पौष माह की अनोखी परंपरा, साल में एक बार लगता है विशेष भोग, बालाजी को अर्पित किया गया 501 किलो

Last Updated:December 30, 2025, 12:23 IST
Poush Bada Mahotsav Bhilwara: भीलवाड़ा के श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर में पौष माह के तहत पौष बड़ा महोत्सव आयोजित किया गया. इस मौके पर बालाजी को 501 किलो पौष बड़ा का भोग अर्पित किया गया और प्रसाद वितरण किया गया. महंत बाबूगिरीजी महाराज ने बताया कि पौष माह हिंदू धर्म में भक्ति, संयम और पुण्य अर्जन का विशेष समय है. इस अवसर पर किए गए दान और धार्मिक क्रियाएं समाज और आस्था दोनों के लिए लाभकारी मानी जाती हैं.
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भीलवाड़ा. सर्दी का सीजन शुरू हो गया है, जहां एक तरफ ठंड के मौसम में लोग अपने शरीर को गर्म रखने के साथ इम्यून सिस्टम मजबूत करने के लिए विभिन्न तरह के व्यंजनों का सेवन करते हैं. ऐसा ही नजारा भीलवाड़ा के मंदिरों में भी देखने को मिल रहा है. विशेष तौर पर पौष माह के तहत भगवान की सेवा-अर्चना के विविध आयोजन किए जा रहे हैं. ऐसा ही दृश्य भीलवाड़ा के श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर में देखने को मिला, जहां अब तक का सबसे अधिक भोग भगवान को अर्पित किया गया.
भीलवाड़ा शहर के श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर में पौष माह के तहत पौष बड़ा महोत्सव का आयोजन किया गया. इस मौके पर बालाजी को विशेष चोला चढ़ाया गया. कार्यक्रम के दौरान बालाजी को 501 किलो पौष बड़ा का भोग लगाया गया. भोग अर्पण के बाद भक्तों को पौष बड़े के प्रसाद का वितरण किया गया, जिसे लेने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं.
पौष माह में भगवान विष्णु की पूजा का है विशेष महत्व
श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर के महंत बाबूगिरीजी महाराज ने बताया कि पौष माह के अंतर्गत पौष बड़ा महोत्सव का आयोजन किया गया है. इस अवसर पर भगवान को आलू बड़े, पकौड़ी और पौष बड़े का भोग अर्पित किया गया. बालाजी की महाआरती के बाद 501 किलो पौष बड़ा का भोग लगाया गया. इसके पश्चात पौष बड़े के प्रसाद का वितरण श्रद्धालुओं में किया गया. महंत बाबूगिरीजी महाराज ने बताया कि पौष माह हिंदू धर्म में भक्ति, संयम और पुण्य अर्जन का विशेष समय माना जाता है. इस माह में भगवान विष्णु और विभिन्न लोकदेवताओं की आराधना का विशेष महत्व होता है.
पौष माह में किए गए दान से बढ जाता है पुण्य
महंत बाबूगिरीजी महाराज ने बताया कि धार्मिक परंपरा के अंतर्गत पौष बड़े का आयोजन किया जाता है, जो आस्था और सेवा भाव का प्रतीक है. मान्यता है कि पौष माह में किए गए दान और धार्मिक कार्यों का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है. ठंड के मौसम में पौष बड़े जैसे सात्विक और पौष्टिक प्रसाद का वितरण समाज के सभी वर्गों को लाभ पहुंचाता है. यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का माध्यम भी है. मंदिरों में श्रद्धालु बड़ी संख्या में एकत्र होकर भगवान के दर्शन करते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं.About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
Location :
Bhilwara,Rajasthan
First Published :
December 30, 2025, 12:23 IST
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पौष माह की अनोखी परंपरा, साल में एक बार बालाजी को लगता है यह विशेष भोग



