आज जहां युवा रील्स में खोया, वहां बाड़मेर की बेटी ने थामा संन्यास का रास्ता, 27 की उम्र में की दीक्षा गृहण

Last Updated:January 09, 2026, 12:54 IST
Barmer News Hindi : जहां आज का युवा मोबाइल और सोशल मीडिया की दुनिया में उलझा है, वहीं सरहदी बाड़मेर की 27 साल की बेटी दिव्या बोथरा ने संयम का कठिन मार्ग चुना. नौ वर्षों की तपस्या के बाद 16 जनवरी को दिव्या सांसारिक मोह-माया त्यागकर दीक्षा ग्रहण करेंगी. यह फैसला आज के दौर में मिसाल बन रहा है.
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बाड़मेर : एक तरफ जहां देश की आधी आबादी कही जाने वाले युवा सोशल मीडिया पर घण्टों बिता रही है और खुद को तेज दौड़ती जिंदगी में खपा चुकी है वहीं कुछ विरले ऐसे भी है जो तकनीक के इस दौर में खुद के हाथों में धर्म ध्वजा थामने को बेबस है. बीते 9 साल से संयम पथ पर जाने को आतुर बाड़मेर की बेटी को आगामी 16 जनवरी को उसकी जिंदगी का सबसे यादगार पल मिलने जा रहा है.
तेज रफ्तार जिंदगी, मोबाइल स्क्रीन और सोशल मीडिया की चकाचौंध से दूर सरहदी बाड़मेर की बेटी मुमुक्षु दिव्या बोथरा ने वह राह चुनी है जिस पर चलने का साहस आज के दौर में विरले ही कर पाते हैं. बीते 9 वर्षों से संयम पथ की तैयारी कर रही दिव्या को आगामी 16 जनवरी को जीवन का सबसे अविस्मरणीय क्षण मिलने जा रहा है जब वह सांसारिक मोह-माया त्यागकर दीक्षा ग्रहण करेंगी.
27 साल की मुमुक्षु दिव्या बोथरा 16 जनवरी को करेंगे दीक्षा ग्रहणबाड़मेर की 27 साल की मुमुक्षु दिव्या बोथरा गुजरात के सूरत के पर्वत पाटिया में आचार्य मनोज्ञ सागर और उपाध्याय मनित सागर के हाथों दीक्षा ग्रहण करेगी. महाराष्ट्र के ईचलकरंजी से बीकॉम कर चुकी दिव्या बोथरा बताती है कि उसे एक बार ड़ेंगू हुआ था और चिकित्सकों ने भी जवाब दे दिया था लेकिन चमत्कारिक रूप से दिव्या ठीक हो गई. दिव्या के लिए वह घटना जीवन के लिए बदलाव का सबसे बड़ा पल था.
पिता कपड़े के व्यापारी, इकलौती बेटी संयम पथ करेगी ग्रहणमहाराष्ट्र में कपड़े का व्यापार करने वाले सुरेश बोथरा की इकलौती बेटी दिव्या बताती है कि वह अब तक 5 हजार किलोमीटर का पैदल विहार कर चुकी है. मुमुक्षु दिव्या पालीताना, गिरनार, सम्मेत शिखर, शंखेश्वर और पावापुरी सहित दर्जन भर से ज्यादा की धार्मिक यात्राएं पैदल कर चुकी है. दिव्या की चाची ने भी तकरीबन 8 साल पहले संयम पथ अंगीकार किया था. क्रिकेट की नेशनल खिलाड़ी रह चुकी दिव्या बताती है कि उनके लिए सुलोचना श्री जी म.सा. आदर्श है. मुमुक्षु दिव्या बताती है कि आज जो युवा सोशल मीडिया पर अपना समय खपा रहे है वह सही मायने में अपने समय को खराब कर रहे है. आज के समय में धर्म की ध्वजा को थामना ही सबसे पुण्य का काम है.
9 जनवरी को राजस्थान से गुजरात के लिए होगी रवानावह बताती है कि 16 जनवरी के दिन का उसको बड़ी बेसब्री से इंतजार हैं. बाड़मेर में दिव्या की दीक्षा से पहले वर्षीदान का वरघोड़ा निकाला गया जिसमें भारी भीड़ उमड़ी नजर आई. दिव्या 9 जनवरी को राजस्थान से गुजरात के सूरत के लिए निकलेगी और 16 जनवरी को इस रंगीन चकाचोंध भरी दुनिया से दूर श्वेत वस्त्र की संयम धरा पर अपना कदम रखेंगी.
About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal
A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें
Location :
Barmer,Rajasthan
First Published :
January 09, 2026, 12:54 IST
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जहां युवा रील्स में खोया, वहां 27 की उम्र में बाड़मेर की बेटी ने चुना संन्यास



