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Last Updated:December 02, 2025, 17:38 IST

Dharohar: भीलवाड़ा की रहस्यमयी ‘उड़न छतरी’ जिले की प्रमुख धरोहरों में शामिल है. इसकी खास बनावट और ऊंचाई के कारण ऐसा प्रतीत होता है मानो यह हवा में तैर रही हो. इसी अनोखी संरचना के चलते इसे ‘उड़न छतरी’ नाम मिला. इतिहासकारों के अनुसार यह संरचना प्राचीन राजपूत वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण है जो आज भी रहस्य और आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.

भीलवाड़ा: भीलवाड़ा शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर उपनगर पुर की पहाड़ी पर स्थित उड़न छतरी आज भी भीलवाड़ा जिले की सांस्कृतिक विरासत और रहस्यमयी इतिहास की अनोखी पहचान मानी जाती है. चट्टान के प्राकृतिक स्वरूप से बनी यह छतरी दूर से ही किसी विशाल गुंबद की तरह दिखाई देती है, जो अपने नाम और मान्यताओं के कारण पर्यटकों के बीच खास आकर्षण बन चुकी है. स्थानीय लोगों का मानना हैं कि प्राचीन काल में यह उड़न छतरी आकाश मार्ग से होते हुए जा रही थी तभी एक संत महात्मा ने अपने तांत्रिक प्रभाव से इस उड़न छतरी को यहीं पर रोक लिया और यहां पर स्थापित कर दी.

जिसके चलते इसे ‘उड़न छतरी’ नाम मिल गया.  प्राकृतिक सौंदर्य , ऐतिहासिक धरोहर और पुर की गौरवशाली पहचान से जुड़ा यह स्थल आज भी पर्यटन प्रेमियों के दिलों में खास जगह रखता है.

भीलवाड़ा के उपनगर पर के रहने वाले शुभम शर्मा ने लोकल18 से खास बातचीत करते हुए बताया कि भीलवाड़ा के उपनगर पुर में स्थित उड़न छतरी अपनी अनोखी चट्टानी संरचना, ऐतिहासिक मान्यताओं और धार्मिक पहचानों के कारण जिले की धरोहर मानी जाती है. देवडूंगरी की ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह छतरी दूर से ही दिखाई देती है और इसे देखने के लिए स्थानीय लोग और पर्यटक दोनों पहुंचते हैं.

इसी स्थान पर अंतिम संस्कार किया गयाशुभम शर्मा ने बताया कि कहा जाता है कि 5 हजार साल पहले प्राचीन समय में यहां पर संत महात्मा अपनी साधना करते थे उस समय अभिमंत्रित होकर यह छतरी उड़कर यहां से जा रही थी तब यहां संत महात्मा की साधना में बाधा बन गई.  तभी संत ने तांत्रिक विद्या के प्रभाव से इसे इसी पहाड़ी पर उतार लिया. उनके निधन के बाद इसी स्थान पर अंतिम संस्कार किया गया और स्मृति में पत्थर का स्मारक स्थापित किया गया.

जिस पर विसं 1023 का वर्ष भी अंकित है. देवडूंगरी क्षेत्र में जैन श्वेतांबर समाज द्वारा निर्मित दो छतरियां, देवनारायण मंदिर, साधु–यातियों के कई मंदिर और प्राचीन अवशेष आज भी इतिहास की गवाही देते हैं. यहां एक चमत्कारिक साधु का किस्सा भी प्रचलित है, जिनकी उम्र का अंदाजा गांव के बुजुर्ग भी नहीं लगा पाए, और जिन्हें लोग वर्षों से समान रूप में देखते आ रहे थे. वे बड़ी गुफा में रहते थे, जो आज भी रोमांच और आकर्षण का केंद्र मानी जाती है.

उड़न छतरी के आसपास फैला प्राकृतिक सौंदर्य, झीलों का विस्तार और पहाड़ी संरचनाएं इस स्थान को सर्दियों और छुट्टियों में घूमने के लिए बेहतरीन पिकनिक स्पॉट बनाती हैं.

Jagriti Dubey

With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion, career, politica…और पढ़ें

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Location :

Bhilwara,Rajasthan

First Published :

December 02, 2025, 17:38 IST

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धरोहर: भीलवाड़ा घूमने जा रहे हैं? इस अनोखी उड़न छतरी को मिस न करें

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