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महिलाओं के मोबाइन बैन पर मचा बवाल, तुगलकी आदेश के बाद पलटी पंचायत, बोली- मानना या न मानना आपकी मर्जी

Last Updated:December 24, 2025, 13:54 IST

राजस्थान के जालोर जिले में इन दिनों चौधरी समाज की पंचायत का एक फैसला चर्चा में है. सुंधामाता पट्टी के 15 गांवों में महिलाओं और बच्चियों के स्मार्टफोन उपयोग पर रोक लगाने के निर्णय को लेकर समाज की ओर से सफाई सामने आई है. पंचायत का कहना है कि यह कदम महिलाओं-बच्चियों की सुरक्षा, बढ़ते साइबर क्राइम और बच्चों की आंखों पर मोबाइल के दुष्प्रभाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया था. मानना और न मानना आपका मर्जी है.

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जालोर. राजस्थान के जालोर जिले में सुंधामाता पट्टी के चौधरी समाज की पंचायत ने एक ऐसा ‘तानाशाही फरमान’ जारी किया, जो महिलाओं की आजादी पर सीधा हमला करने जैसा प्रतीत होता है. 15 गांवों की बहू-बेटियों को स्मार्टफोन इस्तेमाल करने से रोक दिया गया. कैमरे वाला फोन तो दूर, सार्वजनिक समारोहों, शादियों या पड़ोसी के घर तक मोबाइल ले जाना भी ‘हराम’ करार दे दिया. सिर्फ की-पैड फोन की ‘रियायत’ दी गई है, जैसे महिलाएं कोई पुरानी सदी की कैदी हों.

26 जनवरी 2026 से लागू होने वाले इस नियम के तहत महिलाएं सिर्फ पुराने की-पैड वाले फोन ही रख सकेंगी. इतना ही नहीं, शादी-विवाह, सार्वजनिक समारोह या पड़ोसी के घर जाते समय भी मोबाइल ले जाना ‘हराम’ करार दे दिया गया. पढ़ाई करने वाली लड़कियों को घर के अंदर सीमित छूट दी गई है, लेकिन बाहर की दुनिया से उन्हें पूरी तरह काटने की कोशिश की जा रही है. यह ‘फरमान’ गाजीपुर गांव की बैठक में सुनाया गया था. पंंच का यह फरमान आग की तरह फैल गया और विरोध के स्वर उठने लगे.

मानना न मानना आपकी मर्जी

पंच का यह तुगलकी फैसला बहस का शिकार बन गया है. लोगों ने इसे महिलाओं पर पाबंदी बताकर विरोध जताने लगे तो पंचायत के ‘महान पंच’ के तेवर भी नमर पड़ गए है.  पहले तो महिलाओं की जिंदगी पर कैंची चलाई, अब सफाई देते फिर रहे हैं कि “मानना न मानना आपकी मर्जी” है. सुंधामाता पट्टी के पंच हिमताराम चौधरी अब ‘समाजहित’ का राग अलाप रहे हैं.  पंच हिमताराम चौधरी ने इस निर्णय को समाजहित में लिया गया कदम बताया है. उनका कहना है कि वर्तमान समय में साइबर क्राइम के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और सोशल मीडिया पर कई तरह के गैंग सक्रिय हैं, जिनका शिकार अधिकतर महिलाएं, बच्चियां और गांवों के कम पढ़े-लिखे लोग बनते हैं.

स्मार्ट फोन से बच्चों की पढ़ाई होती है प्रभावित

पंच ने तर्क दिया था कि महिलाओं के पास स्मार्टफोन होने से बच्चे उसका अधिक इस्तेमाल करने लगते हैं, जिससे उनकी आंखों पर बुरा असर पड़ता है और पढ़ाई भी प्रभावित होती है. पंच हिमताराम ने साफ किया कि यह फैसला किसी पर थोपने के लिए नहीं है, बल्कि समाज की भलाई को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. अब उन्हें कौन समझाए कि स्मार्टफोन सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि शिक्षा, बैंकिंग, कौशल सीखने और आत्मनिर्भरता का जरिया है. घर बैठे सिलाई-कढ़ाई सीखकर महिलाएं कमाई कर रही हैं, लेकिन इस बैन से सब पर ब्रेक लग जाता.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

Location :

Jalor,Rajasthan

First Published :

December 24, 2025, 13:53 IST

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महिलाओं के मोबाइन बैन पर मचा बवाल, तुगलकी आदेश के बाद पलट गई पंचायत

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