बहुत जरूरी हो जाता है. लेकिन सवाल यह है कि इन संकेतों को कैसे पहचानें. इसी सवाल का जवाब जानने के लिए न्यूज 18 ने मारेंगो एशिया अस्पताल में डायबिटीज डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. पारस अग्रवाल से बात की.
लगातार थकान के साथ आंखों का धुंधलापन
डॉ. पारस अग्रवाल ने बताया कि हां, डायबिटीज की कहानी बहुत पहले शरीर में सुलगने लगती है. इसकी शुरुआत बहुत धीमी होती है. इसलिए शुरुआत में इसे पहचानना काफी मुश्किल है लेकिन कुछ ऐसे मामूली संकेत हैं जिनकी मदद से हम इसे कोरिलेट कर सकते हैं. हमारे रोज़मर्रा के जीवन में कई ऐसी हेल्थ समस्याएं हैं जो शुरुआती मेटाबॉलिक गड़बड़ी का संकेत दे सकती . जैसे लगातार या बिना किसी स्पष्ट कारण के थकान, पैरों में झनझनाहट या जलन महसूस होना, आंखों से बार-बार धुंधला दिखाई देना, बार-बार इंफेक्शन होना, स्किन ड्राई या काला पड़ जाना या घावों का देर से भरना. ये समस्याएं अलग-अलग भी हो सकती हैं या एक-दूसरे के साथ मिलकर भी दिख सकती हैं. यही कारण है कि लोग इन समस्याएं को आम मान लेते हैं. डॉक्टर भी इस तरह की समस्याओं को कोरिलेट नहीं कर पाते जबकि इनका संबंध अक्सर शुरुआती ग्लूकोज़ असंतुलन से होता है. कई लोग लंबे समय तक बैठने के बाद हल्की नसों की परेशानी, बार-बार होने वाले फंगल रैश या छोटे-छोटे कटों के देर से भरने जैसी छोटी मोटी समस्याओं का भी ज़िक्र करते हैं. ये छोटे लेकिन अहम संकेत इंसुलिन रेज़िस्टेंस, सूक्ष्म रक्त-नलिकाओं की सूजन और शुरुआती पेरिफेरल न्यूरोपैथी से जुड़े हो सकते हैं. लेकिन जरूरत है इन चीजो को पकड़ने की. आमतौर पर डॉक्टर ही इस तरह के लक्षणों को कोरिलेट कर बता सकते हैं कि ये लक्षण भविष्य में डायबिटीज को जन्म दे सकते हैं या नहीं. क्योंकि तब तक जांच में शुगर लेवल सामान्य ही बना रहता है.
कार्डियोमेटाबॉलिक तनाव और थकान
डॉ. पारस अग्रवाल ने बताया कि जब शुरुआत में ग्लूकोज रेजिस्ट होता है तो ब्लड वैसल्स में लचीलापन की क्षमता को प्रभावित करता है. इससे हार्ट पर अतिरिक्त प्रेशर पड़ता है लेकिन शुगर लेवल डायबिटीज वाला नहीं होता. हार्ट पर प्रेशर के कारण हार्ट की क्षमता प्रभावित होती है. इस कारण सामान्य गतिविधियों के दौरान सांस फूलने की समस्याएं सामने आने लगती है. इसके साथ आराम के बावजूद थकान रहती है और सीढ़ियां चढ़ते समय या तेज चलने पर शरीर में भारीपन महसूस होने लगता है. ऐसे लक्षणों को अक्सर काम के बोझ, बढ़ती उम्र या नींद की कमी से जोड़ दिया जाता है, इसलिए इन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाता, जबकि ये अंदरुनी मेटाबॉलिक तनाव का संकेत हो सकते हैं.
फिर क्या करना चाहिए
डॉ. पारस अग्रवाल कहते हैं कि इन छोटे-छोटे संकेतों को पहचानने से ज्यादा बेहतर है कि आप यह कोशिश करें कि डायबिटीज हो ही नहीं, यदि हो भी तो उसका असर कम हो और प्री-डायबेटिक लेवल से आगे नहीं बढ़े. इसके लिए करना क्या होगा. इसके लिए सिर्फ आपको रोज एक्सरसाइज करनी है. कोशिश करें कि आधे से एक घंटे की एक्सरसाइज रोज करें. इसके अलावा संतुलित भोजन करें. मसलन शराब, सिगरेट, प्रोसेस्ड फूड, पैकेटबंद फूड, ज्यादा तली-भुनी चीजें न खाएं. इनकी जगह सिंपल अनाज से बने घर का भोजन करें. भोजन का आधा हिस्सा हरी सब्जियां और फलों से पूरा होना चाहिए. सीड्स, ड्राई फ्रूट्स आदि का सेवन करें. ज्यादा चीनी और ज्यादा नमक न खाएं. रोज सुकून भरी नींद लें और तनाव को मैनेज करें.
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First Published :
January 01, 2026, 17:47 IST
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दिन भर थकान और आंखों में धुंधलापन, इस साइलेंट किलर बीमारी के हो सकते हैं संकेत



