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Vande Mataram: पहली बार कब गूंजा ‘वंदे मातरम’, 150 साल पहले क्‍यों और किसने लिखा ये गीत?

Vande Mataram: असल में आजादी के समय अंग्रेजों ने एक तुगलकी फरमान जारी किया. इस आदेश में सरकारी मुलाजिमों को ‘गॉड सेव द क्वीन’गाना जरूरी कर दिया गया.इसी के गुस्से में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में ये गीत लिखा.इस गीत की रचना 7 नवंबर 1875 को की गई.अब यह गीत एक बार फ‍िर चर्चा में है.भारतीय संसद में इस गीत पर 10 घंटे तक चर्चा होने जा रही है.

वंदे मातरम: किसने और कब लिखा?

1870 का दशक. भारत पर ब्रिटिश हुकूमत का बोलबाला था और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय सरकारी नौकरी में डिप्टी मजिस्ट्रेट थे. तभी ब्रिटिशों ने हर सरकारी कार्यक्रम में इंग्लैंड की रानी की तारीफ वाला गीत’गॉड सेव द क्वीन’ गाना अनिवार्य कर दिया.ये आदेश सुनकर बंकिम को गुस्सा आ गया. उन्हें लगा अपनी धरती पर विदेशी रानी की जय-जयकार? बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.इसी राष्ट्रीय स्वाभिमान के जज्बे ने उन्हें प्रेरित किया. अक्षय नवमी के शुभ मौके पर उन्होंने 7 नवंबर 1875 को ‘वंदे मातरम’की रचना की. ये कविता सबसे पहले उनके मशहूर उपन्यास ‘आनंदमठ’ में 1882 में छपी, जो संन्यासी विद्रोह की कहानी पर आधारित है. उद्देश्य साफ था देशभक्ति की अलख जगाना. बंकिम ने इसे संस्कृत-मिश्रित बंगाली में लिखा, ताकि हर भारतीय इससे जुड़ सके.

कौन थे बंकिम चंद्र?

वंदेमातरम गीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय कोई साधारण आदमी नहीं थे. उनका जन्म 26 जून 1838 को पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के कांठलपाड़ा गांव में हुआ. 11 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई थी.बंकिम ने पहले भारतीय के तौर पर 1857 में प्रेसीडेंसी कॉलेज कोलकाता से बीए किया. फिर 1869 में कानून की डिग्री ली और तुरंत डिप्टी मजिस्ट्रेट बन गए. बंगाल सरकार में सचिव भी रहे. रायबहादुर और सीआईई जैसी उपाधियां हासिल कीं, लेकिन साहित्य में भी कमाल किया.27 साल की उम्र में पहला बंगाली उपन्यास ‘दुर्गेश नंदिनी’1865 में लिखा. बंगाली साहित्य को जनता तक पहुंचाने वाले पहले लेखक माने जाते हैं. बंकिम को भारत का ‘एलेक्जेंडर ड्यूमा’ कहते हैं. उन्होंने बंगाली और हिंदी दोनों में लिखा. 1891 में सरकारी नौकरी से रिटायर हुए और 8 अप्रैल 1894 को 56 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया. उनकी कलम ने 1857 के विद्रोह और संन्यासी बगावत जैसी घटनाओं को जिंदा रखा. ‘वंदे मातरम’ ने उन्हें अमर बना दिया.ये सिर्फ गीत नहीं, आजादी की पूरी संघर्ष गाथा है.

पहली बार कब और कैसे गूंजा ‘वंदे मातरम’?

अब सवाल ये कि पहली बार ये गीत कब गाया गया? भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में 1896 में कलकत्ता में पहली बार ये गीत गूंजा.महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे सुर और ताल दिए और पहली बार राजनीतिक मंच पर गाया. इससे पहले 1886 के कांग्रेस सेशन में हेम चंद्र बंदोपाध्याय ने शुरुआती दो पैरा गाए थे, लेकिन टैगोर का संस्करण असली हिट साबित हुआ. बस फिर क्या था ये क्रांतिकारियों का सबसे पसंदीदा नारा बन गया. बच्चे, जवान, बूढ़े, औरतें सबकी जुबां पर ‘वंदे मातरम’गूंजने लगा. स्वतंत्रता संग्राम में ये शक्ति का स्रोत बना.ब्रिटिशों ने इसे बैन करने की कोशिश भी की.जदुनाथ भट्टाचार्य ने शुरुआती धुन दी, लेकिन टैगोर ने रागों में ढाला. बाद में सुभाष चंद्र बोस ने इसे आईएनए का मार्चिंग सॉन्ग बनाया.

राष्ट्रीय गीत का दर्जा: अनुवाद से लेकर आजादी तक

‘वंदे मातरम’के शुरुआती दो पैरा संस्कृत में, बाकी बंगाली में है.इसके अनुवाद ने इसे और फैलाया. अरबिंदो घोष ने अंग्रेजी में और आरिफ मोहम्मद खान ने उर्दू में लिखा. आजादी के बाद 24 जनवरी 1950 को पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की.’जन गण मन’के साथ ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत का बराबर सम्मान मिला. भारत सरकार कहती है इसका आदर राष्ट्रगान जितना ही है.1937 में कांग्रेस ने सिर्फ पहले दो पैरा अपनाए, ताकि धार्मिक भावनाओं का ख्याल रहे. पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर ने 1915 से हर कांग्रेस सेशन में गाया.

गीत के बोल: जो मां भारती का गुणगान करते हैं

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्! सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम् सस्य श्यामलां मातरंम्. वंदे मातरम्, वंदे मातरम्! शुभ्र ज्योत्सनाम् पुलकित यामिनीम् फुल्ल कुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्, सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम् . सुखदां वरदां मातरम् ॥ वंदे मातरम्, वंदे मातरम्! कोटि कोटि कन्ठ कलकल निनाद कराले द्विसप्त कोटि भुजैर्ध्रत खरकरवाले के बोले मा तुमी अबले बहुबल धारिणीम् नमामि तारिणीम् रिपुदलवारिणीम् मातरम् ॥ वंदे मातरम्, वंदे मातरम्! तुमि विद्या तुमि धर्म, तुमि ह्रदि तुमि मर्म त्वं हि प्राणाः शरीरे बाहुते तुमि मा शक्ति, हृदये तुमि मा भक्ति, तोमारै प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे मातरम् ॥ वंदे मातरम्, वंदे मातरम्! त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी कमला कमलदल विहारिणी वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम् नमामि कमलां अमलां अतुलाम् सुजलां सुफलां मातरम् ॥ वंदे मातरम्, वंदे मातरम्! श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्धरणीं भरणीं मातरम् ॥ वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!

इस गीत का क्‍या अर्थ है?

ओ माता, मैं आपके सामने नतमस्तक होता हूं. ये धरती पानी से सींची, फलों से भरी, दक्षिण की वायु के साथ शांत है. हे धरती माता! आपकी रातें चांदनी की गरिमा में प्रफुल्लित हो रही हैं.आपकी जमीन खिलते फूलों वाले वृक्षों से बहुत सुंदर ढकी हुई है, हंसी की मिठास, वाणी की मिठास, माता, वरदान देने वाली, आनंद देने वाली.

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