Rajasthan

सिरोही का सारणेश्वर महादेव मंदिर बना पवित्र धाम, 1 किमी दायरे में मांस-मदिरा पर पूर्ण प्रतिबंध

Last Updated:July 10, 2026, 06:04 IST

Saraneshwar Mahadev Temple Sirohi: सिरोही के प्रसिद्ध सारणेश्वर महादेव मंदिर को प्रशासन ने पवित्र धाम घोषित कर दिया है. मंदिर के 1 किलोमीटर के दायरे में अब मांस और शराब की बिक्री तथा सार्वजनिक उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. यह निर्णय मंदिर की धार्मिक महत्ता और ऐतिहासिक गौरव को संरक्षित करने के लिए लिया गया है. 1298 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी की सेना से शिवलिंग को मुक्त कराने के बाद इस मंदिर की स्थापना हुई थी. देवड़ा चौहान राज परिवार के इष्टदेव के रूप में पूजे जाने वाले इस प्राचीन मंदिर के प्रति भक्तों की गहरी आस्था है.

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Sirohi: सिरोही जिले के आराध्य देव सारणेश्वर महादेव मंदिर को जिला प्रशासन ने पवित्र धाम घोषित करते हुए बड़ा निर्णय लिया है. अब मंदिर के 1 किलोमीटर की परिधि में शराब और मांस के उपयोग तथा बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. जिला मुख्यालय से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह प्राचीन मंदिर न केवल सिरोही, बल्कि जालौर और पाली जैसे आसपास के जिलों के श्रद्धालुओं के लिए भी अटूट आस्था का केंद्र है.

मंदिर के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए सिरोही जिला परिषद ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश पारित किए हैं. जिला परिषद के सीईओ शैलेंद्र जोशी ने बताया कि ग्राम पंचायत गोयली की ग्राम सभा में मंदिर को पवित्र धाम घोषित करने का प्रस्ताव लाया गया था. इसके बाद जिला परिषद की बैठक में इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया. इस निर्णय के तहत मंदिर के चारों ओर 1 किलोमीटर के क्षेत्र को शुद्ध शाकाहारी क्षेत्र घोषित किया गया है. लंबे समय से स्थानीय भक्त और मंदिर से जुड़े लोग इस मांग को उठा रहे थे, जिसे अब प्रशासन ने गंभीरता से लागू किया है.

मंदिर का गौरवशाली इतिहाससारणेश्वर महादेव मंदिर अपनी वीरगाथाओं और ऐतिहासिक महत्व के लिए पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है. स्थानीय भक्तों का मानना है कि यह मंदिर मुगल आक्रांताओं पर मिली जीत का प्रतीक है. इतिहास के पन्नों के अनुसार, 1298 ईस्वी में जब दिल्ली के शासक अलाउद्दीन खिलजी ने गुजरात के सोलंकी साम्राज्य को नष्ट करने के बाद रुद्रमाल शिवालय के शिवलिंग को ध्वस्त कर उसे जंजीरों से बांधकर दिल्ली ले जाने का प्रयास किया, तब सिरोही के शासक महाराव विजय राज ने इसका कड़ा विरोध किया. उन्होंने जालौर के कान्हड़देव सोनगरा और मेवाड़ के महाराणा रतन सिंह के साथ मिलकर खिलजी की सेना पर सिरनवा पहाड़ी की तलहटी में भीषण हमला किया और उन्हें करारी शिकस्त दी.

क्षारणेश्वर से सारणेश्वर बनने की कथाखिलजी की सेना से मुक्त कराए गए उस शिवलिंग को विधि-विधान के साथ उसी स्थान पर स्थापित किया गया था. उस समय हुए भीषण युद्ध में बहुत अधिक तलवारें चलाई गई थीं, जिसके कारण इस मंदिर का नाम ‘क्षारणेश्वर’ रखा गया था. समय के साथ धीरे-धीरे यह नाम बदलकर ‘सारणेश्वर’ हो गया. वर्तमान में यह मंदिर सिरोही के देवड़ा चौहान राज परिवार के इष्टदेव के रूप में पूजे जाने वाला एक प्रमुख धार्मिक स्थल है. प्रशासन का यह कदम न केवल मंदिर की पवित्रता को बनाए रखेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ऐतिहासिक धरोहर का सम्मान भी सुनिश्चित करेगा.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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