Ground Report: बिश्नोई समाज के लिए आस्था, शिकारियों के लिए निशाना, हिरणों की रक्षा अब किसकी जिम्मेदारी?

पाली. हिरण केवल एक वन्य जीव नहीं, बल्कि वन्यजीव प्रेमियों और विशेष रूप से बिश्नोई समाज के लिए जीवन से भी बढ़कर हैं. इसके बावजूद आए दिन हिरण या तो आवारा कुत्तों का शिकार बन जाते हैं या फिर शिकारियों की क्रूरता का निशाना. फिल्म अभिनेता सलमान खान के हिरण शिकार प्रकरण के बाद कुछ वर्षों तक वन्यजीव शिकार की घटनाओं में कमी जरूर देखने को मिली थी, लेकिन बीते एक दशक में एक बार फिर हिरण शिकार की घटनाएं तेजी से बढ़ती नजर आ रही हैं.
आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में हिरण शिकार के 300 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जो वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बेहद गंभीर चिंता का विषय है. जोधपुर स्थित जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के वाइल्डलाइफ रिसर्च सेंटर के निदेशक हेमसिंह गहलोत का कहना है कि बिश्नोई समाज ने सदियों से अपने जीवन को वन्यजीवों की रक्षा के लिए समर्पित किया है और आज भी पूरी तत्परता के साथ इस जिम्मेदारी को निभा रहा है.
एक बार फिर बढ़े हिरण शिकार के मामले
जब सलमान खान पर हिरण शिकार के आरोप लगे थे, उस समय बिश्नोई समाज ने जिस गंभीरता के साथ इस मुद्दे को उठाया, उसने पूरे देश का ध्यान वन्यजीव संरक्षण की ओर खींचा. समाज के विरोध और जागरूकता के चलते मामला अदालत तक पहुंचा और अभिनेता को सजा भी हुई, जो वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है. इसके बाद कुछ समय तक हिरण शिकार की घटनाओं में गिरावट दर्ज की गई थी.
बदलते दिख रहे हैं हालात
हालांकि अब हालात फिर से बदलते दिख रहे हैं. सामने आए मामलों से पता चलता है कि कुछ आदिवासी समुदाय परंपरागत कारणों से, जबकि कुछ लोग शौकिया तौर पर हिरणों का शिकार कर रहे हैं. इसके अलावा कुछ लोग लालच में आकर भी इस अवैध गतिविधि में शामिल हो रहे हैं, जिससे वन्यजीव संरक्षण को लगातार नुकसान पहुंच रहा है.
जागरूकता और सख्त कार्रवाई की जरूरत
हेमसिंह गहलोत का कहना है कि केवल सामाजिक जागरूकता ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है. वन्यजीव संरक्षण कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करना और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करना जरूरी है, ताकि हिरण शिकार जैसी घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए वन्यजीवों को सुरक्षित रखा जा सके.



