Rajasthan

Udaipur Chef carves Aravali hills on Watermelon to spread awareness.

Last Updated:December 20, 2025, 07:57 IST

Save Aravali Campaign: उदयपुर के शेफ हर्षवर्धन ने तरबूज पर अरावली की पहाड़ियों की कार्विंग कर ‘सेव द अरावली’ मुहिम को समर्थन दिया है. सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिए उदयपुर में व्यापक जनआंदोलन शुरू हो गया है.

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Save Aravali Campaign: सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद अरावली पर्वतमाला के अस्तित्व को लेकर देशभर में चिंता गहराती नजर आ रही है. इसी कड़ी में झीलों की नगरी उदयपुर से ‘सेव द अरावली’ मुहिम ने जोर पकड़ लिया है. उदयपुर निवासी शेफ हर्षवर्धन ने अपनी अनोखी कला के जरिए इस अभियान को एक नया और रचनात्मक आयाम दिया है. उन्होंने एक तरबूज पर बेहद बारीक कार्विंग करते हुए अरावली की पहाड़ियों की सुंदर आकृति उकेरी है. इस कलाकृति के माध्यम से उन्होंने “सेव द अरावली, सेव द राजस्थान” का नारा देते हुए पर्यावरण संरक्षण की अपील की है.

दुनिया से भी पुरानी है अरावली का अस्तित्वशेफ हर्षवर्धन ने अरावली के ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह पर्वतमाला दुनिया की प्राचीनतम श्रेणियों में से एक है. उन्होंने इसे राजस्थान की ‘जीवनरेखा’ बताते हुए कहा कि अरावली केवल पत्थर के पहाड़ नहीं हैं, बल्कि ये जल संचयन, जैव विविधता और जलवायु संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. शेफ के अनुसार, अरावली को नुकसान पहुँचाने वाला कोई भी फैसला पर्यावरण के लिए घातक होगा और वे इस धरोहर को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार हैं.

सोशल मीडिया पर ‘डिजिटल वॉर’अरावली को बचाने की यह मुहिम सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. उदयपुर के विभिन्न इन्फ्लुएंसर्स वीडियो, पोस्ट और रील्स के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहे हैं. इन डिजिटल अभियानों का मुख्य उद्देश्य आम जनता तक अरावली के संरक्षण का महत्व पहुँचाना और सरकार तक सामूहिक आवाज पहुँचाना है. शेफ हर्षवर्धन की तरबूज कार्विंग वाली पोस्ट को सोशल मीडिया पर रचनात्मक विरोध का एक प्रभावी उदाहरण माना जा रहा है, जिसे हजारों लोग साझा कर रहे हैं.

जनआंदोलन की ओर बढ़ते कदमडिजिटल जागरूकता के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं. उदयपुर संभाग के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सड़कों पर उतरकर अरावली को बचाने की मांग शुरू कर दी है. कई स्थानों पर प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं और खनन गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की जा रही है. पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि अरावली के अवैध दोहन को नहीं रोका गया, तो आने वाली पीढ़ियों को जल संकट और पारिस्थितिक असंतुलन जैसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें

Location :

Udaipur,Udaipur,Rajasthan

First Published :

December 20, 2025, 07:57 IST

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‘सेव द अरावली’ मुहिम का नया अंदाज, उदयपुर के शेफ ने तरबूज पर उकेरी राजस्थान…

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